Reservation for upper castes/ सवर्णों को 10% आरक्षण का प्रस्ताव; मोदी कैबिनेट के प्रस्ताव से जुड़ी 10 जरूरी बातें

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नई दिल्ली. upper castes Reservation: इसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव के ठीक पहले नरेंद्र मोदी सरकार ने कैबिनेट में एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत, सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण (reservations for economically backward upper castes) दिया जाएगा। सवर्णों (upper castes) को आरक्षण (Reservation) देने के इस प्रस्ताव को कैबिनेट (Narendra Modi government ) ने भले ही मंजूरी दे दी हो लेकिन इसको अमली जामा पहनाने के लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता होगी। हम आपको इस प्रस्ताव और इससे जुड़ी 10 अहम बातें (know 10 important things about Reservation for upper castes proposal ) बता रहे हैं।

1) प्रस्ताव के मुताबिक, आरक्षण का लाभ सवर्ण वर्ग के सिर्फ उन लोगों को मिल पाएगा जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपए से कम होगी। दूसरे शब्दों में कहें तो 8 लाख से ज्यादा सालाना आय वाले लोगों को इस प्रस्तावित बिल का लाभ नहीं मिल पाएगा।

2) जिन सवर्णों के पास 5 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि (agricultural land) होगी वो आरक्षण का लाभ नहीं ले सकेंगे। यानी, आरक्षण का लाभ सवर्ण वर्ग के उसी तबके को मिल सकेगा जिसके पास 5 एकड़ या इससे कम कृषि भूमि हो।

3) आरक्षण का लाभ वो ही सवर्ण तबका पा सकेगा जिसके पास 1000 वर्ग फीट से कम आवासीय भूमि होगी। यानी अगर इससे ज्यादा आवासीय भूमि या कहें रेसीडेंशियल प्लॉट हुआ तो आरक्षण की पात्रता नहीं होगी।

4) मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नॉन नोटिफाइड म्युनिसिपलटी एरिया (non-notified municipality area) यानी गैर अधिसूचित नगर पालिका क्षेत्र में 200 गज (yards) से कम का आवासीय भूखंड है तो आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।

5) कल यानी 8 जनवरी 2019 को यह प्रस्ताव लोकसभा में पेश किया जा सकता है।

6) इसके लिए संविधान में संशोधन करना आवश्यक होगा। क्योंकि एक तय सीमा के बाद आरक्षण नहीं दिया जा सकता। संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 इसी से जुड़े हुए हैं। यानी सवर्ण आरक्षण (Reservation for upper castes) के लिए इन धारारों में संशोधन करना जरूरी होगा।

7) 2007 में सांख्यिकी मंत्रालय के एक सर्वे में कहा गया था कि हिंदू आबादी में पिछड़ा वर्ग की संख्या 41% और सवर्णों की संख्या 31% है। 2014 के एक अनुमान के मुताबिक, 125 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां हर जातिगत समीकरणों पर सवर्ण उम्मीदवार भारी पड़ते हैं और जीतते हैं।

8) सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में साफ किया था कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग या इनके अलावा किसी भी अन्य विशेष श्रेणी में दिए जाने वाले आरक्षण का कुल आंकड़ा 50% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

9) संविधान के अनुच्छेद 16 (4) में देश के पिछड़े नागरिकों को आरक्षण देने का जिक्र है। केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय ने जुलाई 2016 में बताया था कि देश में अभी जातिगत आधार पर 49.5% आरक्षण दिया जा रहा है।

10) पिछले साल के आखिर में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले सवर्ण आंदोलन शुरू हुआ था। इसका सबसे ज्यादा असर मध्यप्रदेश में देखा गया था। तीनों राज्यों में कांग्रेस को जीत मिली थी। अनुसूचित जाति-जनजाति संशोधन अधिनियम के खिलाफ सवर्ण संगठनों ने सितंबर में भारत बंद भी रखा था। सरकार के इस कदम के मायने सियासी भी दिखाई देते हैं।



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नरेंद्र मोदी सरकार ने कैबिनेट में एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत, सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण का प्रस्ताव है।- फाइल

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