एक सिरीमान जी हैं। हाल के समय तक वह एम्पोरियो मॉल में एक दुकान में काम करता था। लेकिन अब वह जाहिर तौर पर जम्मू-कश्मीर के सतपाल मलिक के गवर्नर हाउस में बिग बॉस टाइप की हैसियत में है। वह लगातार राजभवन में ही रहता है, अफसरों को हुक्म देता है और सुना यह गया है कि बड़े पैमाने पर इच्छुक स्थितियों, इच्छुक लोगों और इच्छुक पार्टियों के बीच का संपर्क सूत्र बना हुआ है।
अब तो आप ही साब हो :एक सज्जन दिल्ली पुलिस से एडिशनल डीसीपी के पद से रिटायर हुए सेवानिवृत्ति के बाद पिछले दो वर्ष से वह केंद्रीय गृह मंत्री के सुरक्षा सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस के जो अधिकारी पहले कभी उनके बॉस हुआ करते थे, अब उनकी मिजाजपुर्सी करते नजर आते हैं।
डिप्लोमेसी का अड्डा अक्षरधाम :पहले विदेश से जब कोई वीआईपी आता था, तो उसे आधिकारिक तौर पर ताजमहल घुमाने ले जाया जाता था। पहली बार मोदीजी ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री को नई दिल्ली स्थित अक्षरधाम मंदिर घुमाने ले गए ताकि उन्हें प्राचीन भारतीय संस्कृति दिखाई जा सके। जो स्वयं अक्षरधाम मंदिर नहीं देख सकते, वे अगर इसका वीडियो देखें तो वे स्वयं बहुत ज्यादा आश्चर्यचकित हो जाएंगे। वास्तव में विदेशी उच्च पदस्थ मेहमानों को दिखाने के लिहाज से यह बहुत ही अद्भुत स्थान है।
मेरा क्या होगा ? :अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश (एगमट) कैडर की 10 वीं कैडर नियंत्रण बैठक 10 जनवरी को होगी। चूंकि इस बैठक में महत्वपूर्ण ट्रांसफर-पोस्टिंग पर चर्चा की जाती है, इसलिए संबंधित पक्षों में घबराहट का माहौल है।
संकटमोचक जेटली :चुनाव से ठीक पहले सरकार कई मुद्दों पर रक्षात्मक है, वहीं राहुल गांधी बहुत आक्रामक चल रहे हैं। ऐसे में अरुण जेटली फिर से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गए हैं। चाहे मामला सीबीआई का हो, रिजर्व बैंक का हो, रफैल विमान का हो या कश्मीर का हो, कांग्रेस के लड़ाकू तेवरों का मुकाबला कैसे करें, यह अरुण जेटली ही देख रहे हैं। संसद में सरकार की तरफ से जवाबी वार मुख्य तौर पर उन्हीं ने किया। निर्मला सीतारमण को भी थोड़ा सिखाया-समझाया। सेंट्रल हॉल में किसी ने कहा कि अरुण जेटली मोदी सरकार के प्रणब मुखर्जी बन गए हैं। यूपीए के राज में प्रणब मुखर्जी सरकार के संकटमोचक थे। अब यह भूमिका अरुण जेटली निभा रहे हैं।
किस्सा सत्तरसाला लोकतंतर का :ग्रेट मार्च ऑफ डेमोक्रेसी- भारतीय चुनावों के सात दशकों पर नवीनतम पुस्तक। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले यह नई पुस्तक बहुत चर्चित हो रही है। इसके लेखक पूर्व चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी हैं। इस पुस्तक में उन्होंने हमारी चुनाव प्रणाली के दोषों के बारे में बताया है। यह उनकी लिखी दूसरी पुस्तक है। और सुनील अरोड़ा क्या कर रहे हैं? शायद वह इसे समझने के लिए यह पुस्तक पढ़ रहे हैं?
माने क्या फरवरी में... :सभी मंत्री अपनी परियोजनाओं का उद्घाटन करने के लिए बहुत सक्रिय चल रहे हैं। पीएमओ ने सलाह दी है कि - जल्दी करो। 1 फरवरी को बजट के बाद, लेखानुदान होगा, फरवरी के मध्य में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की जा सकती है। माने आचार संहिता फरवरी से लागू हो जाएगी। प्रधानमंत्री भी अधिक से अधिक यात्राएं कर रहे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री अंडमान गए थे। अंडमान के बीजेपी सांसद प्रसन्न हैं। प्रधानमंत्री ने उत्तर पूर्व का भी दौरा किया है।
लाल किले में कपड़ा मंत्रालय :5 जनवरी को स्मृति ईरानी के कपड़ा मंत्रालय द्वारा लाल किले के अंदर एक शानदार कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जफर महल के अलावा, कार्यक्रम था - आर्टीसन स्पीक - जो ग्रामीण भारतीयों की कपड़ा प्रदर्शनी थी। लाल किला भारत की प्रमुख ऐतिहासिक इमारत है। दरअसल कपड़ा सचिव हैं, राघवेंद्र सिंह, जो पहले संस्कृति सचिव थे। संस्कृति मंत्रालय में उनके कार्यकाल में 5 संग्रहालयों का पुनर्निमाण किया गया, जिन सभी बैरकों का उद्घाटन इस महीने किया जाएगा। क्यूरेशन भी किया गया। अब कपड़ा सचिव के रूप में उन्होंने यही सुझाव कपड़ा मंत्री को दिया। स्मृति इस पर उत्साहित थीं। उन्होंने शो का उद्घाटन किया! लेकिन निमंत्रण में एक महत्वपूर्ण सलाह यह थी कि सूर्यास्त के बाद दिल्ली में बहुत ठंड होती है, इसलिए गर्म कपड़े पहनकर आएं। और सिर ढांकना भी जरूरी है। वैसे, शो वास्तव में दिलचस्प था।
क्या मिलेगा किम डेवी :डेनमार्क के प्रधानमंत्री भारत आ रहे हैं। आधिकारिक तौर पर उनकी यात्रा का उद्देश्य वाइब्रेंट गुजरात में भाग लेना है, लेकिन वह प्रधानमंत्री से भी मिलेंगे और दिल्ली में भारत-डेनमार्क की एक संयुक्त कला प्रदर्शनी का भी उद्घाटन करेंगे। डेनमार्क मोदी का एक नियमित और मूक मित्र है। वाइब्रेंट गुजरात के सभी शो में डेनमार्क ने हमेशा भाग लिया है। लेकिन पुरुलिया में हथियार गिराने वाले किम डेवी के मुद्दे के कारण अजीत डोभाल हमेशा डेनमार्क के आलोचक रहे हैं। भारत चाहता है कि किम डेवी का प्रत्यर्पण हो। लेकिन डेनमार्क की सरकार और न्यायपालिका इसकी अनुमति नहीं देती है। लेकिन इस बार समाधान होने की संभावना है।
जब खबर हो ही गई... :हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने दो जजों के नामों को सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत करने के लिए मंजूरी दी। इनमें से एक दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे और दूसरे राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश। हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का दिल्ली मुख्य न्यायाधीश के स्थान पर स्थानांतरण करने का भी आदेश दिया गया। लेकिन अगले ही दिन इसकी खबर सभी अखबारों में छप गई। खबर छपने से जाहिर तौर पर विक्षुब्ध सीजेआई रंजन गोगोई ने अभी तक इन सिफारिशों को सरकार को अग्रेषित नहीं किया है।
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