बीजेपी सांसद - स्मृति ईरानी के गोद लिए गांव से भ्रष्टाचार के आरोप
स्मृति ईरानी बीजेपी सांसद हैं जिनके बारे में लगभग हर कोई जानता है लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि १७ मई २०१६ को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत स्मृति ने गुजरात से आणंद गांव से करीब ३० किलोमीटर दूर स्थित माघरोल गांव को गोद लिया था.
दरअसल, स्मृति को अपने कार्यकाल में इस गांव को और बेहतर बनाना था लेकिन इतने साल के बाद के नतीजे तो कुछ और ही कह रहे हैं. बता दें कि माघरोल गांव से भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं. अब हमने ये तो सोचा था कि स्मृति ईरानी गांव को शहर की तरह बना देंगी लेकिन इतना जल्दी की अपना भ्रष्ट स्वभाव तक गांव के अधिकारियों को सिखा देंगी ये नहीं सोचा था.
सरकार हमेशा से पब्लिक के पैसों को गलत जगह पर या फिर अपने घर में भरने के लिए इस्तेमाल करती आई है और ऐसा ही कुछ आरोप ईरानी पर भी लगाया गया है. ये इल्जाम लगाया है कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावडा ने और उन्होने तो केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ केस भी दर्ज किया है.
जब इस बात की तह तक पहुंचने के लिए कुछ अधिकारी माधरोल गांव पहुंचे तो वहाँ ईरानी के भ्रष्टाचार की तस्वीरें साफ देखने को मिली. गांव के लोगों ने जमीन पर काम न होने का ठीकरा ईरानी के लचर रवैये पर फोडा तो कुछ ने भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बताया. यहाँ पूरे तीन साल में केवल पानी की सप्लाई अच्छी हो पाई है जबकि रिपोर्ट्स की मानें तो ईरानी इस गांव पर करोडों रुपए खर्च कर चुकी हैं.
गांव की उप सरपंच अरविंदभाई राठौड की पत्नी से बात करने पर पता चला कि गांव में कुछ काम हुए हैं तो कुछ पर सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की. साथ ही जितने भी केंद्र गांव में बनाए गए हैं वहाँ केवल भ्रष्टाचार हुआ है.
लेक रबर पिचिंग प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार से घिरा हुआ है, शवदाहगृह की दीवारें बिल्कुल मजबूत नहीं हैं और दरवाजे तक काफी हल्के मैटिरीयल के लगाए गए हैं. यहाँ भ्रष्टाचार काफी फैल चुका है. गांव के ५५ फीसदी घरो में शौचालय हैं लेकिन ४५ फीसदी में नहीं और 10 लाख की लागत से दो सार्वजनिक शौचालय बनाए जाने थे उन पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है. गांव को शहर की तरह बनाने में सबसे पहले इस गांव में शहर की जो सबसे पहली चीज आई वो भ्रष्टाचार ही है.
गांव के एक निवासी ने बताया कि गांव में 3 वर्ष में काम तो हुआ है लेकिन उतना नहीं जितना की वादा किया गया था. उनके मुताबिक आरसीसी रोड एक बहुत अच्छी चीज है जो गांव को मिली है. इसके अलावा गांव में पानी की सप्लाई पहले के मुकाबले काफी अच्छी हो गई है लेकिन फिर भी गांव के लोगो को पानी उतना नहीं मिल पा रहा है जितनी जरूरत होती है.
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