टीसी को मिल सकता है विशेष दर्जा, स्वतंत्रता सेनानियों की मदद करने पर 87 साल पहले अंग्रेजों ने छीना था

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नई दिल्ली. रेलवे के टिकट चेकरों (टीसी) को 87 साल पहले ब्रिटिशों द्वारा छीना गया विशेष दर्जा वापस मिल सकता है। अगर सरकार द्वारा गठित कमेटी अपनी सहमति देती है तो उन्हें "रनिंग स्टाफ' का दर्जा दिया जा सकता है। ब्रिटिशों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की मदद करने पर टीसी से यह अधिकार छीन लिया था।

  1. इसी साल सितंबर में 100 सांसदों ने रेलवे मंत्री पीयूष गोयल को खत लिखकर कहा था कि टीसी को रनिंग स्टाफ का दर्जा वापस दिया जाए। खत लिखने वालों में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी शामिल थे।

  2. ट्रेन के संचालन के दौरान मौजूद रहने वाले ट्रेन ड्राइवर, असिस्टेंट ड्राइवर, गार्ड, ब्रेकमैन और दूसरे कर्मचारियों को रनिंग स्टाफ का दर्जा मिला हुआ है।

  3. एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया- इस दर्जे के तहत इन कर्मचारियों को भत्ते भी ज्यादा मिलते हैं। उनको आराम करने के लिए एयरकंडीशंड कमरों की व्यवस्था भी की जाती है।

  4. "टीसी को भी यह दर्जा मिला हुआ था। लेकिन, 1931 में ब्रिटिशों ने यह कहकर दर्जा छीन लिया था कि टीसी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को ट्रेन में सीटें देते हैं और उनका सामान एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाते हैं।'

  5. रेलवे मंत्रालय ने इस संबंध में एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति 3 महीनों के भीतर टीसी को रनिंग स्टाफ का दर्जा दिए जाने पर फैसला लेगी।

  6. अभी जिन कर्मचारियों को रनिंग स्टाफ का दर्जा मिला हुआ है, उन्हें टीसी स्टाफ से 30% ज्यादा वेतन मिलता है। ऐसे कर्मचारियों को 10 घंटे की शिफ्ट में काम करना होता है। अगर ट्रेन लेट होती है, तो इस स्थिति में उन्हें रिलीवर भी दिया जाता है।

  7. दैनिक भत्ते के तौर पर टीसी स्टाफ को 400-500 रुपए दिए जाते हैं। रनिंग स्टाफ का यह भत्ता भी टीसी के मुकाबले ज्यादा है। रनिंग स्टाफ के मुकाबले टीसी स्टाफ की पेंशन भी 5 से 6 हजार रुपए कम है। रनिंग स्टाफ को एयर कंडीशंड रेस्ट रूम, बावर्ची और वक्त पर जगाने के लिए भी व्यक्ति दिया जाता है।

  8. अधिकारी ने बताया कि विभाजन के बाद पाकिस्तान में टीसी को रनिंग का स्टाफ का दर्जा 1962 में ही दे दिया गया था। बांग्लादेश में उन्हें यह दर्जा 2004 में मिला।



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      प्रतीकात्मक फोटो

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