कश्मीर को केंद्र से 56 साल में 51 हजार करोड़ रु. मिले, स्वास्थ्य, पढ़ाई और रोजगार में पिछड़ा; 5वां सबसे भ्रष्ट राज्य
आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:
भास्कर नेटवर्क.केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधान बदल दिए हैं और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया है। इसके अलावा अनुच्छेद-35ए को भी खत्म कर दिया है। ऐसे में बहस छिड़ी है कि इससे जम्मू-कश्मीर की सूरत कितनी बदलेगी? इसे क्या फायदा या नुकसान होगा?
जहां तक केंद्र से मदद का सवाल है तो 1951 से 1956 तक की पहली पंचवर्षीय योजना से लेकर 2007 से 2012 की योजना तक व देश में 57 लाख करोड़ रुपए खर्च हुए हैं, इनमें से 51 हजार करोड़ रुपए अकेले जम्मू-कश्मीर पर खर्च किए गएयानी पूरे देश पर होने वाले खर्च का करीब 1%। जम्मू व कश्मीर, छत्तीसगढ़ और असम देश के तीन ऐसे राज्य हैं जहां पीएम उज्ज्वला योजना को सर्वाधिक सफलता से लागू किया गया है।
इसके बावजूद हालात यह है कि राज्य शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी मामलों में पिछड़ा हुआ है, इसके साथ ही देश का पांचवां सबसे भ्रष्ट राज्य भी है। अन्य मामलों की बात करें, तो पीने के लिए साफ पानी की उपलब्धता के मामले में जम्मू-कश्मीर देश में 19वें नंबर पर है। यहां 77% घरों में ही यह उपलब्ध है, जबकि देश में औसतन 85.5% घरों तक पीने का साफ पानी पहुंच चुका है। यहां के वर्कफोर्स में सिर्फ 14% महिलाएं शामिल हैं।
पंजाब से 4 गुना बड़ा, पर इकोनॉमी के मामले में उससे 3 गुना पीछे
जम्मू-कश्मीर क्षेत्रफल में अपने पड़ोसी राज्य पंजाब से करीब 4 गुना बड़ा है, लेकिन अर्थव्यवस्था के मामले में यह पंजाब का एक तिहाई भी नहीं है।पंजाब की अर्थव्यवस्था करीब 5.18 लाख करोड़ रुपए की है, जबकि जम्मू-कश्मीर की 1.7 लाख करोड़ रुपए की है। हालांकि इसके पीछे उपजाऊ जमीन, खेती से लेकर कई कारण हो सकते हैं। ऐसे में जानते हैं कि 370 के दौर का जम्मू-कश्मीर विकास के सामाजिक-आर्थिक पैमानों पर बाकी देश की तुलना में कहां खड़ा है?
सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए जरूरी 15 मापदंडों पर देखिए कश्मीर कहां खड़ा है?
1. शिक्षा- कितना पढ़ा-लिखा है?
यहां साक्षरता 69%, राष्ट्रीय औसत से करीब 5% कम :2011 की जनगणना के मुताबिक जम्मू-कश्मीर की 68.74%आबादी साक्षर है। इनमें पुरुष साक्षरता 76.75 फीसदी जबकि महिला साक्षरता की दर 56.43 फीसदी है। इस मामले में यह 30वें नंबर पर है और सिर्फ बिहार, झारखंड, राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से आगे है। भारत की साक्षरता दर 74% है।
2. स्वास्थ्य सेवाएं अच्छी होंगी?
2700 लोगों पर 1 अस्पताल और 3 डॉक्टर उपलब्ध:जम्मू-कश्मीर में 2016-17 तक के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2769 लोगों पर एक अस्पताल और प्रति एक हजार लोगों पर एक डॉक्टर, हकीम, वैद्य और नर्स उपलब्ध हैं। अस्पताल में प्रति 855 लोगों पर एक बिस्तर भी है।
3. औसत जीवनकाल कितना है?
72.6 है यहां की औसत उम्र, देश की तुलना में 4.7 ज्यादा:राज्य में जीवन प्रत्याशा दर यानी एक व्यक्ति का औसत जीवन काल 72.6 वर्ष है। इस मामले में सिर्फ केरल(74.9) और दिल्ली(73.2) ही इससे आगे हैं। 2010-14 के बीच यहां जीवन प्रत्याशा दर 67.9 थी। संयुक्त राष्ट्र की मानव विकास इंडेक्स रिपोर्ट के मुताबिक भारत में जीवन प्रत्याशा दर 67.9 वर्ष है।
4. बेरोजगारी कितनी हैं?
17.4% के पास काम नहीं:यूपी और बिहार से ज्यादा बेरोजगारी। 15-49 की उम्र के 17% लोग बेरोजगार हैं। सीएमआईई के मुताबिक राज्य में बेरोजगारी दर 17.4% है, जबकि राष्ट्रीय औसत 7.51% है। 2011 में कुल आबादी के 34% लोग वर्कफोर्स में थे।
5. घर-जमीन कितने लोगों के पास है?
0.15% आबादी बेघर है, तीन लाख से ज्यादा घर खाली पड़े:राज्य में 14.49 लाख लोग जमीन के मालिक हैं। इनमें करीब 63 फीसदी के पास आधा हेक्टेयर से भी कम जमीन है। चौकाने वाली बात यह है कि सिर्फ 95 लोग ऐसे हैं जिनके पास 20 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन है। इसके अलावा राज्य में 30 लाख से ज्यादा घर भी हैं जिनमें से करीब 3 लाख खाली पड़े हैं। राज्य में सिर्फ 0.15% आबादी बेघर है। एक परिवार में सदस्यों के मामले में जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश देश भर में अव्वल हैं। यहां एक परिवार में औसतन 5 से ज्यादा सदस्य हैं।
6. गवर्नेंस की क्या स्थिति है?
