सबरीमाला के लिए हिंसा करने वाले नहीं हैं श्रद्धालु : पुजारी

भारत के केरल राज्‍य में इस समय सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर अशांति का माहौल है। सुप्रीम कोर्ट ने सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए इस प्राचीन मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दे दी थी लेकिन लोगों ने कोर्ट के इस फैसले को स्‍वीकार नही किया और इस वजह से पूरे राज्‍य में विरोध प्रदर्शन शुरु हो गया। इस विरोध प्रदर्शन ने इतना भयंकर रूप ले लिया कि लोगों को आहत किया जाने लगा।

बुधवार को मंदिर के कपाट खुले जरूर लेकिन महिलाओं को अंदर जाने नहीं दिया गया। आज भी कई संगठनों ने राज्‍यव्‍यापी बंद का ऐलान कर दिया। सुरक्षा के लिहाज़ से प्रशासन की ओर से सन्‍नीधानम, पंबा, निलक्‍कल और ईलावंगुल में धारा 144 लगा दी गई है।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बुधवार की शाम को केरल के सबरीमाला मंदिर के कपाट खुलने थे लेकिन बुधवार की सुबह से ही मंदिर के बाहर हंगामा शुरु हो गया जिस वजह से महिलाओं को मंदर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। प्रदर्शनकारी इतना ज्‍यादा क्रूर हो गए कि उन्‍होंने मीडियाकर्मियों और महिलाओं को भी नहीं बख्‍शा। विरोध के दौरान प्रदर्शन कर रहे लोग इतने ज्‍यादा हिंसक हो गए कि उन्‍होंने रिपोर्टरों पर ही हमला कर दिया और उनकी गाडियां भी तोड़ दीं।

क्‍या था सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सूत्रों की मानें तो सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं को मंदिर में जाने के प्रतिबंध को गलत ठहराते हुए उन्‍हें प्रवेश की अनुमति दी थी। हालांकि, इस फैसले के बाद खुद महिलाओं ने भी आपत्ति जताई थी। उनका मानना था कि इस तरह सदियों पुरानी रीतियों का हनन हो जाएगा।

कोर्ट की हुई अवमानना

जैसा कि हमने आपको बताया कि कोर्ट के आदेश अनुसार बुधवार की शाम यानि 17 अक्‍टूबर, 2018 को सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश करना था लेकिन इससे पहले ही सुबह प्रदर्शनकारियों ने मंदिर को घेर लिया जिस वजह से महिलाएं मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाईं। इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना कहा जा सकता है।

सबरीमाला मंदिर के पुजारी के विचार

इस मामले में केरल के प्रसिद्ध मंदिर सबरीमाला के प्रमुख पुजारी केंदारू राजीवरू का कहला है कि फिलहाल स्थिति भयानक बनी हुई है। लोग कोर्ट के आदेश से भड़के हुए हैं और श्रद्धालु निराश हैं। उन्‍होंने श्रद्धालुओं से विनती करते हुए कहा कि सबरीमाला मंदिर की प्रक्रिया और व्‍यवस्‍था को बनाए रखें। मैं हिंसा का समर्थन नहीं करता हूं। उन्‍होंने आगे कहा कि कोर्ट की सोच सिर्फ कानून तक ही सीमित है, उसे परंपराओं और रीतियों की कोई चिंता नहीं है लेकिन हमारे देश की जनता परंपराओं पर जीती है। सबरीमाला मंदिर की परंपरा को तोड़ना बहुत मुश्किल है।

इससे पहले महाराष्‍ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर महिलाओं ने प्रदर्शन किया था। महिलाओं की मांग पर कोर्ट ने इस मंदिर में प्रवेश की अनुमति दे दी थी और उस समय प्रवेश के दौरान किसी भी तरह का कोई दंगा या विरोध नहीं हुआ था और विरोधियों ने अपने विरोध को प्रकट करने के लिए हिंसा का सहारा भी नहीं लिया था।

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