पानीपत/ नई दिल्ली.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात में तीन लड़कियों का जिक्र किया। कहा- इन बेटियों की उपलब्धियां हमें ऊर्जा देती हैं। इनकी मेहनत बताती है कि परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों, कुछ कर गुजरने का जुनून हमेशा जीतता है। ये तीन लड़कियां हैं पानीपत की रजनी, दक्षिणी कश्मीर की हनाया और पुणेकी वेदांगी।
मां के साथ मजदूरी करने वाली 16 साल की रजनी इसी साल जनवरी में सर्बिया में नेशंस बॉक्सिंग चैंपियनशिप में रूस की बॉक्सर को हराया था। वह दुनिया की सर्वश्रेष्ठ जूनियर बॉक्सर चुनी गई थी। अब 19 दिसंबर को वह नेशनल चैंपियन बनी है। चंडीगढ़ में हुई नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड जीतते ही वह सबसे पहले पास में ही एक ठेले वाले के पास दूध पीने गई। दूध पीया और मेडल को कपड़े में लपेटकर रख लिया। मोदी ने रविवार को इस घटना का जिक्र किया। इसके बाद रजनी ने भास्कर से बातचीत में कहा- 'मेरे पिता भी ठेला लगाकर लस्सी बेचते हैं। मेडल जीतते ही मैं उन्हीं के सम्मान में एक ठेले वाले के पास गई।'
पानीपत के बुआना लाखू गांव की रजनी की चार बहने हैं। दो बड़ी और दो छोटी। रजनी 8 साल की थी तो उसने गांव में बॉक्सिंग कोच सुरेंद्र मलिक को फूल मालाओं से लदा देखा। वे किसी मुकाबले से लौटे थे। यही घटना रजनी की प्रेरणा बनी। उसने मां से कहा कि वह बॉक्सिंग सीखेगी और फिर लोग उसका भी मालाओं से स्वागत करेंगे। घर के हालात खराब होने के बावजूद मां ने तुरंत हामी भर दी। लेकिन, पैसे नहीं होने की वजह से रजनी को मां के साथ मजदूरी करनी पड़ी। फिर भी वह रोज छह घंटे एकेडमी में प्रैक्टिस करती रही। कई बार बासी रोटी खाकर बॉक्सिंग सीखने जाती थी। पैसे नहीं थे, इसलिए एकेडमी के पुराने ग्लव्स से ही प्रैक्टिस करती थी। आठ साल की मेहनत का नतीजा आज सबके सामने है।
12 साल की हनाया कश्मीर के अनंतनाग सेक्टर के कोकरनाग की है। यह क्षेत्र मार दिए गए आतंकी बुरहान वानी के प्रभाव वाला रहा है। हनाया ने साउथ कोरिया कप में गोल्ड जीता है। साथ ही अपनी कैटेगरी की नेशनल चैंपियन है।
पुणे की वेदांगी ने पिछले हफ्ते ही साइकिल से पूरी दुनिया का चक्कर पूरा किया। वेदांगी ऐसा करने वाली एशिया की सबसे तेज साइक्लिस्ट हैं। 20 साल की वेदांगी ने 159 दिन में 29 हजार किमी साइक्लिंग की। यानी रोज औसतन 182 किमी।
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