नेशनल डेस्क, नई दिल्ली.नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण देने के लिए राज्यसभा में बुधवार को विधेयक पर चर्चा जारी है। बहस के दौरान विपक्ष ने मांग की कि संविधान संशोधन विधेयक को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। विपक्ष ने कहा कि हम बिल के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हम बिल को पेश करने के सरकार के तरीके के खिलाफ हैं। कांग्रेस सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर 8 लाख रुपए कमाने वाला गरीब है तो सरकार को 8 लाख तक की कमाई पर इनकम टैक्स भी माफ कर देना चाहिए। इस पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राज्य चाहें तो 8 लाख रुपए की सीमा को घटा-बढ़ा सकते हैं।
सरकार ने कहा- राज्य अपने हिसाब से पैमाना तय कर सकेंगे :राज्य चाहें तो पैमाना 5 लाख भी कर सकते हैं : कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष से कहा- आप विधेयक में 8 लाख की आय सीमा पर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन बिल में प्रावधान है कि राज्य अपनी मर्जी से जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का पैमाना तय कर सकेंगे। उदाहरण के लिए किसी राज्य को लगता है कि आमदनी का पैमाना 8 लाख रुपए नहीं 5 लाख रुपए होना चाहिए तो वह ऐसा कर सकेगा। संवैधानिक संशोधन के जरिए राज्यों को यह निर्णय करने का अधिकार रहेगा।
यह आरक्षण राज्य सरकारों की नौकरियों और कॉलेजों पर भी लागू होगा : रविशंकर प्रसाद ने कहा- यह आरक्षण सिर्फ केंद्र सरकार की नौकरियों या केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों पर लागू नहीं होगा। यह राज्य सरकारों की नौकरियों और कॉलेजों पर भी लागू होगा। आप हमसे सवाल पूछ रहे हैं कि अभी इस बिल को क्यों ला रहे हैं। आपको किसने रोका था इस बिल को लाने के लिए? हम सभी राजनीतिक कार्यकर्ता हैं और मैं मानता हूं कि इस मुद्दे को समझने की कोशिश सभी ने की है। गांव में जाइए और आपको पता चलेगा कि अगड़े वर्ग के लोग भी गरीब हैं।
समर्थन कर रहे हैं तो खुले दिल से कीजिए : प्रसाद ने कहा- आप 8 लाख पर सवाल उठा रहे हैं और जबकि राज्यसरकार को संवैधानिक अधिकार हैं। आप कह सकते हैं कि हमारे यहां यह सीमा 5 लाख होगी। आपको 10 फीसदी आरक्षण देना होगा, यह संवैधानिक बदलाव होगा। लेकिन, इसका आर्थिक ढांचा क्या होगा, यह आप तय कर सकते हैं। आज जो सदस्य यहां बैठे हैं, उनकी चर्चा 5 से 20 साल बाद होगी। आज जब इतिहास बनाया जा रहा है तो खुले मन से उसका हिस्सा बनिए। आप समर्थन कर रहे हैं तो खुले दिल से करिए।
- बात सभी ने कही, सिर्फ मोदी सरकार ने पूरी की : भाजपा सदस्य प्रभात झा ने कहा- मंडल कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया था कि सामान्य वर्ग में गरीबों के लिए आरक्षण की व्यवस्था हो। तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव भी ऐसा ही चाहते थे। केवल नरेंद्र मोदी ने इसे पूरा किया है। हर राजनीतिक दल के घोषणा पत्र में कहा गया है कि सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए वह आरक्षण देंगे। लेकिन, इसे केवल मोदी सरकार ने पूरा किया। हमें विकास के लिए साथ खड़ा होना चाहिए।
कांग्रेस के सरकार से तीखे सवाल
इनकम टैक्स में छूट दायरा भी बढ़ाइए : पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री और कांग्रेस सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा- आपने संशोधन तो कर दिया, लेकिन इसके पीछे कोई आंकड़ा आपने तय किया है? या कोई आंकड़ा इकट्ठा किया है? कहां ओबीसी ज्यादा हैं? कहां दलित ज्यादा हैं? आपने ऐसा आंकड़ा इकट्ठा किया है? 2.5 लाख से ज्यादा आय पर इनकम टैक्स देना पड़ता है और आप 8 लाख की सीमा आरक्षण के लिए कर रहे हैं तो आप इनकम टैक्स का दायरा 8 लाख कर दीजिए ना?
आप सबकी सहमति नहीं चाहते : सिब्बल ने कहा- आप संविधान का ढांचा बदलने जा रहे हैं और आप यह भी नहीं चाहते कि बिल सिलेक्ट कमेटी में चर्चा के लिए जाए। आप यह नहीं चाहते कि सबकी रायशुमारी के बाद यह बिल पास हो। 5 साल थे आपके पास। पहले ले आते और ये बिल सिलेक्ट कमेटी के पास जाता और सबकी सहमति से पारित हो जाता। ये अभी ये बिल क्यों लाए हैं? ये सभी जानते हैं। जब जॉब ही नहीं है तो आरक्षण से क्या फायदा होगा।
हार्दिक पटेल को तो जेल भेज दिया : सिब्बल ने कहा- कमल का हमला, एक और जुमला। हार्दिक पटेल भी तो यही आरक्षण की मांग कर रहा था। उसको तो आपने जेल भेज दिया? आप दलितों की लिंचिंग पर मौन रहते हैं और अब आरक्षण की बात कर रहे हैं?
आप तीन राज्यों में नहीं हारते तो क्या यह बिल लाते : कांग्रेस सदस्य आनंद शर्मा ने कहा कि आप राजनीति के लिए तीन तलाक बिल लाए, मुस्लिम महिलाओं की बात की। लेकिन, दूसरी महिलाओं का क्या होगा? अगर आप मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में चुनाव नहीं हारे होते तो यह सवर्ण आरक्षण बिल कभी नहीं लाते। जब आप जीत नहीं पाए तो आपने इस बारे में सोचा। भाजपा को अब अहसास हुआ कि कुछ गलती कर रहे हैं। कितने लोग 8 लाख से ज्यादा कमाते हैं? सच यह है कि लोगों के पास रोजगार नहीं है। लोगों का रोजगार छीना जा रहा है। हम बिल का विरोध नहीं कर रहे हैं, क्योंकि हम भी इस मुद्दे का समर्थन करते हैं।"
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