मुंबई. सिंघानिया परिवार जैसे बड़े उद्योग घरानों में संपत्ति विवाद के बावजूद देश के सिर्फ 19% उद्योग घराने ही ऐसे हैं जिनके पास शीर्ष नेतृत्व संभालने के लिए उत्तराधिकार की योजना है। इनमें से करीब 56% उत्तराधिकारी पारिवारिक कारोबार या वैल्थ मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।एड्लवाइज प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट (ईपीडब्ल्यूएम) और कैम्पडेन फैमिली कनेक्ट की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इसमें 78 अल्ट्रा हाई नेटवर्थ वाले उद्योग घरानों की पड़ताल की गई। इनकी औसत नेटवर्थ 4,500 करोड़ रुपए थी। ये औसतन करीब 2,240 करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों का प्रबंधन कर रहे थे।
ईपीडब्ल्यूएम के प्रमुख अंशु कपूर के मुताबिक देश में 1.5 लाख परिवार हाई नेटवर्थ वाले हैं। इनकी कुल नेटवर्थ 141 लाख करोड़ रुपए की है। अगले सात साल यानी 2025 तक इनकी संख्या 2.67 गुना बढ़कर 4 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है। इनकी नेटवर्थ 2.5 गुना बढ़कर 352 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच जाने का अनुमान है। इनका सबसे ज्यादा निवेश फिक्स्ड इनकम और इक्विटी में है।
देश में 18 लाख रजिस्टर्ड कंपनियां, सिर्फ 62% सक्रिय
देश में 18.10 लाख से ज्यादा कंपनियां रजिस्टर्ड हैं। लेकिन अक्टूबर अंत तक इनमें से सिर्फ 62% ही चालू हालत में थीं। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। इसके मुताबिक सक्रिय कंपनियों में ज्यादातर सर्विस सेक्टर की हैं। इनमें से 6.46 लाख से अधिक कंपनियां बंद हो चुकी हैं। बाकी बहुत-सी कंपनियां विभिन्न नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजर रही हैं। इस समय सक्रिय कंपनियों की संख्या 11.16 लाख है। कुल कंपनियों में से 6,46,882 कंपनियां बंद हो चुकी हैं। इसमें 10,574 का विघटन हो चुका है। 6,00,048 कंपनियों में कोई काम नहीं हो रहा। जबकि 39,736 का रजिस्ट्रेशन रद्द होने की प्रक्रिया में है।
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