पटना.रालोसपा नेता उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन के तीसरे मजबूत पार्टनर बनेंगे। एनडीए छोड़ने के बाद उनकी महागठबंधन में शामिल होने की अब औपचारिकता ही बच गई है। बिहार महागठबंधन की अगुवाई करने वाली राजद के नेता तेजस्वी यादव कई बार सार्वजनिक रूप से उन्हें महागठबंधन में आने का निमंत्रण दे चुके हैं।
ऐसे में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद उनकी पार्टी या यों कहे कि वे खुद महागठबंधन की मजबूती के लिए काम करेंगे। एक साल से वे महागठबंधन के नेताओं के संपर्क में थे। पूरी उम्मीद है कि वे पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव के साथ कांग्रेस नेतृत्व से अब लोकसभा चुनाव में अपनी हिस्से की सीट पर चर्चा करेंगे। ऐसे में बिहार महागठबंधन में राजद और कांग्रेस के बाद उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा तीसरी मजबूत राजनीतिक शक्ति हो जाएगी।
कांग्रेस कर सकती 18-20 सीटों का दावा
महागठबंधन के नेताओं की मानें तो कांग्रेस का राष्ट्रीय और राज्य नेतृत्व उपेंद्र कुशवाहा व शरद यादव के साथ बिहार में 18 से 20 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा ठोक सकता है। उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन में शामिल होने के लिए राजद से ज्यादा कांग्रेस नेताओं के संपर्क में लगातार रहे हैं। उनकी तरफ से कांग्रेस नेतृत्व द्वारा अब राजद के नेता लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव से सीट के बाबत बात को आगे बढ़ाने की संभावना है। वैसे रालोसपा की तरफ से बिहार में 6 सीट की डिमांड की जाती रही है। पर, बिहार में अभी 4 सीट ही उन्हें देने का आश्वासन मिलता रहा है। काराकाट, सीतामढ़ी, नवादा के साथ एक और सीट देने की बात कही गई है। उनकी डिमांड की दो अन्य सीटों पर कोई बात नहीं हुई है।
पांच सीट पर बन सकती है बात
राजद सूत्रों के मुताबिक रालोसपा के महागठबंधन में आने के औपचारिक एलान के बाद एक और सीट यानी बिहार में अधिकतम 5 सीट दी जा सकती है। महागठबंधन पूरा करने के लिए कांग्रेस और राजद का प्रदेश नेतृत्व एनडीए विरोधी अन्य सभी दलों को जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है। इसमें रालोसपा के साथ-साथ माले, लोजद, हम सेक्युलर, सीपीआई, सपा और बसपा के साथ भी सीट एडजस्टमेंट की बात होनी है। इसके पीछे तर्क यह है कि जदयू और भाजपा विरोधी मतों का बंटवारा नहीं हो, जिससे लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीट महागठबंधन की झोली में आ सके।
पार्टी में बगावत, उपेंद्र के खिलाफ भगवान ने खोला मोर्चा
पटना|केंद्रीय राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा के एनडीए से नाता तोड़ने के साथ ही रालोसपा में बगावत हो गई है। रालोसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व मुख्य प्रवक्ता भगवान सिंह कुशवाहा ने उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्री बनाकर कुशवाहा समाज का सम्मान बढ़ाया था। पीएम ने जिस तरह उपेंद्र पर भरोसा किया, इस भरोसे को तोड़कर उन्हें बीच में एनडीए छोड़कर नहीं जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए 'कुछ दूसरे हाथों' की कठपुतली बन चुके थे। उन्होंने एनडीए छोड़ने का मन बना लिया था। जो कार्यकर्ता नहीं चाहते थे कि कुशवाहा एनडीए से अलग हों, उनलोगों से बातचीत के बाद निर्णय लिया जाएगा कि किस पार्टी के साथ जाएंगे। हम रालासपा में नहीं रहेंगे, यह तय है।
एनडीए होगा और मजबूत
