गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम प्रयागराज में 14 जनवरी से 4 मार्च तक कुंभ मेला लगेगा। यह है तो अर्धकुंभ, लेकिन चुनावी साल होने की वजह से इसकी तैयारियां कुंभ मेले जैसी हैं। 2012 में मेले का बजट 200 करोड़ रु. था। चुनावी साल होने की वजह से उत्तरप्रदेश सरकार ने इस बार बजट 12 गुना से ज्यादा बढ़ाकर 2500 करोड़ रु. किया है। यहां 15 करोड़ लोगों के जुटने की उम्मीद है। मेले में लगे सैकड़ों काउंटरों पर स्पेशल डेबिट कार्ड बनाए जाएंगे। इससे आपको जेब में नकदी रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जब आप वापस जाएंगे तो डेबिट कार्ड में बचे पैसों को भी वापस ले सकेंगे।
कुंभ स्नान की प्रमुख तिथियां
| 15 जनवरी | मकर संक्रांति |
| 21 जनवरी | पौष पूर्णिमा |
| 4 फरवरी | मौनी अमावस्या |
| 10 फरवरी | बसंत पंचमी |
| 19 फरवरी | माघी पूर्णिमा |
| 4 मार्च | महाशिवरात्रि |
- भारत 27 सितंबर को वर्ल्ड टूरिज्म डे की मेजबानी करेगा। उम्मीद की जा रही है कि विदेशी पर्यटक 20% तक बढ़ेंगे। 2018 में 1 करोड़ विदेशी आए, जो 2017 से 14% ज्यादा थे।
- विदेशी पर्यटकों ने भारत में पिछले साल 1,77 लाख करोड़ रु. खर्च किए। इसमें 30% बढ़ोतरी की उम्मीद है। पिछले साल विदेशी पर्यटकों से होने वाली कमाई में 19% का इजाफा हुआ था।
- भारत में दो बड़े टूरिस्ट स्पॉट उभरेंगे। पहला गुजरात में सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा स्थल और दूसरा उदयपुर में शिव की सबसे ऊंची प्रतिमा। इसका 90% काम पूरा हो चुका है।
- कृषि क्षेत्र में यूएन यह साल बाजरे काे समर्पित कर सकता है। कारण है उपज में बेहद कम पानी का इस्तेमाल और इसमें जरूरी पोषक तत्वों की प्रचुर मात्रा। यह प्रस्ताव भारत ने दिया है।
- इस साल देशभर में 99 बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा। फसल बीमा योजना में नुकसान का सही जायजा लेने के लिए ड्रोन और मोबाइल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा।
- ई-नाम पोर्टल से जुड़ी 585 मंडियों में 200 मंडियां और जुड़ेंगी। साथ ही 22 हजार ग्रामीण हाट यानी छोटी मंडियां खोली जाएंगी। इससे किसानों को सामान बेचने दूर नहीं जाना पड़ेगा।
- इसी महीने शुरू होने वाला एन्वार्यनमेंट सर्वे 24 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में होगा। सर्वे में जलवायु को बेहतर-खराब करने वाले कारण दर्ज होंगे। यह 3-4 साल चलेगा।
- वर्ल्ड बैंक दो साल में एन्वायर्नमेंट मैनेजमेंट पर 7 लाख करोड़ रु. खर्च करेगा। यह वर्ल्ड बैंक के पिछले बजट (करीब 3 लाख करोड़ रु.) से दो गुना से ज्यादा है।
- भारत 2030 तक कार्बन उत्सर्जन 35% कम करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। 2020 तक 20% तक कमी की जाएगी। 2010 तक 12% की कटौती की जा चुकी है।
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