नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट से रिटायरमेंट के कुछ दिन बाद ही जस्टिस कुरियन जोसेफ ने दावा किया कि पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा किसी बाहरी व्यक्ति के प्रभाव में काम कर रहे थे। रिटायर्ड जस्टिस जोसेफ ने यह भी कहा कि इस वजह से न्यायपालिका के प्रशासन पर असर पड़ा।
29 नवंबर को रिटायर हुए जस्टिस कुरियन जोसेफ उन चार जजों में शामिल थे, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कामकाज को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें जस्टिस जोसेफ के अलावा जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस मदन बी लोकुर शामिल थे। जस्टिस जे चेलमेश्वर रिटायर हो चुके हैं और जस्टिस रंजन गोगोई मौजूदा चीफ जस्टिस हैं। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ जजों ने केसों के बंटवारे और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए थे।
'जजों के बीच बाहरी दखल की धारणा थी'
जब जस्टिस जोसेफ से पूछा गया कि वह यह दावा किस आधार पर कर रहे हैं। उन्होंने कहा- पूर्व सीजेआई को रिमोट द्वारा संचालित किया जा रहा था। उन पर किसी बाहरी व्यक्ति का प्रभाव था। यह धारणा उन जजों में थी, जो न्यायपालिका की कार्यशैली के मुद्दे को लेकर जनता के बीच गए थे और बाकी जजों का भी यही मानना था।
हालांकि, जस्टिस जोसेफ ने बाहरी व्यक्ति का नाम और उन केसों के बारे में बताने से मना कर दिया, जिनमें कथित पक्षपाती रवैया अपनाया गया और न्यायपालिका के प्रशासन पर असर पड़ा। जब उनसे पूछा गया कि क्या किसी खास केस को राजनीतिक दल या सरकार द्वारा कथित तौर पर प्रभावित किया गया। उन्होंने कहा- जजों का केवल यही मानना था कि मामले से जुड़े हुए जज कुछ हद तक एक पक्ष में थे। मैं माफी चाहता हूं कि मैं इससे ज्यादा और कुछ नहीं कहना चाहता।
'प्रेस कॉन्फ्रेंस का असर पड़ा, अच्छे बदलाव हुए'
उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस का असर पड़ा और पूर्व सीजेआई मिश्रा के कार्यकाल के बाकी हिस्से में अच्छे बदलाव हुए और ये मौजूदा चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में भी जारी हैं। अदालती व्यवस्था की गुणवत्ता और कोर्ट की आजादी को लेकर बनी धारणा में सुधार हुआ है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में 4 जजों ने जिन मुद्दों को उठाया था और िजन बदलावों की बात कही थी, उन्हें जस्टिस मिश्रा ने शुरू किया और इस प्रक्रिया को सीजेआई गोगोई आगे लेकर जा रहे हैं।
"हमने तथ्यों के आधार पर सीजेआई को जानकारी दी'
जस्टिस जोसेफ ने कहा- अभी जनता के बीच जो मसला है, वह उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस के संदर्भ में है। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले चारों जजों ने जस्टिस मिश्रा को उन पर हो रहे बाहरी प्रभाव और कुछ केसों में पक्षपात के बारे में बताया था। निश्चित तौर पर हमारे पास उस वक्त जो भी तथ्य थे, हमने उस बारे में तत्कालीन सीजेआई को बताया।
'जस्टिस लोया का मामला प्रेस कॉन्फ्रेंस की अकेली वजह नहीं था'
एक न्यूज वेबसाइट से बातचीत में जस्टिस जोसेफ ने कहा- तब सीजेआई स्वतंत्र रूप से अपने फैसले नहीं ले रहे थे। जब जस्टिस बीएस लोया मामले पर जस्टिस जोसेफ से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा- मैं इस पर कमेंट करना नहीं चाहता हूं, ये अध्याय अब बंद हो गया है। जस्टिस लोया मामले की दोबारा जांच की याचिका प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक मुद्दा था, लेकिन ये प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए इकलौती वजह नहीं था, जिसे लेकर हम परेशान थे। केसों के बंटवारे और सुप्रीम कोर्ट के प्रशासन से जुड़े कई मुद्दे थे।
'जजों का चयन केवल योग्यता के आधार पर हो'
इस सवाल पर कि क्या करियर में आगे बढ़ने में अल्पसंख्यक का ठप्पा लगा होना अवरोध है, उन्होंने कहा- मैं पूरी तरह अपने मामले में बात कर रहा हूं। और, ऐसा माना जाता है कि मैं सुप्रीम कोर्ट का जज केवल इसलिए बना, क्योंकि मैं अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखता हूं। लेकिन, यह मामला नहीं है। चीजें साफ हो गई और यह सामने आया कि मेरा नियुक्ति योग्यता के आधार पर की गई थी। उच्च न्यायपालिका में जजों का चयन केवल योग्यता के आधार पर किया जाना चाहिए, किसी और आधार पर नहीं।
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