नेशनल डेस्क. मोदी सरकार ने सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय कैबिनेट की सोमवार को हुई बैठक में यह फैसला किया गया। यह आरक्षण सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए आर्थिक आधार पर दिया जाएगा। फायदा उन सवर्णों को मिलेगा, जिसकी सलाना इनकम 8 लाख रुपए या इससे कम है, जिसके पास 5 एकड़ या उससे कम खेती जमीन है, 1000 वर्ग फुट से कम जमीन पर मकान है। इसके अलावा कस्बों में 200 गज जमीन वालों को, शहरों में 100 गज जमीन वालों को इसका लाभ मिलेगा।
- इस श्रेणी में राजपूत, भूमिहार, बनिया, जाट, गुर्जर को आरक्षण मिलेगा। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन होगा। यह 10% आरक्षण मौजूदा 49.5% कोटे के अलावा होगा। आरक्षण लागू कराने के लिए सरकार को संविधान संशोधन विधेयक पारित कराना होगा, जो मंगलवार को पेश किया जा सकता है। ऐसे में बताते हैं कि कब हुई आरक्षण की शुरुआत और आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण कोट...
कैसे हुई आरक्षण की शुरुआत : आजादी के पहले प्रेसिडेंसी रीजन और रियासतों के एक बड़े हिस्से में पिछड़े वर्गों (ओबीसी) के लिए आरक्षण की शुरुआत हुई थी। महाराष्ट्र में कोल्हापुर के महाराजा छत्रपति साहूजी महाराज ने 1901 में पिछड़े वर्ग से गरीबी दूर करने और राज्य प्रशासन में उन्हें उनकी हिस्सेदारी (नौकरी) देने के लिए आरक्षण शुरू किया था। यह भारत में दलित वर्गों के कल्याण के लिए आरक्षण उपलब्ध कराने वाला पहला सरकारी आदेश है।
- 1908 में अंग्रेजों ने प्रशासन में हिस्सेदारी के लिए आरक्षण शुरू किया।
- 1935 में भारत सरकार अधिनियम 1935 में सरकारी आरक्षण को सुनिश्चित किया गया।
- 1942 में बाबा साहब अम्बेडकर ने सरकारी सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण की मांग उठाई।
क्या था आरक्षण का उद्देश्य और मॉडल : आरक्षण का उद्देश्य केंद्र और राज्य में सरकारी नौकरियों, कल्याणकारी योजनाओं, चुनाव और शिक्षा के क्षेत्र में हर वर्ग की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए की गई। जिससे समाज के हर वर्ग को आगे आने का मौका मिले। आरक्षण किसे मिले, इसके लिए पिछड़े वर्गों को तीन कैटेगरी अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में बांटा गया।
केंद्र के द्वारा दिया गया आरक्षण
वर्ग - कितना आरक्षण
अनुसूचित जाति (SC) - 15 %
अनुसूचित जनजाति (ST) - 7.5 %
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) - 27 %
कुल आरक्षण - 49.5 %
(नोट- बाकी 50.5 % आरक्षण जनरल कैटेगरी के लिए रखा गया, जो कि SC/ST/OBC के लिए भी खुला है)
आरक्षण से जुड़े कुछ अहम फैक्ट : 15(4) और 16(4) के तहत अगर साबित हो जाता है कि किसी समाज या वर्ग का शैक्षणिक संस्थाओं और सरकारी सेवाओं में उनका पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है तो आरक्षण दिया जा सकता है।
- 1930 में एच. वी. स्टोर कमेटी ने पिछड़े जातियों को 'दलित वर्ग', 'आदिवासी और पर्वतीय जनजाति' और 'अन्य पिछड़े वर्ग' (OBC) में बांटा था।
- भारतीय अधिनियम 1935 के तहत 'दलित वर्ग' को अनुसूचित जाति और 'आदिम जनजाति' को पिछड़ी जनजाति नाम दिया गया।
क्या है आरक्षण का आधार : भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके लिए शर्त है कि उस खास वर्ग को साबित करना होगा कि वह अन्य वर्गों के मुकाबले सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा हुआ है।
क्या है आरक्षण देने का तरीका : भारत में आरक्षण के लिए राज्यों ने पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। जिसका काम राज्य के अलग-अलग तबक़ों की सामाजिक स्थिति का ब्यौरा रखना है। ओबीसी कमीशन इसी आधार पर अपनी सिफारिशें देता है। अगर मामला पूरे देश का है तो राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग अपनी सिफारिशें करे। 1993 के मंडल कमीशन केस में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बैंच ने कहा था कि जाति अपने आप में आरक्षण का आधार नहीं बन सकती। उसमें दिखाई देना चाहिए कि पूरी जाति शैक्षणिक और सामाजिक रूप से बाकियों से पिछड़ी है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- 50% से अधिक नहीं होना चाहिए आरक्षण
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में साफ किया था कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग या इनके अलावा किसी भी अन्य विशेष श्रेणी में दिए जाने वाले आरक्षण का कुल आंकड़ा 50% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 16 (4) में देश के पिछड़े नागरिकों को आरक्षण देने का जिक्र है। केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय ने जुलाई 2016 में बताया था कि देश में अभी जातिगत आधार पर 49.5% आरक्षण दिया जा रहा है।
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