क्या सच में सबरीमाला के भगवान ब्रहृमचारी थे?
केरल में स्थित सबरीमाला मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। ये भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। समुद्रतट से हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित सबरीमाला मंदिर मक्का मदीना के बाद दुनिया का सबसे बड़ा तीर्थस्थल माना जाता है। यहां हर साल करोड़ों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। मलयालम भाषा में शबरीमाला का अर्थ होता है पर्वत और चूंकि ये मंदिर एक पहाड़ पर स्थित है इसलिए इसका नाम सबरीमाला रखा गया है। सहयाद्रि पर्वतमाला से घिरे इस मंदिर तक पहुंचने के लिए पंपा से ही पैदल यात्रा करनी पड़ती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार 9 साल से अधिक उम्र की कन्याओं और महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं है। 9 साल की उम्र के बाद कन्याओं को माहवारी शुरु हो जाती है और इस वजह से मंदिर में इससे अधिक उम्र की महिलाओं का प्रवेश करना वर्जित है। 10 से 50 साल तक की उम्र की महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित है।
आइए जानते हैं सबरीमाला मंदिर से जुड़ी कुछ अनोखी और खास बातें :
· सबरीमाला मंदिर के कपाट सालभर भक्तों के लिए नहीं खुलते हैं। मलयालम पंचांग के अनुसार यह हर महीने के पहले पांच दिन खुलता है। इसके अलावा नवंबर मध्य से जनवरी मध्य के बीच वार्षिक उत्सव मंडलम और मकाराविलक्कु के दौरान खुलता है। मकर संक्रांति के अवसर पर मंदिर में भारी भीड़ देखने को मिलती है।
· प्राचीन मान्यता के अनुसार मंदिर में 9 साल से कम और 50 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को ही प्रवेश की अनुमति है। मंदिर में मासिक धर्म की आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। मान्यता है कि मंदिर के ईष्ट देव भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे और इस वजह से मंदिर में मासिक धर्म की आयु वाली महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं है। मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की परंपरा 1500 साल पुरानी है।
· इस मंदिर में भक्त सिर पर पोटली रखकर आते हैं और इस पोटली में भगवान को चढाई जाने वाली चीजें होती हैं। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति रुद्राक्ष या तुलसी की माला पहनकर व्रत रखकर और सिर पर नैवेद्य रखकर आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
· किवदंती है कि भगवान अयप्पा, शिव और देवी मोहिना की संतान हैं। इन्हें हरिहरपुत्र के नाम से भी जाना जाता है। भगवान अयप्पा को अयप्पन, शास्ता और मणिकांता के नाम से भी जाना जाता है। दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिरों में से एक सबरीमाला मंदिर है।
· मंदिर तक पहुंचने के लिए 18 पावन सीढियों को पार करना पड़ता है और इन्हें अलग-अलग तीर्थ के रूप में बताया गया है। पहली पांच सीढियों को इंसान की पांच इंद्रियों के रूप में देखा जाता है और इसके बाद ही 8 सीढियां मानवीय भावनाओं से जुड़ी हैं। इसके बाद आने वाली तीन सीढियों को मानवीय गुण और आखिरी दो को ज्ञान और अज्ञान का प्रतीक माना गया है।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश करने की अनुमति दी थी जिसे लेकर पूरे राज्य में विरोध चल रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इससे उनकी धार्मिक भावना आहत होती है।
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