तेलंगाना में टीआरएस की प्रचंड जीत के बाद चर्चा- लोकसभा सीट बरकरार रख पाएंगी कांग्रेस-भाजपा

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धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया (हैदराबाद).हैदराबाद के व्यस्त कोंडापुर क्षेत्र में छोटे कारोबारियों का समूह बुधवार को तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की प्रचंड जीत के बाद बात कर रहा है। उनकी चर्चा का मुख्य मुद्दा है कि विधानसभा चुनाव में टीआरएस की प्रचंड जीत (119 में से 88 सीट) के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में उसे कितनी सीटें मिलेंगी।

असल में विधानसभा चुनाव में राज्य सरकार की निशुल्क जनकल्याणकारी योजनाओं की झड़ी के आगे सभी पार्टियां बेदम नजर आईं। इस विधानसभा चुनाव में तेलुुगु देशम पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन सिर्फ 21 सीटें ही जीत पाया, जबकि पिछले चुनाव में कांग्रेस ने अकेले ही 21 सीटें जीत ली थीं। ऐसे में 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा जीती दो सीट (बाद में एक सांसद टीआरएस में चला गया) और भाजपा द्वारा जीती एक सीट क्या ये पार्टियां बचा पाएंगी? सत्तारूढ़ टीआरएस के अभी 14 सांसद हैं। पार्टी लोकसभा में 11 सीटें ही जीती थीं, लेकिन बाद में टीडीपी, वायएसआर कांग्रेस और कांग्रेस का एक-एक सांसद टीआरएस में शामिल हो गए थे। पार्टी का लक्ष्य 16 सीट का है।

तेलंगाना टुडे के एडीटर के. श्रीनिवास रेड्‌डी कहते हैं कि मुख्यमंत्री केसीआर की जनकल्याणकारी स्कीम का तोड़ किसी भी पार्टी के पास नहीं है। कांग्रेस-टीडीपी गठबंधन भी टीआरएस को फेवर करता है क्योंकि राज्य में चंद्रबाबू नायडू को तेलंगाना विरोधी नेता माना जाता है। हिंदी राज्यों की तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का असर यहां खास प्रभावशाली नहीं है। टीआरएस के लोकसभा में नेता एपी जितेंद्र रेड्‌डी कहते हैं कि 2019 में हम राज्य की 17 में से 16 सीटें जीतेंगे, अभी हमारी 14 सीटें हैं। एक सीट एआईएमआईएम जीतेगी। सरकार ने एक करोड़ एकड़ खेती की भूमि को सिंचित करने का लक्ष्य रखा है। बीते चार साल में 55 लाख एकड़ भूमि को सिंचित करने में सफल हुए हैं। हमारी जीडीपी ग्रोथ 17.1% रही है। एक लाख रोजगार हम हर साल देंगे। ऐसे में हमारे लिए 16 सीटें जीतना खास चुनौती पूर्ण नहीं है।

रेड्‌डी के दावे के विपरीत संगारेड्‌डी से विधायक चुने गए टी. जयप्रकाश रेड्‌डी कहते हैं कि मुख्यमंत्री केसीआर किसी से मिलते ही नहीं हैं। कांग्रेस का ग्राफ देश में लगातार बढ़ रहा है, पानी और बेरोजगारी की समस्या है। राज्य में हम 5 से 6 सीटें अवश्य जीतेंगे। वहीं राजनीतिक विश्लेषक पालवई राघवेंद्र रेड्‌डी कहते हैं कि 2019 में यहां स्थानीय मुद्दे ही ज्यादा प्रभावी होंगे ना कि राष्ट्रीय। 2014 में जब मोदी की लहर थी फिर भी भाजपा राज्य में सिर्फ बंगारू दत्तात्रेय की सिकंदराबाद सीट ही जीत पाई थी और राज्य में उसे 7% वोट ही मिले थे। इस बार कड़ी चुनौती से जूझना होगा। राज्य सरकार अपनी विभिन्न योजनाओं से करीब-करीब प्रत्येक व्यक्ति को सीधे नकद फायदा दे रही है। कांग्रेस को भाजपा और टीआरएस के विरोध का फायदा मिल सकता है। ऐसे में उसे 5 सीट तक भी मिल सकती हैं।

राज्य के ये बड़े मुद्दे

पानी और बेरोजगारी : कृषि की सिंचाई के लिए सरकार एक लाख करोड़ की योजना पर कार्य कर रही है, लेकिन अभी भी चुनौती है। रोजगार के अवसर सिर्फ हैदराबाद तक ही सीमित होकर रह गए हैं। विपक्ष दोनों समस्याओं को मुद्दा बनाएगा।


एसटी-मुस्लिमों को प्रस्तावित विशेष आरक्षण : तेलंगाना राज्य के बनने के बाद राज्य में आबादी के अनुपात में एसटी वर्ग को छह फीसदी के आरक्षण को बढ़ाकर 12 फीसदी करने तथा मुस्लिमों के लिए अलग से 12 फीसदी आरक्षण देने को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है, लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर कोई निर्णय अभी तक नहीं लिया है। लोकसभा चुनाव में यह आरक्षण मुद्दा बनेगा।


हिंदू-मुस्लिम धुव्रीकरण: उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हैदराबाद को भाग्यनगर, करीमनगर को करीनगर बनाने की मांग। निजाम पर विवादित बयान, असदुद्दीन ओवैसी के विवादित बोल, लिंचिंग और अन्य मुद्दों के कारण हिंदू-मुस्लिम धुव्रीकरण भी मुद्दा होगा।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में तेलंगाना की स्थिति

कुल सीटें 17
तेलंगाना राष्ट्र समिति 11
कांग्रेस 02
भाजपा 01
तेलुगु देशम पार्टी 01
वायएसआर कांग्रेस 01
एआईएमआईएम 01



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