नई दिल्ली. राष्ट्रपति के सुरक्षा गार्ड के लिए केवल तीन जातियों की भर्ती करने के खिलाफ लगाई गई याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और आर्मी स्टाफ के प्रमुख से जवाब मांगा है।
जस्टिस एस मुरलीधर और संजीव नरुला की बेंच ने मामले में रक्षा मंत्रालय, आर्मी स्टाफ के प्रमुख, राष्ट्रपति के सुरक्षा गार्ड्स के कमांडर और आर्मी भर्ती के डायरेक्टर को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने सभी सम्बंधित मंत्रालयों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के अंदर जवाब देने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई 8 मई 2019 को होगी।
दिल्ली हाईकोर्ट में इस भर्ती के खिलाफ हरियाणा निवासी गौरव यादव ने 4 सितंबर 2017 को याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि राष्ट्रपति के सुरक्षा गार्ड्स की भर्ती के लिए सिर्फ तीन जातियों जाट, राजपुत और सिख को ही आवेदन के लिए बुलाया है, ऐसा क्यों?
गौरव ने अपनी याचिका में यह भी कहा कि वह इस भर्ती के लिए जाति को छोड़कर सभी योग्यताएं पूरी करता था। इसके बावजूद उसे भर्ती के लिए नहीं बुलाया गया।
याचिकाकर्ता के वकील राम नरेश यादव ने कहा, 'तीन जातियों को प्राथमिकता देने से देश के अन्य योग्य नागरिकों के साथ भेदभाव हो रहा है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। साथ ही यह अनुच्छेद 15 (1) के भी खिलाफ है, जिसके मुताबिक धर्म, जाति, लिंग और जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। इनके अलावा यह अनुच्छेद 16 का भी उल्लंघन है।'
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