ट्रंप हटें या ना हटें, पर जिस अमेरिकी राष्ट्रपति पर महाभियोग चला उनकी पार्टी अगला चुनाव हार गई
भास्कर न्यूज.भारत में इस समय नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के विरोध में लगभग पूरे देश में उग्र प्रदर्शन हो रहे हैं, केंद्र और राज्य सरकारों को प्रदर्शनों से निपटने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है, लेकिन ठीक इसी समय दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप गहरे संकट में फंस गए हैं। उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने इसकी अनुमति दे दी है। ये दाे ऐसी खबरें हैं जो भारत में इस समय सबसे ज्यादा गूगल पर सर्च की जा रही हैं। गूगल के पिछले 48 घंटे के ट्रेंड के अनुसार 53 प्रतिशत लोगों ने ट्रंप के महाभियोग और 47 प्रतिशत लाेगों ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी )विवाद को सर्च किया है जबकि एक सप्ताह पहले यानी 13-14 दिसंबर को भारत में 78 प्रतिशत लोगों ने गूगल पर ट्रंप के महाभियोग को और 22 प्रतिशत लोगों ने सीएए और एनआरसी विवाद को सर्च किया था।
जहां तक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर महाभियोग की बात है वे अमेरिका के 243 साल के इतिहास में तीसरे ऐसे राष्ट्रपतिहो गए हैं जिन्हें हटाने के लिए महाभियोग की कार्रवाई की जा रही है। वहीं इस कार्रवाई का सामना करने वाले वे रिपब्लिकन पार्टी के पहले नेता हैं। 153 साल पहले 1868 में अमेरिकी राष्ट्रपति एंड्रयू जानसन के खिलाफ पहली बार महाभियोग चलाया गया था। इसके बाद 1998 में तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई की गई थी। दोनों ही डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता थे। ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई में पहली बार किसी राष्ट्रपति पर सत्ता के दुरुपयोग और संसद की कार्रवाई में बाधा डालने का आरोप लगा है। इसके पहले एंड्रयू जॉनसन के खिलाफ अपराध और दुराचार व बिल क्लिंटन पर झूठ बोलने एवं न्याय में बाधा डालने पर महाभियोग की कार्रवाई की गई थी।
दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र प्रमुख को हटाने की प्रक्रिया
1). आखिर ट्रंप पर महाभियोग चलाया क्यों जा रहा है?
अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने ट्रंप के खिलाफ दो आरोप लगाए हैं। पहला आरोप सत्ता के दुरुपयोग का और दूसरा संसद के काम में अड़चन डालने का। पहले आरोप का प्रस्ताव 197 के मुकाबले 230 मतों से पास हुआ जबकि दूसरा प्रस्ताव 198 के मुकाबले 229 वोट से पास हुआ है। अब ऊपरी सदन सीनेट में ट्रंप पर मुकदमा चलाया जाएगा।
2). ट्रंप ने ऐसा क्या किया है?
डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडीमिर जेलेंस्की पर 2020 में डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवार जो बाइडेन और उनके बेटे के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच के लिए दबाव बनाया है। बाइडेन के बेटे यूक्रेन की एक ऊर्जा कंपनी में बड़े अधिकारी हैं। राष्ट्रपति पर आरोप है कि उन्होंने अपने राजनीतिक लाभ के लिए यूक्रेन को मिलने वाली आर्थिक मदद को रोक दिया था।
3). क्या डोनाल्ड ट्रंप पद से हटाए जा सकते हैं?
राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की अनुमति मिलने के बाद रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत वाली सीनेट में जांच शुरू होगी। यह जांच नेताओं की समितियां करेंगी। हर एक समिति को इस मामले से जुड़े किसी एक चीज को समझने में महारत हासिल है, जैसे कि विदेशी मामलों की समिति, आर्थिक मामलों की समिति और न्याय की समिति। अगर समिति यह तय करती है कि ट्रंप के खिलाफ आरोप तय किए जाएं तो इस पर सदन के सदस्य मतदान करेंगे। अगर ट्रंप के खिलाफ दो तिहाई बहुमत के साथ अभियोग सिद्ध हो जाते हैं तो वह अमेरिकी इतिहास में महाभियोग की
प्रक्रिया के चलते पद से हटाए जाने वाले पहले राष्ट्रपति होंगे।
4). राष्ट्रपति को हटाने के लिए यह है महाभियोग प्रक्रिया
- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (निचले सदन) में महाभियोग प्रस्ताव की धाराओं पर वोटिंग।
- महाभियाेग प्रस्ताव पर बहुमत के लिए 51 प्रतिशत वोट की जरूरत होती है। (ट्रंप के खिलाफ 52.87 % वोट पड़े)
- महाभियोग के पास होने के बाद सीनेट में सुनवाई ।
- सीनेट में प्रस्ताव के पक्ष में यदि दो तिहाई (67%) से ज्यादा वोट पड़ते हैं तो ट्रंप को राष्ट्रपति पद छोड़ना होगा। इसके बाद उपराष्ट्रपति पद संभालेंगे।
- प्रस्ताव के पक्ष में दो तिहाई से कम वोट पड़ते हैं तो डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति पद पर बने रहेंगे।
5). दोनों सदनों में ट्रंप की पार्टी की स्थिति क्या है?
