पीयूष गोयल ने कहा- रेलवे के निजीकरण का सवाल ही नहीं उठता
आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:
नई दिल्ली. सरकार ने शुक्रवार को संसद में यह स्पष्ट किया कि हमारी योजना पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा देना है। लेकिन, किसी भी स्थिति में सरकारी संस्थानों का निजीकरण नहीं किया जाएगा। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा- रेलवे का निजीकरण नहीं किया जा सकता है। ऐसे में यह सवाल ही नहीं उठता है।
गोयल ने कहा- सच्चाई यह है कि यदि हम रेलवे की सुविधाओं में सुधार चाहते हैं तो उसके लिए पूंजी की आवश्यकता है। हमें इसकी पूंजी क्षमता बढ़ाना होगी। पीपीपी मॉडल को अनेक प्रोजेक्ट्स में लागू किया जाएगा। कुछ यूनिट्स जरूर कॉर्पोरेट के हवाले की जाएंगीमगर कांग्रेस इस पर घड़ियाली आंसू बहा रही है। यह तो उनके समय से शुरू हो गया था।
'पीपीपी तर्ज पर शुरू होंगे कुछ प्रोजेक्ट'
गोयल ने बताया- सुविधाएं बढ़ाने के लिए हमें निवेश की जरूरत होगी।हम निर्णय ले चुके हैं कि कुछ प्रोजेक्ट्स में पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप को शामिल करेंगे। कुछ यूनिट्स का कॉर्पोरेटाइजेशन भी होगा।राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए हम कुछ नए ट्रैक्स लाने के लिए नए प्रोजेक्ट्स शुरू करेंगे। इसके लिए हम निवेश आमंत्रित करेंगे।
'पहले रेलवे बजट राजनीतिक लाभ का जरिया था'
गोयल ने कहा- पहले के समय में रेलवे बजट का इस्तेमाल पूरी तरह से राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता था। यह ऐसा बजट था, जो न सिर्फ राजनीतिक कारणों से बनता था, बल्कि उसका उद्देश्य भी देश और सांसदों को गुमराह करना होता था।सैकड़ों ट्रैनों और ट्रैक्स की घोषणा सिर्फ चुनाव जीतने के लिए कर दी जाती थी।
'मोदी ने विजन दिया'
गोयल के मुताबिक- प्रधानमंत्री मोदी ने अलग रेलवे बजट को खत्म किया। उन्होंने रेलवे को नया विजन और मिशन दिया। यूपीए के शासनकाल में रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्ट्री में एक भी कोच का उत्पादन नहीं हुआ। मगर भाजपा के सत्ता में आने के बाद अगस्त 2014 में पहला कोच बना।
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