भाजपा जीती तो बदलेगा ट्रेंड, हारी तो 25 साल का सिलसिला बरकरार रहेगा

https://ift.tt/2zRiKdX

जयपुर.इस बार राजस्थान विधानसभा के नतीजे तय करेंगे कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भाजपा को लगातार दूसरे चुनाव में जीत दिला पाती हैं या राज्य में हर पांच साल में सरकार बदलने का 25 साल का सिलसिला बरकरार रहता है। राज्य में इस बार कांग्रेस की तरफ से सचिन पायलट और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सीएम कैंडिडेट माने जा रहे हैं। दोनों ही इस बार चुनाव मैदान में थे। इनके अलावा कांग्रेस से रमेश डूडी के नाम की भी चर्चा है।

राजस्थान की 200 सीटों पर इस बार 74.08% मतदान हुआ था। राज्य में पिछली बार (75.67%) से 1.52% कम वोटिंग हुई। राज्य के 7 एग्जिट पोल्स में कांग्रेस को आगे दिखाया गया था। सिर्फ एक एग्जिट पोल में भाजपा के आगे रहने का अनुमान लगाया गया था।

25 साल से ट्रेंड : हर चुनाव में बदलती है सरकार
1993 : भाजपा ने 38.60% और 95 सीटें लेकर सत्ता में वापसी की। कांग्रेस को 76 सीटें मिलीं।
1998 : कांग्रेस ने 44.95% वोट लिए। 153 सीटें जीतकर सरकार बनाई। भाजपा को 120 सीटें मिलीं।
2003 : भाजपा ने 39.20% वोट लेकर कांग्रेस को सत्ता से निकाला। भाजपा को 120, कांग्रेस को 56 सीटें मिलीं।
2008 : कांग्रेस ने 36.82% वोट लिए और 96 सीटें जीतकर सरकार बनाई। भाजपा को 78 सीटें मिलीं।
2013 : मोदी लहर में भाजपा ने 46.05% वोट और 163 सीटें लेकर कांग्रेस को 21 सीटों पर समेटा।

66 साल में 14 चुनाव हुए; 13 मुख्यमंत्री बने
इससे पहले राजस्थान में 66 साल में 14 विधानसभा चुनाव हुए थे। सबसे ज्यादा 4 बार मोहन लाल सुखाड़िया और तीन बार भैरोंसिंह शेखावत सीएम रहे थे। सुखाड़िया करीब 16 साल 5 महीने और शेखावत 10 साल 4 महीने सीएम रहे, इन दोनों ने राज्य में करीब 44% समय तक शासन किया।

भाजपा के सामने पिछला प्रदर्शन दोहराने और कांग्रेस के लिए प्रदर्शन सुधारने की चुनौती

  • भाजपा ने 2013 में राज्य के 33 में से 13 जिलों में क्लीनस्वीप किया था। यहां 59 विधानसभा सीटेंहैं।
  • 2013 में भाजपा ने अजमेर-8, बारां-4, चित्तौड़गढ़-6, डूंगरपुर-4, हनुमानगढ़-5, जैसलमेर-2, झालावाड़-4, कोटा-6, पाली-6, राजसमन्द-4, सवाई माधोपुर-4, सिरोही-3, टोंक-4 की सभी सीटें जीत ली थीं। उसके सामने इस प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती है।
  • 2013 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का राज्य के 33 में से 17 जिलों में खाता तक नहीं खुला। इन जिलों में कांग्रेस के सामने प्रदर्शन सुधारने की चुनौती है।
  • 2013 के चुनाव में 11 सीटों पर हार-जीत के अंतर से ज्यादा वोट नोटा को मिले थे
  • 2013 विधानसभा चुनाव में पहली बार नोटा का इस्तेमाल हुआ। राज्य में 5.88 लाख यानी 1.91% वोट नोटा को मिले थे। राजस्थान में 11 विधानसभा सीटें ऐसी थीं, जिन पर हार-जीत के अंतर से ज्यादा वोट नोटा को मिले थे।

इन पर रहेगी नजर

  • झालरापाटन : मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (भाजपा) vs मानवेंद्र सिंह (कांग्रेस)। राजे इस सीट से चौथी बार चुनाव लड़ रही हैं। कांग्रेस ने जसवंत के बेटे और पूर्व भाजपा नेता मानवेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है।
  • टोंक : यूनुस खान (भाजपा) vs सचिन पायलट (कांग्रेस)। इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ने परंपरा तोड़ी है। 1972 के विधानसभा चुनाव से कांग्रेस यहां मुस्लिम उम्मीदवार ही उतार रही थी। 1980 से भाजपा ने यहां से सिर्फ हिंदू उम्मीदवार को ही टिकट दिया। इस बार समीकरण बदल गए। खान भाजपा के एकमात्र मुस्लिम चेहरा हैं।
  • सरदारपुरा : शंभूसिंह खेतासर (भाजपा) vs अशोक गहलोत (कांग्रेस)। दो बार मुख्यमंत्री रह चुके गहलोत पिछले चार चुनाव से इस सीट से विधायक हैं। पिछले चुनाव में इस सीट पर गहलोत ने खेतासर को 18 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था।
  • उदयपुर शहर : गुलाबचंद कटारिया (भाजपा) vs डॉ गिरिजा व्यास (कांग्रेस)। राजे सरकार में गृहमंत्री कटारिया मौजूदा विधायक हैं। गिरिजा ने 1985 के विधानसभा चुनाव में कटारिया को हराया था।
  • नाथद्वारा : महेश प्रताप सिंह (भाजपा) vs डॉ. सीपी जोशी (कांग्रेस)। भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर आए महेश प्रताप सिंह को टिकट दिया है। महेश करीब 11 साल बाद भाजपा में लौटे हैं। उधर, जोशी चार बार इस सीट से विधायक रह चुके हैं। 2008 का चुनाव सिर्फ एक वोट से हार हार गए थे।


Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Rajasthan Election Result 2018 Live Updates: Rajasthan Chunav Result LIVE, राजस्थान विधानसभा चुनाव रिजल्ट लाइव
Rajasthan Election Result 2018 Live Updates: Rajasthan Chunav Result LIVE, राजस्थान विधानसभा चुनाव रिजल्ट लाइव
Rajasthan Election Result 2018 Live Updates: Rajasthan Chunav Result LIVE, राजस्थान विधानसभा चुनाव रिजल्ट लाइव

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