2019 लोकसभा चुनाव स्ट्राइक रेट


बीजेपी ने जितनी जीत मोदी के कार्यकाल में हासिल की है उतनी शायद ही कभी की हो. बता दें कि आने वाले समय में पीएम मोदी की समस्याएं बढ़ सकती हैं क्योंकि कुछ खबरों की मानें तो राजस्थान में रिकॉर्ड तोड़ चुनाव जीतने वाली बीजेपी की बादशाहत इस राज्य में भी कम होती नजर आ रही है, साथ ही बीजेपी का गढ होने वाले राज्य मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ में ही मोदी का डंका कम होता दिख रहा है. 
इन तीनों राज्यों में कुल ६५ सीटे हैं जिनमें से पिछले चुनावों में बीजेपी ने ६२ सीटें अपने पाले में करी थी. बीजेपी राजस्थान और मध्य प्रदेश में कुल 55 पर्सेंट वोट्स से जीती थी और उनका स्ट्राइक रेट ९५ प्रतिशत रहा था, लेकिन अब ये स्ट्राइक रेट कम होता नज़र आ रहा है और शायद बीजेपी का स्ट्राइक रेट गिर कर केवल 60 प्रतिशत ही रह जाए. 
साल २०१४ के चुनावों में कांग्रेस और बीजेपी के बीच घमासान युद्ध छिडा हुआ था. कुल १८९ सीटों के इस मुकाबले में पीएम मोदी ने १६६ सीटें हासिल की थी और उनका स्ट्राइक रेट रहा था ८८ प्रतिशत.
यदि इन तीनों राज्य में मोदी सरकार का स्ट्राइक रेट चुनावों के समय कम नज़र आता है तो इसका असर अन्य राज्यों के चुनावों पर भी साफ देखने को मिल सकता है. अगर ऐसा हुआ तो बीजेपी का गिरा स्ट्राइक रेट सीधा कांग्रेस को फायदा पहुंचाएगा. यहाँ तक कि मोदी के खुद के शहर गुजरात में उन्हे कांग्रेस से कड़ा मुकाबला मिलने की उम्मीद है.
जहां बीजेपी का स्ट्राइक रेट कांग्रेस के खिलाफ 88 और ९५ प्रतिशत था वहीं अन्य पार्टी का स्ट्राइक रेट महज 49 प्रतिशत ही था. अब ऐसे में अगर मोदी सरकार कांग्रेस तक से नहीं जीत पाई तो अन्य सरकारों से जीतना भी उनके लिए बेहद मुश्किल हो जाएगा.
बता दें कि 2014 में बीजेपी की जीत का जितना बड़ा कारण मोदी थे उतना ही बड़ा कारण कांग्रेस का खराब प्रदर्शन भी था.
साल २०१४ में मोदी ने रिकॉर्ड तोड लोकसभा चुनाव 55 प्रतिशत वोट पाकर जीते थे और इस कमाल के प्रदर्शन को मोदी प्रिमियम का नाम दिया गया था, अब ११ दिसंबर को देखना होगा कि मोदी प्रिमियम की आखिर कितनी चमक बाकी रह गई है.
अब तक बीजेपी ने सभी चुनाव मोदी जी के नाम से जीते हैं. लोकल पॉलीटिशियन आम समस्याओं की बातें तो करते ही हैं लेकिन मोदी के नाम पर भी बेहद वोट बटोर लेते हैं. इसलिए 2019 के लोकसभा चुनाव की झलक हम साफ देख सकते हैं.
अब अगर बात की जाए गठबंधन की तो कांग्रेस का इस महागठबंधन को लेकर प्रदर्शन बेहद अच्छा नजर आ रहा है.
महागठबंधन को "इंडेक्स ऑफ अपोजिशन यूनिटी" का नाम दिया गया है जिसमें अभी यह तय किया जाना बाकी है कि इसमें कौन-कौन शामिल होगा. जहां एक तरफ कांग्रेस ने अपना निर्णय ले लिया है वहीं उनके संभावित सहयोगी अभी भी ऑप्शन तलाश रहे हैं. देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की पिक्चर अभी साफ नहीं है और फिलहाल किसी को भी राजनीतिक हवा के रुख के बारे में नहीं पता है.  

कोई टिप्पणी नहीं

Blogger द्वारा संचालित.