भारतीय राज़निती का ऐतिहासिक़ मोड!!

सखी सैयान् तो खुबै कमात है...
महँगाई डायन खायै जात है...

साल था 2010, फिल्म आई पीपली लाइव। लोगो ने फिल्म देख देख कर सरकार को महँगाई पर जी भर के गाली दी। देनी भी चाहिए थी, आखिर दैनिक इस्तेमाल के सारी चीज़ो की कीमतों में लगातार वृद्धि जो हो रही थी।
ये धरना, प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाने का दौर 2014 तक चला, नतीज़तन कांग्रेस देश के 16 वी लोकसभा चुनावों में बुरी तरह हार गई।
फिर आई सबसे आदर्श सरकार जिसने जोश जोश में जनता से कुछ ज्यादा ही वादे कर दिये। चलिए, यहाँ तक सही भी था। हमारा देश के लोग थोडे मासूम है, जल्दी मोह माया के आगोश में आ जाते हैंं। और भारतीय राज़निती वादों के सहारे हीं चलती है।
जब घटि मोह समाईया, सबै भया अंधियार। जब शरीर भ्रम में होता है, तो सब अंधेरा हो जाता है। तो सबने मिल के बैठा दिया गद्दी पर कि लो जी, थाम लो देश की कमान और चलाओ ऐसा जादू कि सबके दुख कष्ट दूर हो जाये।
साँच कहूं तो मारिहैं, झूठे जग पतियाइ। कबिरानुसार, सच-सच कहूँ तो लोग मारने दौड़ेंगे, दुनिया तो झूठ पर ही विश्वास करती है। हमारे यहाँ तो चिट फंड वाले भी रुपये दोगुने करने का सुनहरे ख़्वाब दिखा कर करोड़ो का कारोबार हर साल कर लेते हैं। हुआ भी यही, सरकार बन तो गयी लेकिन सवाल जनता को वापिस से लपेटे में लेने का था क्योंकि जो आपके हाथ में है ही नहीं आप वो कैसे कर सकते हैं?
पेट्रोल-डिज़ल के दाम, स्विस बैंक के खातों से पैसे वापिस लाना इत्यादि अंतरराष्ट्रीय विषय हैं, इनका हल आज तक ना ही कोई सरकार ढूंढ पाई है और ना ही ढूंढ पाएगी। लेकिन अब वादा तो वादा था, सो काले धन वाली बात रखने को साहब ने ढलते शाम नोट-बंदी वाली चौपाई पढ दी। लगे हाथ लगभग सारे भाज़पाईयो ने भी अपने सारे काले धन बैंकों के मिक्सर में डाल कर सफेद कर ली।
फिर बवाल हो गया। क्योंकि नोट-बंदी नामक कांड ने 150 ज़िंदगियां लील ली। साथ ही साथ 99.3% नोटों के बैंकों में वापिस आने पर सारी बयान बाज़ी हवा हो गयी।
अब धीरे धीरे सरकार के सारे पर्चे खुलने लगे हैं। राफेल डील पर सरकार बैकफुट पर चली गयी है। साथ ही जिओ इंस्टीट्यूट के प्रमाणिकता पर भी सरकार के पास कोई वाज़िब जवाब नही है।
जनता को sc/st, गौ रक्षा, राम मंदिर और कांग्रेस भगाओ-हिंदुत्व बचाओ जैसे गुमराह करने वाले मुद्दे देकर चुपके चुपके सारे सरकारी क्षेत्रों में निजीकरण करके सरकारी नौकरियों का अस्तित्व हीं खत्म करने की कवायद चल रही है। लोग खुले आंखों से भी नहीं देख पा रहे कि ये उनके हीं भविष्य के प्रतिबिम्ब को धुँधला करने की मुहिम है।
वर्तमान स्थिति में सिर्फ ये कहा जा सकता है कि अपने आस-पड़ोस में होने वाली घटनाओं को नज़रअंदाज़ कर के आगे बढ़ जाएं और तकलीफ़ सह कर भी सरकार की नीतियों पर सवाल ना करें, वरना आपकी तकलीफ़ और बढ सकती है।
हर तरफ बेचैनी, खामोशी और ख़ौफ़ का एक वातावरण बनाने की कोशिश की जा रही है। अब लोग हिंदुत्व के नाम पर खुले आम सोशल मिडीया पर धमकी और नफरत भरे प्रचार कर रहे हैं। समझने वाली बात है कि ये माहौल सिर्फ किसी खास के लिये नहीं बल्कि मेरे आपके और हम सबके लिये एक चेतावनी भरा संदेश है। आज भले हीं इनके निशानों पर कोई और समुदाय या व्यक्ति विशेष हो, लेकिन ये याद रखियेगा कि किसी ना किसी दिन इनके निशाने पर आप भी होंगे और बाकियों की भीड़ आपको हीं दोषी करार देगी और बिना किसी मुकदमे के हीं आपके जीने मरने का भी फैसला आपके हीं शहर के किसी चौराहे पर सरे आम हो जायेगा।
वक़्त बदल रहा है। किसी के होने ना होने से भले आपको फर्क़ नहीं पड़ता होगा, लेकिन इंसानियत के खत्म होने से खतरा आपको भी है और हमें भी। हां ये ज़रुर हो सकता है कि आपको खतरे का आभास शायद कुछ दिनों बाद हो, लेकिन होगा ज़रुर।

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