21 राज्यों में सबसे बुरी स्थिति:गुड गवर्नेंस यानी सुशासन के मामले में जम्मू-कश्मीर देश के 21 राज्यों में आखिरी पायदान पर है। इसकी वजह यहां बदलते राजनीतिक, सामाजिक हालात भी हैं। गुड गवर्नेंस के मामले में राजस्थान पहले, गुजरात दूसरे, महाराष्ट्र तीसरे, कर्नाटक चौथे और मध्यप्रदेश पांचवें नंबर पर है।
7. शिशु मृत्यु दर की क्या स्थिति है?
हजार बच्चे जन्मते हैं, इनमें से 24 की मौत हो जाती है:यह स्थिति जम्मू कश्मीर में काफी सुधरी है और तीन साल में यह 37 से घटकर 24 हो गई है। जबकि राष्ट्रीय औसत 34 है।
| वर्ष | 2016 | 2015 | 2014 | 2013 | 2011 |
| जम्मू-कश्मीर | 24 | 26 | 34 | 37 | 39 |
| भारत | 34 | 37 | 39 | 40 | 42 |
बच्चों के जन्म के रजिस्ट्रेशन के मामलों में जम्मू-कश्मीर 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 28वें नंबर पर है। यहां जन्म लेने वाले 100 बच्चों में से सिर्फ 77 का रजिस्ट्रेशन हो पाता है। हालांकि 86% बच्चों का जन्म डॉक्टर-नर्स की देखरेख में अस्पताल में होता है।
8. गरीबी रेखा से नीचे कितने?
10.4% बीपीएल, देश के मुकाबले 11% कम गरीबी:जम्मू-कश्मीर की 10.4 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे है। सिर्फ 7 राज्यों में गरीबी रेखा 11% से नीचे है, यह सातवें स्थान पर है। देश में 22% आबादी गरीबी रेखा से नीचे है। छत्तीसगढ़ इस मामले में सबसे पिछड़ा है। वहां देश में सबसे ज्यादा 40 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे है।
9. कारोबार कितना आसान?
देश में 22 वें पायदान पर:ईज ऑफ डूइंग बिजनेस यानी कारोबार के लिए आसानी के मामले में जम्मू-कश्मीर देश में 22वें पायदान पर है। अनुच्छेद 370 में बदलाव और 35ए खत्म होने के बाद नए उद्योग और विकास के अन्य काम होने पर रैंकिंग में सुधार की उम्मीद है।
10. एयरपोर्ट कितने हैं?
2 घरेलू , 1 अंतरराष्ट्रीय:राज्य में 4 एयरपोर्ट हैं। जम्मू और लेह घरेलू, श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय है। जबकि करगिल सिर्फ सेना के लिए है।
11. उच्च शिक्षा की स्थिति?
8 यूनिवर्सिटी, 2 केंद्रीय हैं:जम्मू-कश्मीर में कुल मिलाकर 8 यूनिवर्सिटी और 54 सरकारी कॉलेज हैं। इनमें जम्मू और श्रीनगर में केंद्रीय विश्वविद्यालय है।
12. आतंकवाद की स्थिति?
31 साल में 47,234 घटनाएं:पिछले 31 सालों में 47,234 आतंकी घटनाएं हुईं। इनमें 14,903 नागरिकोंकी मौत हुई और 23,745 आतंकी मारे गए। हालांकि 6,524 सुरक्षाकर्मी भी शहीद हुए।
13. अपराधों की क्या स्थिति है?
कुल अपराधों में 1% से भी कम हिस्सेदारी, 20वें नंबर पर:अपराधों के मामले में जम्मू-कश्मीर देश में 20वें नंबर पर है। हालांकि देश में 2016 तक दर्ज कुल अपराधों में इसकी हिस्सेदारी 0.8% से भी कम है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के 2016 तक के आंकड़ों के मुताबिक यहां प्रति एक लाख लोगों पर 206 अपराध दर्ज किए गए हैं। देश में यह आंकड़ा 379 है। देश में 2016 में भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी के तहत 48,31,515 अपराध दर्ज किए गए। इस दौरान जम्मू-कश्मीर में कुल 24,501 अपराध दर्ज हुए।
14. भ्रष्टाचार कितना है?
देश में 5वें नंबर पर, 44% लोगों को रिश्वत देनी पड़ी:सीएमएस-इंडिया करप्शन स्टडी 2017 के मुताबिक जम्मू-कश्मीर भ्रष्टाचार में देश में 5वें नंबर पर है। राज्य के 44% लोगों ने माना कि उन्हें सरकारी दफ्तरों में काम करवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ी। इसमें आंध्र (74%) पहले नंबर पर था। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के करप्शन परसेप्शन इंडेक्स में भारत 175 देशों में 78वें नंबर पर है। हालांकि देश में भ्रष्टाचार घटा है।
15. लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति?
तमिलनाडु और बिहार समेत सिर्फ 3 राज्यों से बेहतर:जम्मू-कश्मीर में कानून और व्यवस्था की स्थिति बनती-बिगड़ती रहती है। इंडिया टुडे के स्टेट ऑफ द स्टेट्स सर्वे 2018 के मुताबिक खराब लॉ एंड ऑर्डर के मामले में जम्मू-कश्मीर देश भर में चौथे नंबर पर है और सिर्फ तमिलनाडु, बिहार और केरल से बेहतर है। भाजपा-पीडीपी गठबंधन टूटने के बाद यहां अब राष्ट्रपति शासन है।
स्रोत- नीति आयोग, जनगणना-2011,राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे, सीएमआईई।
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