संगमनगरी में हठ योगी: 9 साल से एक पैर पर खड़े रहने का दावा, इसी तरह नींद लेते हैं

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प्रयागराज (इलाहाबाद). मोक्ष की कामना लेकर राजस्थान से प्रयागराज तक की दूरी एक संन्यासी ने एक पैर से चलकर पूरी की। यहां कुंभ नगरी में भी संन्यासी ने हठ को बरकरार रखते हुए अपना आसन जमा लिया है। संन्यासी की मानें तो उनका एक पैर पर खड़े होकर तपस्या करने का क्रम 9 साल पुराना है। माघ माह में 10 साल पूरे हो जाएंगे। संत गिरि कहते हैं- इस जीवन में बिना तपस्या के कुछ नहीं मिलता।

राजस्थान के रहने वाले दिगंबर हरिवंश गिरि ने बताया कि हठयोग की परंपरा अनादिकाल से चली आ रही है। उन्होंने भी 12 साल तक अनवरत एक पैर पर खड़े होकर तपस्या करने का प्रण लिया है। भोजन की प्रक्रिया भी खड़े होकर होती है। शौच और नहाने के लिए एक पैर से ही चलकर जाते हैं। खड़े-खड़े ही नींद भी ले लेते हैं। उन्होंने बताया कि प्रण पूरा होने पर यह हठयोग आगे भी जारी रह सकता है।

क्या है हठयोग
हठ योग प्राचीन भारतीय साधना पद्धति है। इसमें शरीर के आधार पर विभिन्न प्रकार के आसन, प्राण के आधार पर विभिन्न प्रकार के प्राणायाम और इन दोनों के मिश्रण से कई प्रकार की मुद्रा, बन्ध और अन्य क्रियाएं की जाती हैं। इसमें ध्यान भी किए जाते हैं।



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एक पैर पर खड़ा हठयोगी।

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