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नारायण दत्त तिवारी का जीवन
नारायण दत्त तिवारी का जन्म 18 अक्तूबर को नैनीताल डिस्ट्रीक्ट में हुआ था. तिवारी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. तिवारी उत्तर प्रदेश चुनाव केवल एक नहीं बल्कि 3 बार लगातार जीते थे, वह १९७६ से लेकर १९८९ तक और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री २००२ से २००७ तक रहे थे. वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता थे. तिवारी ने सबसे पहले राजीव गांधी के मंत्रिमंडल में अपना विदेश मंत्री और फिर वित्त मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था. वह २००७ से २००९ तक आंध्र प्रदेश के राज्यपाल भी रहे थे.
नारायण तिवारी का निजी जीवन
तिवारी का जन्म सन १९२५ में नैनीताल जिले के बलूती गांव में हुआ था, उस समय उत्तर प्रदेश का गठन नहीं हुआ था और भारत का यह हिस्सा यूनाइटेड प्रोविंस के नाम से जाना जाता था. सन् १९४७ में स्वतंत्रता के बाद इसे उत्तर प्रदेश नाम मिला. तिवारी के पिता पूर्णानंद तिवारी वन विभाग में अधिकारी थे जिस कारण उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी थी, नारायण तिवारी ने अपनी शिक्षा हल्दवानी, बरेली और नैनीताल से पूरी की.
तिवारी के पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे और ठीक उन्हीं की तरह उनके बेटे नारायण तिवारी ने भी स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी थी. सन् १९४२ में वह ब्रिटिश द्वारा जेल में डाल दिए गए, उनका जुर्म था क वह ब्रिटिश सरकार के खिलाफ नारे वाले पोस्टर और पैंफलेट छपने और उसमें सहयोग देते पकडे गए थे. तिवारी को नैनीताल जेल में डाल दिया गया जहां उनके पिता पहले से ही बंद थे. जब उन्हें १९४४ में रिहा किया गया तो उन्होंने इलाहबाद विश्वविद्यालय से अपनी राजनीति शास्त्र में एम.ए की डिग्री हासिल की. वह अपने कॉलेज में प्रथम आए और उन्होंने इसके बाद एलएलबी की डिग्री भी हासिल की. सन १९४७ में उन्हें विद्यार्थियों द्वारा छात्र यूनियन का अध्यक्ष चुना गया. यह उनके राजनीतिक जीवन की पहली सीढ़ी थी.
राजनीतिक जीवन
आजादी के बाद १९५१ में उत्तर प्रदेश चुनाव हुए जिसमें तिवारी ने नैनीताल सीट से प्रजा समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर हिस्सा लिया. आजादी के बाद कांग्रेस की हवा के बावजूद वह विधानसभा चुनाव जीत गए. इसके बाद कांग्रेस के साथ तिवारी का रिश्ता शुरू हुआ सन १९६३ में. १९६५ में उन्हें कांग्रेस की तरफ से टिकट मिली और वह काशीपुर विधानसभा क्षेत्र से चुने गए. कांग्रेस के साथ उन्होंने कई चुनाव जीते. १९६९ से लेकर १९७१ तक वह कांग्रेस के युवा संगठन के अध्यक्ष रहे. सन १९७६ में वह पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने.
वह तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, वह ऐसे अकेले राजनेता हैं जो दो राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उत्तर प्रदेश के विभाजन के बाद वह उत्तरांचल के भी मुख्यमंत्री बने. बता दें कि १९९० में एक वक्त ऐसा भी था जब राजीव गांधी की मौत के बाद प्रधानमंत्री के तौर पर उनकी दावेदारी की चर्चा भी हुई.
इसके बाद वह साल २००२ से २००७ तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे. १९ अगस्त २००७ को तिवारी आंध्रप्रदेश के राज्यपाल के रूप में चुने गए लेकिन उनका यह कार्यकाल काफी विवादास्पद रहा. पढ़ने के लिए धन्यवाद!
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