| निचला सदन यानीहाउस ऑफ रीप्रेजेंटटिव्स | ऊपरी सदन यानी सीनेट | ||
| कुल सदस्य | 435 | कुल सदस्य | 100 |
| डेमोक्रेट्स | 241 | रिपब्लिकंस | 53 |
| रिपब्लिकंस | 194 | डेमोक्रेट्स | 45 |
6). तीन सदियों में तीन राष्ट्रपतियों पर महाभियोग?
अमेरिका के 243 सालों के इतिहास में यह तीसरा अवसर है जब किसी राष्ट्रपति पर महाभियोग की कार्रवाई की जा रही है। 19वीं सदी में एंड्रयू जॉनसन, 20वीं सदी में बिल क्लिंटन पर महाभियोग चला। अब 21वीं सदी में डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग की कार्रवाई की जा रही है। इससे पूर्व जिन दोनों राष्ट्रपतियों पर महाभियोग चला, वो उनके दूसरे कार्यकाल में चला, ट्रंप पर उनके पहले ही कार्यकाल में महाभियोग चल रहा है।
7). असर पार्टी पर पड़ेगा ?
महाभियोग की इस कार्रवाई का ट्रंप पर असर हो ना हो, लेकिन उनकी पार्टी पर इसका असर पड़ सकता है। कम से कम इतिहास तो यही कहता है। क्योंकि, इसके पहले डेमाेक्रेटिक पार्टी के एंड्रयू जॉनसन और बिल क्लिंटन के विरुद्ध क्रमश: 1868 और 1998 में महाभियोग चला। नतीजा- उनकी पार्टी को अगले चुनाव में बड़ी हार का सामना करना पड़ा। ट्रंप से उनकी पार्टी पर फिर वही खतरा है।
8). ट्रंप से पहले दो राष्ट्रपतियों पर महाभियोग क्यों चला था?
17वें राष्ट्रपति डेमोक्रेटिक पार्टी के एंड्रयू जॉनसन के खिलाफ अपराध और दुराचार के आरोपों में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में महाभियोग प्रस्ताव पास हुआ था। हालांकि, सीनेट में जॉनसन के पक्ष में वोटिंग हुई और वे राष्ट्रपति पद से हटने से बच गए। ऐसे ही 42वें राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को एक व्यापक ज्यूरी के सामने झूठी गवाही देने और न्याय में बाधा डालने के मामले में महाभियोग का सामना करना पड़ा था। वहीं 1974 में राष्ट्रपति निक्सन पर अपने एक विरोधी की जासूसी करने का आरोप लगा था। लेकिन महाभियोग से पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। क्योंकि उन्हंे पता था कि सीनेट में मामला जाने पर इस्तीफा देना पड़ेगा।
आधे अमेरिकी मानते हैं कि ट्रंप पर चले महाभियोग
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ चल रही महाभियोग की कार्रवाई को लेकर विभिन्न अमेरिकी सर्वे एजेंसियां और मीडिया समूह लगातार सर्वे कर रहे हैं। इनके द्वारा जारी की गई चार प्रमुख रिपोर्ट्स यह बताती हैं कि आधे से अधिक अमेरिकी इस कार्रवाई के पक्ष में हैं।

वो किताब जिसने महाभियोग के बारे में पहले ही बताया था
जयपुर में रहने वाले लेखक इंदर दान रत्नू ने किताब "अल्टरनेटिव टू हिलेरी - इम्पीचेबल प्रेसिडेंट ट्रंप' में दावा किया था कि ट्रंप पर महाभियोग चलेगा। वह भी तब जब ट्रंप राष्ट्रपति भी नहीं बने थे। जून-जुलाई 2016 में यानी अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव से ठीक चार माह पहले यह किताब लिखी गईथी। किताब में इंदर ने डोनाल्ड ट्रंप के एक विशेष परिस्थति में राष्ट्रपति चुनाव जीतने की बात कही है। साथ ही यह भी बताया है कि उनके जीतने के बाद क्या-क्या होगा। इसमें महाभियोग भी शामिल है। खास बात यह है कि ये किताब सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक जीवन से जुड़ी भविष्यवाणियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसमें ट्रंप के जीवन से जुड़े अन्य दावे भी किए गए हैं। लेखक के अनुसार, अपने वादों को पूरा न करने के चलते ट्रंप को महाभियोग का सामना करना पड़ेगा। डोनाल्ड ट्रंप का उनके बोलने पर नियंत्रण नहीं होना भी इसकी एक बड़ी वजह होगी।
स्रोत : पुस्तक टू एंड अ प्रेसिडेंसी, अंसर्टेन जस्टिस, मीडिया रिपोर्ट्स
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