न्यूज डेस्क। नए साल से देशभर में कई बदलाव होने जा रहे हैं। इसमें से कुछ बदलाव आपको राहत देंगे तो कुछ आपकी परेशानी को भी बढ़ा सकते हैं। जैसे यदि आपने बैंक का काम 31 दिसंबर तक नहीं निपटाया तो 1 जनवरी से आपको एटीएम से ट्रांजैक्शन में दिक्कत हो सकती है। ऐसे में हम बता रहे हैं ऐसे 5 बदलावों के बारे में जो नए साल में होने जा रहे हैं। किस भी तरह की परेशानी से बचने के लिए आप जान लीजिए कि कौन से काम 31 दिसंबर के पहले-पहले निपटाना जरूरी हैं।
पहला बदलाव
1 जनवरी से मैग्नेटिक स्ट्रिप डेबिट/ क्रेडिट कार्ड काम करना बंद कर देंगे। मैग्नेटिक स्ट्रिप वाले कार्ड की जगह ईएमवी चिप बेस्ड कार्ड काम करेंगे। बता दें कि, आरबीआई के निर्देशानुसार बैंक मैग्नेटिक स्ट्रिप कार्ड को ईएमवी चिप कार्ड से रिप्लेस कर रहे हैं। ऐसा फ्रॉड को रोकने के लिए किया जा रहा है।
क्या है दोनों कार्ड्स में अंतर
- मैग्नेटिक स्ट्रिप कार्ड से ट्रांजैक्शन के लिए कार्डहोल्डर के सिग्नेचर या पिन की जरूरत होती है। इस पर आपके अकांउट की डिटेल्स मौजूद होती है। इसी स्ट्रिप की मदद से कार्ड स्वाइप के वक्त मशीन आपके बैंक इंटरफेस से जुड़ती है और प्रोसेस आगे बढ़ता है।
- वहीं, चिप वाले कार्ड में सारी इन्फॉरमेशन चिप में मौजूद होती है। इनमें भी ट्रांजैक्शन के लिए पिन और सिग्नेचर जरूरी होते हैं लेकिन, ईएमवी चिप कार्ड में ट्रांजैक्शन के वक्त यूजर को ऑथेंटिकेट करने के लिए एक यूनीक ट्रांजैक्शन कोड जनरेट होता है, जो वेरिफिकेशन को सपोर्ट करता है. ऐसा मैग्नेटिक स्ट्रिप कार्ड में नहीं होता।
दूसरा बदलाव
1 जनवरी से बैंक नॉन सीटीएस चेक स्वीकार नहीं करेंगे। बैंकों ने इसकी जानकारी काफी दिनों पहले ही ग्राहकों को दे दी थी।
RBI ने जारी की है गाइडलाइन
अब तक देश में बैंक जिन चेकबुक का इस्तेमाल करती हैं वे पुराने तरीके वाली हैं। जबकि कई देशों में CTS (Cheque Truncation System) शुरू हो चुका है। ऐसे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी भारत में अब CTS की सुविधा शुरू करने की बात कही है। इसके लिए उसने बैंकों को 31 दिसंबर, 2018 तक का वक्त दिया गया था। इसी के चलते अब सभी बैंक Non-CTS चेक वाला पेमेंट नहीं करेंगे।
तीसरा बदलाव
1 जनवरी, 2019 से कार, बाइक और स्कूटर के पर्सनल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस से जुड़े नियमों में बदलाव होने जा रहा है। सरकारी एजेंसी इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने एक्सीडेंट में मरने वाले कार/कमर्शियल व्हीकल्स ड्राइवर या टू-व्हीलर राइडर के लिए कंपल्सरी पर्सनल एक्सीडेंट (CPA) कवर को 1 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपए कर दिया है। यानी सभी व्हीकल इंश्योरेंस कंपनियों को अपनी पॉलिसी में नए नियमों को शामिल करना
होगा। इस बारे में IRDAI ने सभी इंश्योरेंस कंपनियों को सर्कुलर जारी कर दिया है।
मद्रास हाईकोर्ट ने दिए था आदेश
अक्टूबर 2017 में मद्रास हाईकोर्ट ने IRDAI को पर्सनल एक्सीडेंट कवर को 1 लाख रुपए से बढ़ाकर कम से कम 15 लाख रुपए करने का आदेश दिया था। इस नए नियम से एक्सीडेंट में मरने वाले कार या बाइक मालिकों के फैमिली को मदद मिलेगी।
चौथा बदलाव
कारों की कीमतें नए साल में बढ़ सकती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टोयोटा और फोर्ड जैसी कंपनियां 2019 से कीमतों को बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। बता दें कि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा है। इससे कार मैन्युफैक्चरिंग की लागत बढ़ रही है। इसी कारण कंपनियां दाम बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर की ओर से कहा जा चुका है कि कंपनी 1 जनवरी से कार कीमतों में 4 फीसरी की बढ़ोत्तरी करने के बारे में सोच रही है। फोर्ड इंडिया ने भी लागत बढ़ने के चलते गाड़ियों की कीमत में 3 फीसदी तक बढ़ोत्तरी की बात कही है।
पांचवा बदलाव
अब आपको नेशनल पेंशन स्कीम पर टैक्स नहीं देना होगा। सरकार इसे EEE कैटेगरी में लाने की घोषणा कर चुकी है। यानी 2019-20 से एनपीएस का मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने या रिटायरमेंट पर एनपीएस से की जाने वाली निकासी पर टैक्स पूरी तरह से फ्री होगा।
क्या है एनपीएस
एनपीएस एक रिटायरमेंट सेविंग अकाउंट है। इसकी शुरुआत 1 जनवरी 2004 को की गई थी। पहले यह स्कीम सिर्फ गवर्नमेंट इम्प्लॉई के लिए थी लेकिन 2009 से प्राइवेट सेक्टर के इम्प्लॉईज के लिए भी शुरू हो गई।
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