नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बहाल हुए आलोक वर्मा ने बुधवार को सीबीआई निदेशक का पदभार संभाल लिया। इस विवाद पर शीर्ष अदालत के निर्देश के तहत चयन समिति की बैठक शाम को होना है। हालांकि, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई अवकाश पर हैं ऐसे में उनकी जगह पर बैठक में जस्टिस एके सिकरी शामिल होंगे। तीन सदस्यीय इस समिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी शामिल हैं।
सिलेक्शन कमेटी को एक हफ्ते के अंदर तय करना है कि आलोक वर्मा सीबीआई प्रमुख के पद पर रहेंगे या नहीं। शीर्ष अदालत ने रातों-रात वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के केंद्र सरकार के फैसले को मंगलवार को निरस्त कर दिया था। हालांकि, कोर्ट ने वर्मा को उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की जांच पूरी होने तक बड़े नीतिगत फैसले करने से रोक दिया।
माेइन कुरैशी के मामले की जांच से शुरू हुआ रिश्वतखोरी विवाद
अस्थाना मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े मामले की जांच कर रहे थे। जांच के दौरान हैदराबाद का सतीश बाबू सना भी घेरे में आया। एजेंसी 50 लाख रुपए के ट्रांजैक्शन के मामले में उसके खिलाफ जांच कर रही थी। सना ने सीबीआई चीफ को भेजी शिकायत में कहा था कि अस्थाना ने इस मामले में उसे क्लीन चिट देने के लिए 5 करोड़ रुपए मांगे थे। हालांकि, 24 अगस्त को अस्थाना ने सीवीसी को पत्र लिखकर डायरेक्टर आलोक वर्मा पर सना से दो करोड़ रुपए लेने का आरोप लगाया था।
सीबीआई में पहली बार दो बड़े अफसरों के बीच लड़ाई
- 2016 में सीबीआई में नंबर दो अफसर रहे आरके दत्ता का तबादला गृह मंत्रालय में कर अस्थाना को लाया गया था।
- दत्ता भावी निदेशक माने जा रहे थे। लेकिन गुजरात कैडर के आईपीएस अफसर राकेश अस्थाना सीबीआई के अंतरिम चीफ बना दिए गए।
- अस्थाना की नियुक्ति को वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। इसके बाद फरवरी 2017 में आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ बनाया गया।
- सीबीआई चीफ बनने के बाद आलोक वर्मा ने अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर बनाने का विरोध कर दिया। उन्होंने कहा था कि अस्थाना पर कई आरोप हैं, वे सीबीआई में रहने लायक नहीं हैं।
- वर्मा 1984 की आईपीएस बैच के अफसर हैं। अस्थाना 1979 की बैच के आईपीएस अफसर हैं।
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