देश के 62% लोग नागरिकता कानून के समर्थक, 65.4% ने एनआरसी लागू करने को कहा

नई दिल्ली. देशभर में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। इस बीच आईएएनएस-सीवोटर ने शनिवार को अपने सर्वे में दावा किया कि देश के 62.1% नागरिक सीएए पक्ष में हैं। सर्वे के मुताबिक, 65.4% लोग चाहते हैं कि एनआरसी को पूरे देश में लागू किया जाए। देश के 55.9% लोग मानते हैं कि सीएए और एनआरसी केवल अवैध प्रवासियों के खिलाफ हैं।

17 से 19 दिसंबर के बीच, देश भर के 3,000 से ज्यादा नागरिकों पर यह सर्वे किया गया। इसमें असम, उत्तर पूर्व और मुस्लिम समुदाय से पांच-पांच सौ लोगों को शामिल किया गया।

Q&A: सीएए और एनआरसी पर न्यूज एजेंसी के सर्वे के अनुसार:

कितने लोग नागरिकता कानून और एनआरसी के समर्थन में हैं?

सीएए- सर्वे के मुताबिक, देश भर में 62.1% लोग समर्थन में हैं और 36.8% लोगों ने इसका विरोध किया। पूर्वी भारत में 57.3%, पश्चिम में 64.2%, उत्तर में 67.7% और दक्षिण में 58.5% लोगों ने इसका समर्थन किया। बिल का विरोध करने वालों का प्रतिशत पूर्व में 42.7, पश्चिम में 35.4, उत्तर में 31.2 और दक्षिण में 38.8% रहा।

सीएए पर सरकार और विपक्षी दलों के समर्थन के सवाल पर देश के 58.6% लोगों ने सरकार का समर्थन किया, जबकि 31.7% विपक्षी दलों के साथ नजर आए। पूर्व, पश्चिम, उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश लोगों ने सरकार का समर्थन किया, जबकि दक्षिण भारत में 47.2% लोगों ने विपक्षी दलों के रुख से सहमति जताई।

एनआरसी- देश भर में 65.4% लोग एनआरसी के पक्ष में हैं। 28.3% ने इसका विरोध किया, जबकि 6.3% प्रतिशत लोग इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। पूर्व में 65.9%, पश्चिम में 67.5%, उत्तर में 73.8% और और दक्षिण भारत में 52.1% लोग पूरे देश में एनआरसी लागू करने के पक्ष में हैं, जबकि पूर्व में 31.4%, पश्चिम में 22.1%, उत्तर में 20.1% और दक्षिण भारत में 40.6% लोग एनआरसी के विरोध में हैं।

सर्वे में कहा गया कि पूर्व में 69%, पश्चिम में 66% और उत्तर भारत में 72.8% लोग दूसरे देशों से आकर भारत में बसने वाले लोगों को सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं। दक्षिण भारत में केवल 47.2% इससे सहमति जताते हैं। 50% लोग इससे इनकार करते हैं।

सीएए और एनआरसी पर मुस्लिमों की क्या राय है?

सीएए- देश के 63.5% मुस्लिम नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हैं, जबकि 35.5% इसका समर्थन करते हैं। 0.9% मुस्लिम इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। दूसरी तरफ, 66.7% हिंदुओं ने इस कानून का समर्थन किया और 32.3% इसके विरोध में नजर आए। हालांकि, जब सीएए की आड़ में लोगों के देश में बसने और सुरक्षा के लिए खतरा बनने की आशंका पर सवाल किया गया, तो देश भर में 64.4% लोगों ने हां में जवाब दिया, जबकि 32.6% लोगों ने इसे नकार दिया। वहीं मुस्लिमों को आशंका है कि नागरिकता कानून लागू करने से मंहगाई बढ़ सकती है।

एनआरसी- मुस्लिम समुदाय के 64.7% लोगों ने कहा कि यह भारतीय मुसलमानों के खिलाफ है। 20.8% लोगों ने माना कि यह कानून केवल अवैध प्रवासियों के खिलाफ है। 66.2% एनआरसी को देश भर में लागू करने के खिलाफ हैं, जबकि 28.5% ने इसका समर्थन किया। दूसरी तरफ, हिंदुओं में 72.1% लोगों ने एनआरसी का समर्थन किया और 21.3% इसके विरोध में रहे।

सीएए पर सरकारी स्टैंड का समर्थन करने के सवाल पर हिंदू और मुस्लिम विभाजित हो गए। 67% हिंदुओं ने सरकार के पक्ष में सहमति जताई, 71.5% मुस्लिमों ने विपक्षी दलों के कदमों का समर्थन किया।

पूर्वोत्तर के लोग घुसपैठ के सवाल पर क्या कहते हैं?

सीएए- सीएए और एनआरसी को लेकर विरोध की शुरुआत पूर्वोत्तर भारत से हुई थी। यहां 50.6% लोगों ने सीएए का का पक्ष लिया, जबकि 47.4% लोगों ने इसका विरोध किया। बांग्लादेशी प्रवासियों के भारत में रहने की वजह पूछने पर 61.4% लोग कहते हैं कि भारत में बेहतर आर्थिक अवसर मौजूद हैं, वहीं 23.8% उन्हें वहां से निकालने को इसकी वजह बताते हैं। 14.8% ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

एनआरसी- पूर्वोत्तर राज्यों में 73.4% लोगों ने देश भर में एनआरसी लागू करने का समर्थन किया, जबकि 22% इसके विरोध में रहे। यहां 59.8% लोग घुसपैठ से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे के सवाल से सहमत थे जबकि 35.7% ऐसा नहीं मानते। यहां 65.3% हिंदू और 67.5% मुस्लिम प्रतिशत लोगों ने इसके पक्ष में राय दी, वहीं 33% हिंदू और 28.2% मुस्लिमों ने असहमति जताई।

पूर्वोत्तर के 65.5% लोगों का मानना है कि सीएए और एनआरसी अवैध प्रवासियों के खिलाफ हैं, जबकि 27.3% लोगों को लगता है कि ये दोनों कानून भारतीय मुसलमानों के खिलाफ हैं।

असम में सीएए और एनआरसी को लोग कैसे देखते हैं?

सीएए- असम में लगभग 68.1% लोग सीएए के खिलाफ रहे, जबकि 31% इसके पक्ष में राय दी। यहां 53.6% लोग मानते हैं कि सीएए और एनआरसी कानून अवैध प्रवासियों के खिलाफ बने हैं। 24.6% इन्हें भारतीय मुसलमानों के खिलाफ मानते हैं। करीब 14.8% ने कहा कि उन्हें यह मुद्दा समझ नहीं आया।

एनआरसी- असम में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एनआरसी को लागू किया जा चुका है। यहां 76.9% लोग पूरे भारत में एनआरसी लागू करने के पक्ष में हैं, जबकि 16.5% लोग इसके खिलाफ रहे। 53.5% लोग विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए स्टैंड के पक्ष में रहे, जबकि केवल 33.7% ने सरकार के रुख का समर्थन किया।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
एनआरसी और सीएए के खिलाफ देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन जारी हैं।


source /national/news/survey-caa-and-nrc-62-of-the-countrys-people-support-the-citizenship-law-654-favour-implementation-of-nrc-126346011.html

कोई टिप्पणी नहीं

Blogger द्वारा संचालित.