जयपुर.मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से कड़े मुकाबले में हारने वाले मानवेंद्र सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट से बड़े अंतर से चुनाव हारे युनूस खान, इस विधानसभा चुनाव में सबसे चर्चित चेहरे के रूप में उभरे हैं। पार्टियों ने दोनों को किसी चमत्कार की उम्मीद में ही इन दिग्गजों के सामने उतारा था।
लेकिन, ऐसा चमत्कार हुआ नहीं। यह भी सही है कि प्रत्याशी बनाए जाते समय ही दोनों अच्छी तरह वाकिफ थे कि जीत से ज्यादा पार्टियां उनका राजनीतिक इस्तेमाल ज्यादा कर रही है। मानवेंद्र भले चुनाव हार गए। पार्टी सत्ता में आ गई है। उम्मीद है कि उन्हें सरकार किसी बोर्ड या राजनीतिक पद देकर हार का इनाम दे सकती है। युनूस खान को भी पार्टी संगठन में किसी पद से नवाज सकती है। विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद सबसे चर्चा में रहे इन दोनों नेताओं के भविष्य को लेकर अभी से कयासबाजी तेज हो गई है।
शिव, डीडवाना से उतरते तो बात कुछ और होती :
कांग्रेस का दामन थामने से पहले मानवेंद्र सिंह गत चुनाव में पहली बार भाजपा की टिकट पर शिव से विधायक चुने गए थे। चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस का दामनथाम लिया। उन्होंने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा जताई थी। बावजूद, शिव से करीब 700 किलोमीटर दूर झालरापाटन सीट पर वसुंधरा राजे के सामने कांग्रेस ने प्रत्याशी बना दिया। उन्हें 81 हजार से अधिक वोट मिले और करीब 35 हजार वोटों से चुनाव हार गए।
डीडवाना से भाजपा विधायक यूनुस खान के साथ भी ऐसा हुआ और उन्हें डीडवाना से 260 किमी दूर टोंक विधानसभा सीट से उतार दिया गया। युनूस को 54 हजार वोट मिले और वह इतने ही वोटों से चुनाव हार गए।
जब मानवेंद्र 31 हजार, युनूस 11 हजार से जीते :
मानवेंद्र सिंह ने वर्ष 2013 में बाड़मेर की शिव सीट से भाजपा की टिकट की पर चुनाव लड़ा था। उन्हें एक लाख से अधिक वोट मिले और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को 31 हजार से अधिक वोटों से हराया था। वहीं, डीडवाना विधानसभा सीट पर यूनुस खान को 68 हजार से अधिक वोट मिले और उन्होंने 11 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी। यूनुस खान एवं मानवेंद्र सिंह इन्हीं सीटों से चुनाव में उतरते तो फायदे में रह सकते थे।
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