गुवाहाटी. सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल 2016 पर असम गण परिषद ने राज्य की भाजपा नीत सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। पार्टी के अध्यक्ष अतुल बोरा की सोमवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह से इस मसले पर चर्चा की। बोरा का कहना है कि गृह मंत्री को बताया गया कि यह बिल असम समझौते के खिलाफ है। इसके बनने से नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन के काम में बाधा आएगी। राजनाथ सिंह ने उन्हें बताया कि मंगलवार को भाजपा इस बिल को लोकसभा से पारित कराने जा रही है। उसके बाद समर्थन वापसी का फैसला लिया गया।
बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट के 14 और 1 निर्दलीय का समर्थन भी भाजपा कोअसम की 126 सदस्यीय असेंबली में अगपा के 14 सदस्य हैं। हालांकि ताजा राजनीतिक घटनाक्रम से सर्बानंद सोनेवाल की सरकार को कोई खतरा नहीं है। असम में भाजपा के 61 विधायक हैं और उसे बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट के 14 और एक निर्दलीय विधायक का समर्थन हासिल है। कांग्रेस के यहां 25 और आल इंडियन यूनाइटेड फ्रंट के 13 विधायक हैं।
सोनेवाल सरकार में अतुल बोरा के साथ असम गण परिषद के 3 मंत्री शामिल हैं। संसद में उसका कोई सदस्य नहीं है। भाजपा से उसका गठबंधन 2014 के चुनाव से पहले हुआ था। एक टीवी चैनल से बोरा का कहना था कि तभी साफ कर दिया गया था कि इस बिल पर वह भाजपा का साथ नहीं देंगे। उन्हें पहले बताया गया था कि नरेंद्र मोदी अवैध प्रवासियों के मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं। बोरा ने कहा कि अब लगता है कि हमारे साथ धोखा हुआ।
पार्टी के तीन मंत्री और एक वरिष्ठ नेता सोमवार को दिल्ली गए थे। प्रधानमंत्री से मिलने का समय अभी तक नहीं मिल सका। उसके बाद उनकी मुलाकात गृहमंत्री राजनाथ सिंह से हुई। मुख्यमंत्री सोनेवाल ने तो उनसे मिलने से भी मना कर दिया। बोरा का कहना है कि वे इस मसले पर शायद उनका सामना करने की स्थिति में नहीं हैं। भाजपा को मनाने की आखिरी कोशिश कामयाब नहीं हो सकी।
सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल 2016 से 1955 के कानून को संशोधित किया जाना है। इससे अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के गैर मुस्लिमों (हिंदु, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी व इसाई) समुदाय के लोगों को नागरिकता देने का रास्ता तैयार होगा। अभी के कानून के अनुसार वैध दस्तावेज होने पर ऐसे लोगों को 12 साल बाद भारत की नागरिकता मिल सकती है, लेकिन बिल पास हो जाने के बाद यह समयावधि 6 साल हो जाएगी।
अमेंडमेंट बिल का कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, माकपा के साथ कुछ अन्य पार्टियां लगातार विरोध कर रही हैं। बोरा का कहना है कि असम के ज्यादातर लोग इसके विरोध में हैं। पहली बार ऐसा देखा गया जब मीडिया से जुड़े लोगों ने भी सड़क पर उतरकर विरोध जताया। इन सभी लोगों का मानना है कि धर्म के आधार पर नागरिकता देना सरासर गलत है।
असम गण परिषद के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंतो ने सोमवार दोपहर में बयान जारी कर कहा था कि बिल लोकसभा में पास हुआ तो समर्थन वापस ले लिया जाएगा। संयुक्त संसदीय दल ने इस मामले में असम का दौरा किया था तब भी पार्टी ने साफ कर दिया था कि वह इसके विरोध में है। पार्टी ने एनडीए के अन्य घटक दलों शिवसेना और जदयू समेत अन्य पार्टियों से भी समर्थन मांगा था।
भाजपा से उसके साथी एक के बाद एक करके दूर होते जा रहे हैं। तेलुगु देसम ने आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा न मिलने की बात कहकर भाजपा का साथ छोड़ दिया था तो शिवसेना के तेवर लगातार तीखे हो रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह महाराष्ट्र में अकेले चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं।
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