मोदी सरकार का सीबीआई के साथ डर्टी गेम
सीबीआई स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के ऊपर लगे आरोपों को सच साबित करने के लिए सीबीआई ने अपनी एक नई टीम बनाई है जोकि राकेश के केस की शुरुआत से जांच करेगी. इस मामले की जांच कर रही टीम एक नए सिरे से गठित की गई है.
इस नई टीम को सीबीआई द्वारा सबसे बेहतर संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं और किसी भी दफ्तर को सील और सर्च करने वाली बात झूठ है. यह जांच सीबीआई के सामान्य तरीकों से ही की जाएगी.
इस मामले की छानबीन के दौरान सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार छुट्टी पर भेज दिया गया है. बता दें कि राकेश पर उन्हीं की टीम के लोगों ने आरोप लगाए थे कि वह एक करप्ट अफसर हैं और वह काफी लोगों से रिश्वत ले चुके हैं.
जब इस बात की पूछताछ के लिए राकेश के साथी को पुलिस ने गिरफ्त में लिया तो उसका इस मामले पर कुछ और ही कहना था. राकेश के साथी ने बताया कि सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा भी इस साजिश में शामिल हैं और वह खुद भी एक करप्ट अधिकारी हैं.
इस खबर ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है. देश की सबसे बडी जांच एजेंसी के इतने बडे अफसर तक करप्शन का शिकार निकलेंगे ये शायद कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा.
आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के बाद केंद्र सरकार द्वारा एम. नागेश्वर राव को तत्काल प्रभाव से आलोक वर्मा की जगह नियुक्त किया गया है. राव काफी समय से सीबीआई में काम कर रहे थे, इससे पहले वह सीबीआई में जॉइंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे. राव 1986 बैच के ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं.
सीबीआई के दोनों ही डायरेक्टर के ऊपर आरोप लगने के कारण केंद्र सरकार को इस कलह के बीच दखल करनी ही पडी जिसके बाद अब हालात काफी हद तक काबू में आ चुके हैं और इस मामले पर पकड़ भी बना ली गई है.
इस पर विपक्ष की पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी जिसमें कांग्रेस के सीनियर प्रवक्ता अभिषेक मनुसिंघवी ने कहा "सरकार ने सीबीआई के डायरेक्टर को छुट्टी पर भेजकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नकार दिया है".
मोदी सरकार इस केस के चलते बुरी तरह से सवालों के घेरे में घिर चुकी है. बता दें कि मोदी सरकार ने अपने गलत कारनामों की पोल पट्टी खुलने से बचाने के लिए आलोक वर्मा को हटाया है. इसके साथ ही अपराधी करार किए गए अस्थाना का साथ दे रही है मोदी सरकार.
सरकार किसी भी तरह से सीबीआई पर अपना हुक्म नहीं चला सकती लेकिन इसके बावजूद नरेंद्र मोदी ने सीबीआई आधिकारियों को मीटिंग करने के लिए अपने पास बुलाया जो कि बेहद आपत्तिजनक बात है.
कांग्रेस नेता ने मोदी सरकार का पर्दाफाश करते हुए ये भी कहा कि जेटली ने ये बयान दिया था कि सीबीआई अधिकारी पर सीवीसी नजर रख सकती है, जबकि यह झूठ है. सीवीसी के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है, मोदी सरकार सीवीसी का दुरुपयोग कर रही है.
अमित शाह और नरेंद्र मोदी इस समय बेहद डरे हुए हैं और छिप रहे हैं जिसके पीछे वजह है कि सरकार अपने डर्टी सीक्रेट छिपाने की जुगत में लगी हुई है. जिस तरह इस मामले में भी सीबीआई अधिकारियों का तबादला किया गया है ठीक वैसे ही नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के समय भी हुआ था.
सरकार अपने घपलों को छिपाने के लिए सीबीआई के कामकाज में दखलअंदाजी कर रही है.
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