अगले महीने जी2-बैठक में चीन के राष्ट्रपति से मिलेंगें मोदी
इस समय भारत दूसरे देशों के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करने में लगा है। भारत में चीन के राजदूत लुओ च्यहुई ने बीते सोमवार अपने बयान में कहा कि अगले महीने अर्जेंटीना में होने वाली जी20 बैठक से इतर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मुलाकात होगी। लुओ ने ये बयान दिल्ली में अफगान राजनयिकों के लिए आयोजित की गई संयुक्त भारत-चीन प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर दिया था।
लुओ ने कहा कि अफगानिस्तान पर चीन और भारत सहयोग की दिशा में ये कार्यक्रम पहला और अहम कदम होगा। भविष्य में भी दोनों देशों को इसका फायदा होगा। चीनी राजदूत का कहना है कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी इस साल नवंबर को जी20 बैठक में मुलाकात करेंगें। मोदी और शी इस साल दो अनौपचारिक मुलाकात भी कर चुके हैं।
इससे पहले दोनों जून में शंघाई कॉरपोरेशन ऑर्गेनाइजेशन की बैठक में वुहान में मिले थे और दूसरी बार दोनों दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान जुलाई में मिले थे। लुओ ने कहा कि चीन के स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री वांग यी दिसंबर में भारत की यात्रा पर आ सकते हैं।
इस मुलाकात से चीन और भारत के रिश्ते भी अच्छे होंगें। वैसे देखा जाए तो भारत अपने पड़ोसी और एशियाई देशों के साथ अपने मैत्री संबंध बनाने में लगा हुआ है। शायद मोदी जी चाहते हैं कि अगर कभी देश को कभी युद्ध करना पड़े या पाकिस्तान कभी सीमा का उल्लंघन करता है तो उसके मैत्री देश उसका साथ दें और उसे सहारा बनें।
क्या है जी 20 बैठक
जी 20 का मतलब 20 ग्रुप से है। इसमें दुनिया के 20 ताकतवर देश शामिल हैं और ये यूरोपीय यूनियन और 20 शक्तिशाली देशों का समूह है। इसकी स्थापना 1999 में 7 देशों में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, फ्रांस और इटली के विदेश मंत्रियों ने की थी। साल 2008 में आए आर्थिक संकट की वजह से इस फोरम की अगुवाई ग्रुप के देशों के शीर्ष नेताओं को सौंप दी गई थी। इस ग्रुप का दुनिया की 85 फीसदी इकोनॉमी और 75 फीसदी व्यापार पर कंट्रोल है। अमेरिका, रूस, कनाडा, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, चीन और भारत समेत 20 देश हर साल समिट में मिलते हैं और दुनिया की आर्थिक अवस्था के साथ-साथ और भी कई मुद्दों पर चर्चा करते हैं।
खैर, पीएम मोदी की ये सोच कुछ गलत नहीं है क्योंकि हर देश का प्रमुख नेता अपने देश की सुरक्षा के लिए कदम उठाता रहता है। ये बैठक भारत समेत सभी ताकतवर देशों के लिए बहुत फायदेमंद होगी।
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