पुतिन अनिश्चिकाल तक राष्ट्राध्यक्ष रहने के खिलाफ; 21 साल से खुद कभी राष्ट्रपति तो कभी प्रधानमंत्री पद पर काबिज

मॉस्को. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शनिवार को कहाकि वे किसी भी नेता के असीमित समय तक राष्ट्रपति रहने के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा सिस्टम सोवियत यूनियन में हुआ करता था। पुतिन का यह बयान द्वितीय विश्वयुद्धके सैनिकों के साथ मुलाकात के दौरान आया। पुतिन खुद 21 साल से कभी देश के राष्ट्रपति तो कभी प्रधानमंत्री बने। 1999 में पुतिन प्रधानमंत्री बने थे।

पुतिन2000 में राष्ट्रपति बने। 8 साल तक यह पद संभालने के बाद वे 2008 से 2012 तक दोबारा प्रधानमंत्री बने। इसके बाद उन्होंने फिर राष्ट्रपति पद संभाला। उनका कार्यकाल अभी 2024 तक चलेगा। यानी 21वीं सदी के शुरुआती 24 में से 20 साल वे ही राष्ट्रपति रहेंगे।

पुतिन ने बुधवार को ही रूस के संविधान में बदलाव का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने राष्ट्र के नाम संदेश में ऐलान किया था कि देश में राजनीतिक ताकतों का बंटवारा ज्यादा बेहतर तरीके से किया जाएगा। यह शक्तियां राष्ट्रपति से लेकर संसद, राज्य परिषद और अन्य सरकारी संस्थानों को भी दी जाएंगी। इसके बाद से ही अंदाजा लगाया जा रहा है कि पुतिन राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहते हैं।

पूर्व सैनिक ने कहा- राष्ट्रपति बनने की सीमा नहीं होनी चाहिए, पुतिन बोले- यह गलत
पुतिन शनिवार को ही ‌‌‌दूसरे विश्व युद्ध का हिस्सा रहे पूर्व सैनिकों के कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां एक वेटरन ने कहा कि रूस में राष्ट्रपति पद पर रहने की कोई सीमा नहीं होनी चाहिए। हालांकि, इस पर पुतिन ने कहा, “यह ठीक नहीं। 1980 जैसी स्थिति में पहुंचना काफी परेशानी बढ़ाने वाला होगा,क्योंकि तब लोग अपने जीवन के आखिरीदिनों तक सत्ता में रहते थे।”

संविधान में बदलाव कर कैसे फायदा पा सकते हैं पुतिन?
पुतिन के संविधान में बदलाव के ऐलान के साथ ही रूस में प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव के नेतृत्व वाले कैबिनेट ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद पुतिन ने अपने करीबी और राजनीति में नए नाम मिखाइल वी. मिशुस्तिन को देश का प्रधानमंत्री बनाया। विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन राष्ट्रपति की ताकतें संसद और कैबिनेट को देना चाहते हैं। यानी वे सरकार को ज्यादा मजबूत बनाएंगे। इसके जरिए वे अगले कार्यकाल में राष्ट्रपति न रह कर प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

दरअसल, रूस में कोई भी व्यक्ति लगातार दो बार ही राष्ट्रपति रह सकता है। पुतिन 2000 से 2008 तक राष्ट्रपति रहे थे। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद लिया। 2012 में वे एक बार फिर राष्ट्रपति बने। पहले उन्होंने राष्ट्रपति के कार्यकाल की अवधि 4 साल से बढ़ाकर 6 साल की। 2018 में हुए चुनाव में दोबारा जीत हासिल करने के बाद उनका कार्यकाल 2024 तक तय हो गया। हालांकि, 2024 में उन्हें पद छोड़ना पड़ेगा। माना जा रहा है कि पुतिन सीधे तौर पर राष्ट्रपति पद का कार्यकाल असीमित नहीं करना चाहते, बल्कि सरकार को मजबूत कर प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं।



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पुतिन विश्व युद्ध-2 के 75वें साल पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
1942 में जर्मनी के सैनिक पहले रूस के लेनिनग्राद में ही घुसे थे।
यहां वे विश्व युद्ध-2 में लड़ने वाले पूर्व सैनिकों से भी मिले।
जर्मन सैनिक हार से पहले करीब 2.5 साल तक रूस में रहे थे।
पुतिन लेनिनग्राद में विश्व युद्ध-2 में मारे गए सैनिकों के परिजनों से भी मिले।
पुतिन ने प्रदर्शनी में मौजूद लोगों से बातचीत की।
कलाकारों ने विश्व युद्ध-2 के समय की जर्मनी की एक गली हूबहू बनाई।
आयोजनकर्ताओं ने पुतिन को बर्लिन स्ट्रीट का दौरा कराया।
पुतिन पूर्व राष्ट्रपति येल्तसिन की बेटी को जन्मदिन की बधाई देने उनके घर पहुंचे।


source https://www.bhaskar.com/international/news/russias-putin-says-he-opposes-unlimited-presidential-term-himself-is-president-prime-minister-from-17-years-126555404.html

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