शिलॉन्ग. मेघालय में 320 फीट गहरी कोयला खदान में फंसे 15 मजदूरों को बचाने की कोशिश 15वें दिन भी जारी है। अब तक एनडीआरएफ की टीम को कोई सफलता नहीं मिली है। खदान में 70 फीट की गहराई तक भरे पानी के चलते तलाश में दिक्कतें आ रही हैं। इस बीच बचाव दल के सदस्यों ने पहली बार कहा कि खदान से बदबू आ रही है। इसके बाद मजदूरों के जीवित रहने को लेकर चिंता बढ़ गई है। इधर, भारतीय कंपनी कि किर्लोस्कर ने मेघालय सरकार से मदद की पेशकश की है।
यह अच्छा संकेत नहीं- एनडीआरएफ
एनडीआरएफ के असिस्टेंट कमांडेंट ने संतोष सिंह ने कहा- खदान में पानी का स्तर जांचने के लिए एक गोताखोर क्रेन के सहारे उतरा था। 15 मिनट बाद जब उसने सीटी बजाई तो उसे वापस ऊपर खींचा गया। पहली बार बचावकर्मी ने खदान से बदबू आने की बात कही। यह अच्छा संकेत नहीं है। हालांकि, चमत्कार होते हैं और हम अपनी उम्मीद नहीं छोड़ रहे हैं। लेकिन, व्यवहारिक तौर पर कहूं तो इस तरह के मामलों में मौके काफी कम होते हैं। थाईलैंड में गुफा में फंसे बच्चों के मुकाबले, यहां की स्थितियां ज्यादा मुश्किल हैं।
100 हॉर्स पावर के पंप मांगे, कोई जवाब नहीं मिला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनडीआरएफ ने जिला प्रशासन से 100 हॉर्स पावर के पंप मांगे थे लेकिन अब तक इस मांग पर कोई जवाब नहीं दिया गया है। बचाव स्थल पर अभी एनडीआरएफ के 70 और एसडीआरएफ के 22 सदस्य मौजूद हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक मजदूरों के बारे में हमें कोई सुराग नहीं मिला है। वे किस हाल में हैं, इसकी कोई जानकारी नहीं है।
किर्लोस्कर कंपनी ने बढ़ाया मदद का हाथ
दूसरी ओर, थाईलैंड की सुरंग में फंसे बच्चों के बचाव अभियान के दौरान उपकरण भेजने वाली भारतीय कंपनी किर्लोस्कर ने मेघालय सरकार से मदद की पेशकश की है। कंपनी ने कहा- हमें मजदूरों की फिक्र है। हम अभियान में हर संभव मदद करने को तैयार हैं। हम मेघालय सरकार से संपर्क में हैं। हम उम्मीद करते हैं कि सभी खदान मजदूरों को सुरक्षित बचा लिया जाए।
350 फीट गहरी खदान में पानी भरने से फंसे थे मजदूर
ये मजदूर शिलॉन्ग के पास पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में स्थित खदान में फंस गए थे। यह खदान करीब 350 फीट गहरी है। मजदूर खुदाई कर रहे थे, इसी दौरान खदान के पास बहने वाली लेटेन नदी का पानी इसमें भर गया था। इसी पानी को निकालने के लिए पंप मंगाए गए थे, लेकिन इनकी क्षमता नाकाफी साबित हो रही है।
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