अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहला स्वतंत्रता दिवस, राज्यपाल मलिक बोले- आपकी पहचान दांव पर नहीं
आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:
श्रीनगर (शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम से उपमिता वाजपेयी). स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने गुरुवार को कहा कि राज्य के लोगों की पहचान दांव पर नहीं है और न ही इससे कोई छेड़छाड़ की जा रही है। इसलिए उन्हें अपनी पहचान को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। संविधान क्षेत्रीय पहचान को पनपने और समृद्ध करने की अनुमति देता है। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद स्वतंत्रता दिवस का यह पहला समारोह था। इस बार कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल भी मौजूद थे।
इस बार के समारोह में पहली बार बीएसएफ की टुकड़ी की महिला सैनिक ने अगुआई की। सर्वश्रेष्ठ टुकड़ी का अवॉर्ड भी बीएसएफ को दिया गया।
'कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध'
मलिक ने कहा, "कश्मीरी पंडितों के बिना कश्मीर अधूरा है। प्रशासन उनके कश्मीर में घर वापसी और पुनर्वास को लेकर प्रतिबद्ध है। यह कश्मीर के सभी हितधारकों के सहयोग और समर्थन से ही संभव हैं जिसमें घाटी के लोग भी शामिल हैं जो कश्मीरी पंडितों के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक तौर पर बंधे हुए हैं।"
मलिक ने अमरनाथ यात्रा के दौरान प्रशासन की मदद करने के लिए लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा, "पवित्र गुफा के दर्शन के लिए तीन लाख से ज्यादा श्रद्धालु यहां पहुंचे। हज और अमरनाथ यात्रा का आयोजन बहुत ही शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, जो कश्मीरियत का सच्चा उदाहरण है। इससे यह दिखता है कि उनके बीच सांप्रदायिक सौहार्द कितना घनिष्ठ है।''
'सुरक्षाबलों के कारण आतंकियों की कमर टूटी'
राज्यपाल ने जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा, "यह केवल हमारे सुरक्षाबलों की वीरता और साहस है, जिसके कारण आतंकवाद की कमर टूटी। हाल के दिनों में आतंकवाद और पथराव की घटनाओं में कमी आई।
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