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| CJP Protest Jantar Mantar Delhi 2026 |
भारत की राजनीति और छात्र आंदोलनों के इतिहास में कल यानी 6 जून 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक अनोखा और ऐतिहासिक नज़ारा देखने को मिला। सोशल मीडिया से शुरू हुआ एक डिजिटल आंदोलन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP - Cockroach Janta Party) अब सड़कों पर उतर आया है।
नीट (NEET-UG) पेपर लीक, CBSE ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) में गड़बड़ी और देश की शिक्षा प्रणाली में लगातार हो रही अनियमितताओं के खिलाफ हजारों युवाओं और छात्रों ने दिल्ली के जंतर-मंतर को घेर लिया।
CJP Protest क्या है और यह आंदोलन क्यों शुरू हुआ?
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के एक जज द्वारा सरकार की आलोचना करने वाले युवाओं की तुलना कथित तौर पर 'कॉकरोच' और 'पैरासाइट्स' से की गई थी। युवाओं ने इस अपमान को एक हथियार बना लिया और अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) के नेतृत्व में सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का गठन कर दिया, जिसके इंस्टाग्राम पर देखते ही देखते 2 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए।
कल हुए इस प्रदर्शन में छात्र अपने हाथों में भारत का राष्ट्रीय ध्वज, किताबें और चेहरे पर कॉकरोच के मास्क लगाए हुए नज़र आए। छात्रों का नारा था— "कॉकरोच आ रहे हैं, धर्मेंद्र प्रधान जा रहे हैं!"
आंदोलन की प्रमुख मांगें और दिग्गजों का समर्थन
CJP Protest का मुख्य उद्देश्य देश के वर्तमान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है।
इस आंदोलन को कई बड़ी हस्तियों और राजनेताओं का भी समर्थन मिला:
सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk): लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक खुद इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने शिक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की वकालत की।
महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra): टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "कॉकरोच तो न्यूक्लियर ब्लास्ट में भी बच जाते हैं, इन्हें हल्के में मत लो।"
अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे: सपा प्रमुख अखिलेश यादव और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी इस आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को देश के युवाओं की आवाज़ को दबाना बंद करना चाहिए।
'यह सिर्फ ट्रेलर है'— CJP ने दिया 7 दिनों का अल्टीमेटम
शनिवार शाम को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन खत्म होने के बाद, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार को बड़ी चेतावनी दी है।
"जंतर-मंतर पर जो हुआ, वो तो सिर्फ एक 'ट्रेलर' था। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले 7 दिनों के भीतर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से नहीं हटाते हैं, तो यह आंदोलन दिल्ली से निकलकर पूरे देश के कोने-कोने में फैल जाएगा।" — अभिजीत दिपके, संस्थापक (CJP)
निष्कर्ष (Conclusion)
CJP का यह प्रदर्शन इस बात का सबूत है कि आज का 'जैन-ज़ी' (Gen Z) युवा सिर्फ सोशल मीडिया पर मीम्स बनाना नहीं जानता, बल्कि अपने अधिकारों और भविष्य के लिए सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण क्रांति करना भी जानता है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस 7 दिनों के अल्टीमेटम पर कोई एक्शन लेती है या युवाओं का यह गुस्सा देशव्यापी आंदोलन का रूप अख्तियार करेगा।
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