नई दिल्ली. गर्भवती को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाए जाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केंद्र और तमिलनाडु सरकार को नोटिस भेजा है। तमिलनाडु सरकार से पूछा गया है कि आपने इस मामले में क्या कदम उठाए, आरोपियों पर क्या कार्रवाई की गई और पीड़ित को क्या सहायता मुहैया कराई गई। सरकार को 4 हफ्तों के भीतर जवाब देना है।
डोनर का परिवार घटना का पता चलने से परेशान
शुरुआती जांच में अस्पताल अधिकारियों ने उस युवक का पता लगा लिया था, जिसने रक्तदान किया था। वह एचआईवी संक्रमित था। उसने सत्तूर में लगे कैम्प में रक्तदान किया था। अधिकारियों के मुताबिक, जब काउंसलर ने उसे फोन करने की कोशिश की तो पता चला कि वह शहर से बाहर है। उसे जल्द से जल्द अस्पताल आने को कहा गया था। हालांकि, इस युवक ने शुक्रवार को जहर खाकर खुदकुशी की कोशिश की, क्योंकि उसका परिवार एचआईवी से जुड़े इस मामले का पता चलने से परेशान था और इसका सामना नहीं कर पा रहा था।
हाईकोर्ट ने भी मांगी रिपोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को 3 जनवरी तक रिपोर्ट पेश करने को कहा है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा पूछा है कि मामले में क्या कदम उठाए गए हैं।
डॉक्टरों ने दी थी खून चढ़ाने की सलाह
3 दिसंबर को सत्तूर जिले की रहने वाली आठ माह की गर्भवती को डॉक्टरों ने खून की कमी होने पर ब्लड चढ़वाने की सलाह दी थी। उसते परिजन शिवकाशी के सरकारी अस्पताल से एक यूनिट ब्लड लेकर आए थे। ब्लड चढ़ाने के बाद महिला की हालत लगातार गिरती चली गई। फिर जांच में उसे एचआईवी पॉजिटिव रक्त चढ़ाए जाने का मामला सामने आया। इसके बाद राज्य सरकार ने सभी ब्लड बैंकों की जांच के निर्देश दिए थे। शिवकाशी ब्लड बैंक के तीन कर्मचारियों को निलंबित भी कर दिया गया है।
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