नई दिल्ली. पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक के किराना और केमिकल बाजार में इनकम टैक्स विभाग की रेड की कार्रवाई जारी है। यहां करीब 300 लॉकर में से 140 सील किए जा चुके हैं, जिनसे करीब 25 करोड़ जब्त किए जा चुके हैं। खारी बावली में ये लॉकर सिस्टम करीब 25 साल से चल रहा है। इसकी कहानी दो भाइयों के धंधे में बंटवारे के साथ शुरू हुई थी, जो इतने लॉकर्स तक पहुंच गई, जहां कारोबारी अपनी रकम रखने लगे। इनकम टैक्स विभाग ने
पेपर वर्क पूरा न होने और हवाला कारोबार से जुड़े होने के शक में लॉकर्स पर रेड डाली।
लॉकर्स के पीछे की कहानी
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 25 साल पहले दो भाइयों ने धंधे का बंटवारा किया। एक भाई ने अपने पुराने कारोबार को ही चालू रखा। वहीं, दूसरे भाई अशोक गुप्ता ने लॉकर बनाकर उसे किराए पर देने का विचार बनाया।
- उसने इस काम के लिए बकायदा सरकार से लाइसेंस लिया और बेसमेंट में लॉकर बनाए। यहां पर 300 लॉकर बनाएं गए, जिनमें से एक भी खाली नहीं रहता था।
- इन्हें चलाने वाले अशोक गुप्ता ने लॉकर्स के सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था भी की है। यहां पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और गार्ड्स तैनात रहते हैं।
- बाजार के कारोबारियों का कहना है कि इलाके के दुकानदारों का सरकारी बैंक से ज्यादा भरोसा इन प्राइवेट लॉकर्स पर है। उनके लिए ये ज्यादा सुविधाजनक भी है।
कारोबारी हैं परेशान
- व्यापारियों का कहना है कि इन लॉकर्स से उन्हें कभी कोई परेशानी नहीं हुई। उन्हें इसलिए बहुत कम किराया भी देना पड़ता है और ये दुकानों से करीब भी पड़ता है।
- व्यापारियों के मुताबिक, दिनभर दुकानदारी के बाद वो गल्ले में जितना पैसा आता था, वो उसे इन लॉकर्स में रख देते थे क्योंकि देर रात तक तो बैंक बंद हो जाते थे।
- कारोबारी नेता विजय गुप्ता का कहना है कि रेड पड़ने के बाद लोगों को अपना पैसा दुकानों में रखना पड़ रहा है, जिसके चलते एक महीने में कई दुकानों के ताले टूट चुके हैं। वहीं, कई कारोबारियों से लूटपाट की घटनाएं भी हो चुकी हैं।
क्यों मारा गया छापा ?
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को इन लॉकर्स के गलत इस्तेमाल और हवाला कारोबार से जुड़े होने की खबर मिली थी। शुरुआती रिपोर्ट्स में कहा गया था कि हावाला कारोबारियों ने अपने पैसे रखने के लिए ये लॉकर लिए थे। ये लॉकर एनसीआर के तंबाकू, केमिकल और मेवों के कारोबार से जुड़े हाई प्रोफाइल लोगों के हैं, जिनका कनेक्शन हवाला कारोबारी पंकज कपूर से जुड़ रहा है। इसके साथ ही लॉकर की कागजी कार्रवाई भी पूरी नहीं हुई थी।
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