जामनगर.गुजरात के जामनगर में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रातएक जैन फरसाण व्यापारी ने परिवार के चार अन्य सदस्यों के साथ जहर पीकर आत्महत्या कर ली। जांच में प्रथम दृष्ट्या आर्थिक तंगी के चलते यह कदम उठाने की बात सामने आई है। मृतकों की पहचान हृदयरोगी मां जयाबहन साकरिया (70), बेटा दीपकभाई साकरिया (35), बहू आरती (32), पोती कुमकुम (10) और पोता हेमंत (5) के रूप में हुई है। फरसाण व्यापारी के पिता पन्नालाल इनके प्राणघातक कदम उठाने को लेकर मंगलवार सुबह तक अनजान थे।
पिता ने बताया किआम दिनों में सुबह 9 बजे तक बहू चाय के लिए बुलाती थी। सुबह 10 बजे तक जब बहू ने आवाज नहीं दी तो वह घर की ऊपरी मंजिल से नीचे उतरे। कमरे का दरवाजा खुला था।अंदर जाकर देखा तो उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। रसोईघर से जहरीले पदार्थ और उसकी शीशी मिली है। सात सदस्यीय परिवार में अब दो ही लोग बचे हैं। दीपक पन्नालाल का छोटा बेटा था। बड़ा बेटा राजकोट के एक आश्रम में रहता है। इस घटना से आहत वणिक सुखडिया कंदोई समाज ने बुधवार को व्यापार-धंधे बंद रखने का निर्णय लिया है।
पन्नालाल ने बताया कि आय 20-25 हजार रु. महीना थी, जबकि पत्नी की दवा, बच्चों की फीस आदि से खर्च 40-45 हजार रु. पहुंच गया। शुक्रवार को बैंक अधिकारी भी लोन की किस्त लेने के लिए घर आए थे। हालांकि बेटे ने कभी तंगी की परेशानी नहीं बताई थी।
मृतकों के शरीर में मोनोकोटोफोस नामक विषाक्त मिला है। सामान्यत: गेहूं या कपास में कीटनाशक के रूप में इसका इस्तेमाल होता है। दीपक की वृद्ध मां जयाबहन का चार साल से हृदयरोग का इलाज चल रहा था। वह बीमारी के कारण दो साल से बिस्तर पर थी। परिवार के सभी सदस्य उनकी सेवा कर रहे थे।
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तीन दिन पहले दीपकभाई ने बताया कि दिवाली के बाद से मंदी के कारण धंधा नहीं चल रहा। महीने में 15,000 रुपए मां के इलाज पर खर्च हो रहा। बैंक वाले के आने से वह और चिंतित थे।
आर्थिक तंगी से सामूहिक आत्महत्या की बात सामने आई है। लोन पर घर था। मां के इलाज पर हर महीने 20 से 25 हजार रुपए की जरूरत पड़ती थी। घर का खर्च निकालना मुश्किल हो गया था।
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इस घटना के बादमोरारी बापू ने कहा-मुझे फोन पर पता चला कि जामनगर में एक व्यापारी परिवार के पांच सदस्यों ने आत्महत्या कर ली। इससे पीड़ा होना स्वाभाविक है। समाज से मुझे इतना ही कहना है कि आत्महत्या आत्म कल्याण का मार्ग नहीं है। हमारा मनुष्यत्व तब सुशोभित होता है, जब कोई भी परिस्थिति हमें पसंद हो तो हरि कृपा और न पसंद हो तो हरि इच्छा समझें। क्योंकि अंतत: तो हरि इच्छा भावी बलवाना। परमात्मा करे कोई परिवार ऐसा कदम न उठाए। -(भास्कर के पाठकों के लिए संदेश)
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