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एलआईसी को चूना लगा रही है 90 हज़ार करोड़ की कर्जदार कंपनीयां
एलआईसी और एसबीआई के पैसे से विदेशी निवेशकों को मोदी सरकारी बचाने की कोशिश कर रहे हैं और इस वजह से देश का वित्तीय सेवा क्षेत्र बर्बाद हो रहा है। इस मामले में विपक्षी पार्टी कांग्रेस का आरोप है कि बीते साढ़े चार साल में मोदी सरकार ने देश के वित्तीय सेवा क्ष्ेात्र और बैंकों की कमर तोड़ कर रख दी है।
आईएल एंड एफएस पर बकाया 91 हजार करोड़ के कर्ज से तो यही पता चलता है कि मोदी सरकार वितत्तीय घोटालों पर पर्दा डालने और सरकारी खजाने को चूना लगाने में लगी हुई है। एक प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस ने सरकार पर ये आरोप लगाए कि वो देश की वित्तीय व्यवस्था को खोखला कर रही है। कांग्रेस के स्पीकर प्रोफेसर गौरव वल्लभ ने कहा कि मोदी जी और वित्त मंत्री अरुण जेटली आईएल एंड एफएव को बचाने के लिए एलआईसी और एसबीआई की कुर्बानी देने में लगे हुए हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बैंको के एनपीए में 400 फीसदी की बढ़ोत्तरी का मामला हो या एक लाख करोड़ रुपए से ऊपर के बैंक लूट घोटाले का। बीजेपी सरकार एलआईसी के करोडों निवेशकों की जमा पूंजी को दांव पर लगा रही है।
क्या है संकट
आईएल एंड एफएस एक इंफ्रास्ट्रक्च निवेश से जुड़ी कंपनी है जिसका संचालन सरकार द्वारा किया जाता है। अब ये कंपनी अपने कर्ज की किश्त चुका पाने में असमर्थ हो रही है और इस वजह से देश के कई बड़े बैंकों पर संकट आ पड़ा है। इस वजह से प्रोविडेंट फंड और पेंशन फंड में पैसा लगाकर बचत करने वाले आम लोगों तक का पैसा दांव पर लगा है।
कौन है आईएल एंड एफएस
दरअसल, यह एक सरकारी क्षेत्र की कंपनी है जिसकी 40 सहायक कंपनियां हैं। नॉन बैंकिंग फाइनेंस की श्रेणी में इस कंपनी को रखा जाता है जोकि बैंकों से लोन लगती है और जिसमें कंपनियां निवेश करती हैं और आम जनता जिसके शेयर खरीदती हैं।
कई रेटिंग एजेंसियों द्वारा इस कंपनी को अति सुरक्षित दर्जा हासिल है। असल में ये कंपनी बैंकों से लोन लेती है और रकम के लिए संपत्ति की बजाय सिर्फ कागाजों की गारंटी पर लोन दिया जाता है। इस कंपनी के पीछे भारत सरकार का हाथ है इसलिए इसकी गारंटी पर कोई शक भी नहीं करता है।
अब सरकार ने इस डूबती हुई कंपनी को बचाने के लिए एलआईसी को आगे बुलाया है। इस कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी 40.25 प्रतिशत है और एलआईसी की हिस्सेदारी 25.34 पर्सेंट है। बाकी की हिस्सेदारी भारतीय स्टेट बैंक, सेंट्रल बैंक और यूटीआई की है।
भारत सरकार एलआईसी के दम पर कई डूबते हुए जहाजों को बचा रही है और ऐसे में लगता है कि किसी दिन एलआईसी के ही डूबने की खबर आ जाएगी। आईएल एंड एफएस के डूबने के चक्कर में देश के कई बैंकों पर भी आफत सी आ गई है और इसी वजह से बीजेपी सरकार पर उंगलियां उठ रही हैं।
अगर ऐसा ही चलता रहा तो पता नहीं देश के नेताओं की वजह से भारत को कब तक गरीब ही रहना पड़ेगा।
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