ललन गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष व विधायक ललन पासवान ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा के अलग होने से एनडीए पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। एनडीए और मजबूत होगा। साढ़े चार साल तक मंत्री बनकर मलाई खाने बाले कुशवाहा को आज ज्ञान हुआ की भाजपा आरएसएस के एजेंडा लागू कर रही है। कुशवाहा के किसी बयान को जनता नोटिस नहीं लेने वाली है।
राजनीति के साइबेरियन क्रेन है उपेंद्र कुशवाहा : संजय सिंह
प्रदेश जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से उपेंद्र कुशवाहा के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उनकी तुलना साइबेरियन क्रेन से की है, जो मौसम बदलने के साथ स्थान बदल देता है। उन्होंने कहा कि साढ़े चार साल से ज्यादा वक्त तक केंद्र सरकार में मंत्री पद का सुख भोगते रहे, तब उनको सबकुछ ठीक लग रहा था। और आज जब पद छोड़ना पड़ा तो आपको केंद्र की राजग सरकार में खामियां दिख रही हैं। प्रदेश जदयू के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश की जनता सब समझती है और आने वाले चुनाव में कुशवाहा को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
सम्राट बोले- टाइटल बदल लेने से कोई समाज का हितैषी नहीं हो जाता
उपेंद्र कुशवाहा के एनडीए छोड़ने पर भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि एनडीए ने उन्हें पूरा सम्मान दिया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने खुद उन्हें मिलने के लिए बुलाया था। लेकिन, कुशवाहा के पास समय ही नहीं था। वे अपने कार्यक्रम में व्यस्त थे। उनके पास राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने का समय नहीं था। इससे स्पष्ट है कि वे जो आज कर रहे हैं, वह उनके अंदर पहले से तय था। बाद में जब राष्ट्रीय अध्यक्ष तीन राज्यों के चुनाव में व्यस्त हो गए तो वे उनसे समय मांगने लगे। उन्होंने कहा कि रालोसपा में टूट के बाद भी उपेंद्र कुशवाहा को केंद्र में मंत्री बनाए रखा गया। इससे बड़ा सम्मान क्या होगा? यूपी चुनाव में पीएम को जेपी-लोहिया का नाम लेकर कई तरह की नसीहत देने वाले उपेंद्र कुशवाहा ने उस समय भी गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया। फिर भी उन्हें पूरा सम्मान दिया गया। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत केंद्रीय मंत्रिमंडल के वरीय सदस्यों को देखने के बाद भी यदि उन्हें सामाजिक न्याय को लेकर आरोप लगाना है तो यह उनका पूर्वाग्रह ही होगा। उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा को चुनौती दी कि वे कोई एक काम बताएं, जो बिहार या समाज के हित के लिए किया हो?
रालोसपा के एनडीए छोड़ने से मजबूत होगा विपक्ष : कांग्रेस
कांग्रेस ने रालोसपा के एनडीए छोड़ने के फैसले को सही समय पर सही फैसला करार दिया। प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने कहा कि एनडीए के सहयोगी लगातार उसका साथ छोड़ रहे हैं। 2019 के चुनाव में भाजपा को पराजित करने के लिए सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतें एक मंच पर आ रही हैं।कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार का सफाया निश्चित देख एनडीए का कुनबा बिखरने लगा है। मोदी सरकार की तानाशाही से जनता उब चुकी है। उपेंद्र कुशवाहा ने भी कहा है कि सरकार आरएसएस के एजेंडा पर काम कर रही है।
दरकने लगा एनडीए का किला : हम
हम सेक्युलर ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देते ही झूठे वादों और जुमलों के सहारे सत्ता में आई केंद्र सरकार की उलटी गिनती शुरू हो गई है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा कि मोदी सरकार का किला दरकने लगा है। राजग में भगदड़ की स्थिति है। कुशवाहा के इस्तीफे के बाद मोदी सरकार का जाना तय है।
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