नई दिल्ली (शरद पाण्डेय).तीखे या अंधे मोड़ पर अक्सर गाड़ियों का बैलेंस बिगड़ जाता है। ये हादसे की भी वजह बनता है। ऐसे मोड़ों पर गाड़ियों का बैलेंस बिगड़ने से 2017 में करीब 54 हजार सड़क हादसे हुए। इनमें 17 हजार लोगों की जान गई। इसे कम करने के लिए हर फोर-व्हीलर में इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल सिस्टम लगाया जाएगा। सड़क परिवहन मंत्रालय ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। फरवरी में नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा और 2021 से सिर्फ ये सिस्टम लगी कारें ही बिकेंगी।
2021 से बाजार में आने वाली एम-1 ग्रेड (9 या इससे कम सीटों वाली) कारों में स्टेबिलिटी कंट्रोल लगाना अनिवार्य होगा। अभी दुनिया के हर देश में गाड़ियों में ये सिस्टम वैकल्पिक होता है। 2021 से भारत पहला देश होगा, जहां सिर्फ स्टेबिलिटी कंट्रोल लगी कारें ही बिकेंगी।
दरअसल तीखे मोड़ पर अचानक ब्रेक लगाने पर पिछले टायर की ग्रिप कमजोर हो जाती है। ऐसे में टायर फिसलने और गाड़ी के अनियंत्रित होने का खतरा रहता है। ये हादसे का कारण बनता है। स्टेबिलिटी कंट्रोल सिस्टम लगने से मोड़ पर खुद-ब-खुद वाहन की स्पीड और झुकाव दोनों एडजस्ट हो जाएंगे। स्टेबिलिटी कंट्रोल लगाने के लिए वाहन निर्माता कंपनियों को गाड़ियों के निर्माण में बदलाव करने होंगे। इसीलिए मंत्रालय नोटिफिकेशन जारी करने के बाद कंपनियों को 2 साल का समय दे रहा है।
सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चर्स के महासचिव सुगांतो सेन बताते हैं कि- वाहनों में स्टेबिलिटी कंट्रोल सिस्टम लगाने का असर कीमतों पर भी पड़ेगा। देश में 2017 में करीब साढ़े 4 लाख सड़क हादसे हुए। इनमें से करीब 54 हजार हादसे तीखे मोड़ पर गाड़ी अनियंत्रित होने की वजह से ही हुए। इनमें 17 हजार लोगों की जान गई।
स्टेबिलिटी कंट्रोल सिस्टम में जायरोस्कोप सेंसर लगा होता है। जायरोस्कोप सेंसर किसी वस्तु के झुकाव को पहचानने का काम करता है। ये सेंसर मोबाइल फोन में भी लगा होता है। इसकी वजह से ही फोन को सीधा रखने या झुकाने पर वीडियो उसी तरह एडजस्ट हो जाता है। यही सेंसर स्टेबिलिटी कंट्रोल में भी लगा होगा, जो टायरों के मोड़ पर झुकने को पहचान लेगा और उसी हिसाब से गाड़ी की स्पीड और टायर के झुकाव को एडजस्ट कर देगा।
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