हाथ में एक छोटा-सा नोट पैड लिए और दाहिने कान के नीचे एक घिसी हुई पेंसिल दबाए हाजी 'दस का बीस, दस का बीस' की रट लगाते हुए दाखिल हुए। मैंने पूछा, 'अब ये कौन-सी नई एक्टिंग करने लगे हाजी?' हाजी बोले, 'एक्टिंग करने वाला मैं कौन होता हूं महाकवि। एक्टिंग तो अनुपमजी ने शानदार की है 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' में। अब देश की जनता यह फिल्म देखकर तय करेगी कि किसे चुनना है, जिसने पीएम का अभिनय अच्छा किया है उसे या जो अच्छा अभिनय कर रहा है उसे।'
मैंने कहा, 'ऐसा थोड़ी होता है। जनता फिल्म देखकर वोट थोड़ी दे देगी।' हाजी तुनके, 'न दें अपनी बला से महाकवि! मैं तो अभी से फिल्म की टिकट ब्लैक कर रहा हूं 'दस का बीस, दस का बीस' मैंने पूछा, 'क्यों? व्हाइट में टिकट नहीं मिल रहे?' हाजी सुतली बम लिए इसी सवाल की घात में बैठे थे, 'जब पीएम ही ब्लैक में बने थे..' इसके बाद हाजी खुद ही ठठा उठे।
मैंने फिर कुरेदा, 'वैसे पीएम में ब्लैक और व्हाइट का क्या मतलब?' हाजी इसका भी उत्तर लिए बैठे थे, 'जैसे शास्त्रीजी थे, व्हाइट पीएम। सप्ताह में एक दिन खाना छोड़ा, तो पूरे देश ने छोड़ दिया। एक ने कहा कि न खाऊंगा, न खाने दूंगा तो चेले पैक करवाकर विदेश ले गए!
एक थे अटलजी, जिनके लिए ब्लैक ब्लैक था और व्हाइट व्हाइट। जिन्होंने पार्लियामेंट में यह बोलने की हिम्मत रखी कि 'कुंवारा हूं, ब्रह्मचारी नहीं' और उन्माद की हवा में जब सबके सब बहे जा रहे थे तो राजधर्म की सीख भी दे दी।' मैंने कहा, 'बात तो तुम्हारी ठीक है हाजी।
कुछ लोग तो अपने इबोनी ब्लैक को कम बताने के लिए दूसरों के व्हाइट को जेट ब्लैक से रंगने की कोशिश करते रहते हैं। खैर छोड़ो, ये बताओ, फिल्म देखने कब जा रहे हो? ट्रेलर देखकर तो बड़े खुश हो तुम।' हाजी चहककर बोले, 'ट्रेलर तो अच्छा है ही महाकवि! टाइटल कितना शानदार और सटीक है 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर'... जैसे तुम्हारे वाले पर भी नाम एकदम सटीक बैठता है, 'एन इंसिग्निफिकैंट मैन'।'
मैंने हाजी को झिड़का, 'यार हाजी तुम बार-बार ले देकर बात को उसी पर क्यों ले आते हो?' हाजी बड़े सहज भाव में बोले, 'मतलब वो तो ले लेकर और दे देकर सब करे, और हम ले देकर इतना भी न करें। अब हैप्पी न्यू ईयर मनाओ बस, मुंह न खुलवाओ महाकवि! वरना 'बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी'
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