इसरो ने भारतीयों से पूछा- आप चांद पर क्या ले जाएंगे? जवाब आए- मातृभूमि की मिट्टी, तिरंगा
आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:
नई दिल्ली. भारत अब चंद्रमा पर अपने दूसरे मिशन को लेकर तैयार है। 15 जुलाई को चंद्रयान 2 लॉन्च होगा। इससे पहले इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) ने ट्विटर पर एक क्विज आयोजित की। इसमें पूछा गया कि आप चांद पर अपने साथ क्या लेकर जाना चाहेंगे? कई लोगों नेजवाब भी दिए। ज्यादातर ने जवाब दिया- तिरंगा।
कुछ यूजर्स ने कहा- भारत का नक्शा, भोजन और ऑक्सीजन के साथ कुछ जरूरी चीजें चांद पर ले जाना चाहेंगे। कुछ ने कहा- बरगद का पेड़ तो कुछ बोले मातृभूमि की मिट्टी और बच्चों के सपने। कुछ यूजर्स ने कहा- हम स्कूप ले जाना चाहेंगे ताकि चांद से पानी वापस ला सकें।
Here are some popular answers from our #MoonEssentials quiz — sent in by Ganesh Gns (Visakhapatnam), Chiranjit Bhattacharjee (Kolkata), and @shaltiwari (Mumbai). A special shout out to Shalini for thinking of our scientists too. pic.twitter.com/suYmOLxd33
— ISRO (@isro) July 10, 2019
Our future Moon travellers have responded — and how! A few interesting answers are by @siddhant_shenoy, Hyderabad, @ivigneshwar, Hyderabad, and Dev Ghosh, Kolkata. We're especially happy to see that the Indian flag is the most common #MoonEssential in everyone's list. pic.twitter.com/2wLKhbfidB
— ISRO (@isro) July 9, 2019
Here are some #MoonEssentials that our followers — Paras Garg (Uttar Pradesh), Ganesh Ji (Allahabad), and @md_safi_shamsi— would take with them on their lunar journey. Kudos to Mohammed who aims to be the first astronaut to fly a drone on the Moon! pic.twitter.com/DjRjJmoTeb
— ISRO (@isro) July 11, 2019
चंद्रयान-1 दस साल पहले लॉन्च हुआ
चंद्रयान-2 श्रीहरिकोटा (आंध्रप्रदेश) में सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा। जीएसएलवी एमके-थ्री के जरिए चांद के साउथ पोलर रीजन में जाएगा। चंद्रयान-1 मिशन दस साल पहले लॉन्च किया गया था। चंद्रयान-2 इसका एडवांस वर्जन है।
नई पीढ़ी को प्रोत्साहित करने का प्रयास- इसरो
इसरो ने कहा- चंद्रयान-2 एक प्रयास है, अंतरिक्ष की समझ को और बढ़ाने के साथ-साथ वैज्ञानिकों की नई पीढ़ी को प्रोत्साहित करने का। इसके जरिए हमारी कोशिश स्पेस मिशन को गहराई से समझने के लिए तैयार की गई तकनीक को टेस्ट करने का प्रदर्शन भी है।
मिशन पर खर्च होंगे 603 करोड़ रुपए
चंद्रयान-2 को जीएसएलवी एमके-3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। 380 क्विंटल वजनी स्पेसक्राफ्ट में 3 मॉड्यूल ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) होंगे। ऑर्बिटर में 8, लैंडर में 3 और रोवर में 2 यानी कुल 13 पेलोड होंगे। पूरे चंद्रयान-2 मिशन में 603 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। जीएसएलवी की कीमत 375 करोड़ रु. है।
बाहुबली रॉकेट है जीएसएलवी एमके-3
जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल एमके-3 करीब 6000 क्विंटल वजनी रॉकेट है। यह पूरी तरह लोडेड करीब 5 बोइंग जंबो जेट के बराबर है। यह अंतरिक्ष में काफी वजन ले जाने में सक्षम है। लिहाजा इसे बाहुबली रॉकेट भी कहा जा रहा है।
तीनों मॉड्यूल कई प्रयोग करेंगे
इसरो के मुताबिक- ऑर्बिटर अपने पेलोड के साथ चांद का चक्कर लगाएगा। लैंडर चंद्रमा पर उतरेगा और वह रोवर को स्थापित करेगा। ऑर्बिटर और लैंडर मॉड्यूल जुड़े रहेंगे। रोवर, लैंडर के अंदर रहेगा। रोवर एक चलने वाला उपकरण रहेगा जो चांद की सतह पर प्रयोग करेगा। लैंडर और ऑर्बिटर भी प्रयोगों में इस्तेमाल होंगे।
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