नई दिल्ली. तीन तलाक विधेयक बुधवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। विपक्ष के विरोध के बावजूद यह 27 दिसंबर को लोकसभा में पास हो गया था। 31 दिसंबर को हंगामे की वजह से यह राज्यसभा में पेश नहीं किया जा सका था। इसके बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई थी।
भाजपा राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन सरकार के पास उच्च सदन में पर्याप्त संख्याबल नहीं होने की वजह से उसे यह बिल पास कराने में कठिनाई आ रही है। विपक्ष विधेयक के सभी पहलुओं पर चर्चा के लिए इसे संसद की चयन समिति के पास भेजने की मांग पर अड़ा है, लेकिन सरकार इसके लिए राजी नहीं है।
लोकसभा में बिल के पक्ष में 245 वोट पड़े थे
लोकसभा में गुरुवार को विधेयक के पक्ष में 245 और विरोध में 11 वोट पड़े थे। वोटिंग के दौरान कांग्रेस, अन्नाद्रमुक, द्रमुक और सपा के सदस्यों ने वॉकआउट किया था। सरकार शीतकालीन सत्र में ही इसे राज्यसभा से भी पारित कराना चाहती है। इसी साल सितंबर में तीन तलाक पर अध्यादेश जारी किया गया था।
6 महीने होती है अध्यादेश की अवधि
सरकार ने तीन तलाक को अपराध करार देने के लिए सितंबर में अध्यादेश जारी किया था। इसकी अवधि 6 महीने की होती है। अगर इस दरमियान संसद सत्र आ जाए तो सत्र शुरू होने से 42 दिन के भीतर अध्यादेश को बिल से रिप्लेस करना होता है। मौजूदा संसद सत्र 8 जनवरी तक चलेगा। अगर इस बार भी बिल राज्यसभा में अटक जाता है तो सरकार काे दोबारा अध्यादेश लाना पड़ेगा।
राज्यसभा के मौजूदा सांसद - 244
| पार्टी | सांसद |
| भाजपा | 73 |
| जेडीयू | 6 |
| अकाली दल | 3 |
| शिवसेना | 3 |
| एनडीए में शामिल अन्य पार्टियों के सदस्य | 3 |
| नामांकित और निर्दलीय(जो साथ आ सकते हैं) | 9 |
| भाजपा के पास समर्थन | 98 |
सरकार के खिलाफ दल और उनके सदस्य
| कांग्रेस | 50 | आरजेडी | 5 |
| टीएमसी | 13 | बसपा | 4 |
| एआईडीएमके | 13 | डीएमके | 4 |
| सपा | 13 | बीजेडी | 9 |
| वामदलों के सदस्य | 7 | आप | 3 |
| टीडीपी | 6 | पीडीपी | 2 |
| टीआरएस | 6 | ||
| कुल | 135 |
16 महीने पहले आया था सुप्रीम कोर्ट का फैसला
- अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) की 1400 साल पुरानी प्रथा को असंवैधानिक करार दिया था और सरकार से कानून बनाने को कहा था।
- सरकार ने दिसंबर 2017 में लोकसभा से मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक पारित कराया लेकिन राज्यसभा में यह बिल अटक गया, जहां सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है।
- विपक्ष ने मांग की थी कि तीन तलाक के आरोपी के लिए जमानत का प्रावधान भी हो।
- इसी साल अगस्त में विधेयक में संशोधन किए गए, लेकिन यह फिर राज्यसभा में अटक गया।
- इसके बाद सरकार सितंबर में अध्यादेश लेकर आई। इसमें विपक्ष की मांग काे ध्यान में रखते हुए जमानत का प्रावधान जोड़ा गया। अध्यादेश में कहा गया कि तीन तलाक देने पर तीन साल की जेल होगी।
बिल में ये बदलाव हुए
- अध्यादेश के आधार पर तैयार किए गए नए बिल के मुताबिक, आरोपी को पुलिस जमानत नहीं दे सकेगी। मजिस्ट्रेट पीड़ित पत्नी का पक्ष सुनने के बाद वाजिब वजहों के आधार पर जमानत दे सकते हैं। उन्हें पति-पत्नी के बीच सुलह कराकर शादी बरकरार रखने का भी अधिकार होगा।
- बिल के मुताबिक, मुकदमे का फैसला होने तक बच्चा मां के संरक्षण में ही रहेगा। आरोपी को उसका भी गुजारा देना होगा। तीन तलाक का अपराध सिर्फ तभी संज्ञेय होगा जब पीड़ित पत्नी या उसके परिवार (मायके या ससुराल) के सदस्य एफआईआर दर्ज कराएं।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
0 टिप्पणियाँ