अमृतसर रेल हादसा

देशभर को अमृतसर रेल हादसे ने हिला कर रख दिया है, अभी तक इस बात का पता नहीं चल पाया है कि इस बडे हादसे के पीछे कौन जिम्मेदार है. पठानकोट से निकली पठानकोट एक्सप्रेस शाम 5 बजे के आसपास अमृतसर फाटक से गुजरी तो उसने सैंकडो की जान ले ली. इस दिल दहला देने वाले मंजर को लोगों ने अपने कैमरे में कैद कर लिया जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया. लोगों की लाशों के टुकडे तक ढूंढ पाना मुश्किल हो गया.

यह सभी लोग पास में हो रही रामलीला देखने गए थे और रेल की पटरी से रावण को जलता देखने पहुंचे तो उसके पटाखों की आवाज़ में किसी को तेजी से चलती आ रही रेल की आवाज तक सुनाई नहीं दी और ट्रेन चला रहे चालक ने भी रेल नहीं रोकी, रेल १०० से १५० लोगों को कुचलते हुए निकल गई.

बता दें कि आसपास खडे जो लोग बच गए उनका कहना था कि रेल के किसी हॉर्न तक की आवाज उन्हे सुनाई नहीं दी, इसके पीछे रामलीला में हो रही आतिशबाजी को कारण बताया जा रहा है, कि उसी की वजह से लोगों को रेल और उसके हॉर्न की आवाज सुनाई नहीं दी.

इस हादसे के बाद लोगों में गुस्सा बढ़ गया जिसके बाद उन्होंने रेल मंत्री से रेल चालक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की और उसे बडे से बड़ा दंड देने को कहा. लेकिन रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने रेल चालक के खिलाफ किसी भी प्रकार के दंडात्मक कार्रवाई करने से इनकार कर दिया. रेल मंत्री का कहना है कि इसमे रेलवे की तरफ से कोई भी लापरवाही नहीं थी. उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि हमारी ओर से कोई चूक नहीं थी और इसी कारण रेलवे चालक के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई करना गलत होगा. सिन्हा ने इसके साथ ही लोगो को भविष्य में रेलवे पटरियों के पास ऐसे कार्यक्रम आयोजित ना करने की सलाह दी. रेल मंत्री आगे बताते हैं कि अगर थोडी बहुत भी एहतियात बरती जाती तो इस दुर्घटना को टाला भी जा सकता था. उन्होने कहा कि जहां कहीं भी ऐसे कार्यक्रम होते हैं पहले संबंधित जिला प्रशासन अनुमति देता है. 

पुलिस की रिपोर्ट की मानें तो इस हादसे में अभी तक करीब ५९ लोगों की लाशों की पहचान हो पाई है. रेलवे का कहना है कि उनकी कोई गलती नहीं थी क्योंकि उन्हे दशहरा कार्यक्रम की कोई भी सूचना नहीं दी गई थी.

बता दें कि एक तरह से रेल मंत्री अपनी जगह ठीक भी है क्योंकि हर रेलवे चालक को विशिष्ट निर्देश दिए जाते हैं कि ट्रेन को कहा पर धीमी करना, रेलवे चालक को इस बात के बारे में कोई अंदाजा नहीं होता की पटरी पर सैंकडो लोग इकट्ठा हो सकते हैं. जहां पर ये हादसा हुआ वहाँ पटरी का घुमाव था जिस कारण हो सकता है कि रेलवे चालक को भीड दिखी ही नहीं और वह रेल नहीं रोक पाए. साथ ही रेलवे के बीच के खंड पर रेल कर्मचारी तैनात नहीं होते, केवल रेलवे फाटक पर कर्मचारी होते हैं जिनका काम यातायात नियंत्रित करना होता है. साथ ही रेलवे मंत्री का ये भी कहना था कि अगर आपात ब्रेक लगाए जाते तो हादसा इससे भी ज्यादा बड़ा हो सकता था.

 

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