रक्षा मंत्री ने कहा- हम एशिया में जल्द मिसाइल तैनात करना चाहते हैं, इसमें चीन को कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए

आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:

सिडनी. अमेरिका ने कहा कि वह एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए न्यू इंटरमीडिएट रेंज की मिसाइल की तैनाती तुरंत करना चाहता है। अमेरिकाइंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज (आईएनएफ) संधि से शुक्रवार को औपचारिक तौर पर बाहर आ गया। रक्षा मंत्री मार्क एस्परनेएशिया में मिसाइल की तैनाती करने के सवाल पर शनिवार को कहा- हां, वह वहां मिसाइल की तैनाती करना चाहते हैं और इस पर चीन को कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।हालांकि उन्होंनेयह नहीं बताया कि मिसाइल की तैनाती कहां होगी।

मार्क एस्पर फिलहाल एशिया के लंबे दौरे पर हैं। उन्होंने सिडनी में एक विमान में कहा, "हम बाद में नहीं बल्कि जितनी जल्दी हो अपना मिसाइल तैनात करना चाहते हैं। मैं मिसाइल तैनाती को इसी महीने प्राथमिकता देना चाहूंगा लेकिन ऐसी चीजें आपकी अपेक्षा से अधिक समय लेती है। मैं अटकलें नहीं लगाऊंगा क्योंकि ये चीजें योजनाओं पर निर्भर करती हैं। ये ऐसी चीजें हैं जो आप हमेशा अपने सहयोगियों से ही चर्चा करते हैं।"

हम ऐसी क्षमता रखते हैं: एस्पर

उन्होेंने कहा, "चीन को अमेरिका की इस योजना पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए क्योंकि हम पिछले कुछ समय से इस बारे में बात कर रहे हैं और मैं यह कहना चाहता हूं कि मिसाइल की तैनाती में 80 प्रतिशत हिस्सा आईएनएफ रेंज सिस्टम की है। इसलिए यह आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि हम इस प्रकार की क्षमता रखते हैं।"

1987 में हुआ था अमेरिका और सोवियत संघ के बीचसंधि

अमेरिका आईएनएफ ट्रिटी से शुक्रवार को औपचारिक तौर पर बाहर आ गया था। हालांकि उसने इस संधि से बाहर आने की घोषणा फरवरी में यह कहते हुए की थी कि रूस लंबे समय से इसके नियमों का उल्लंघन कर रहा है। इस संधि पर 1987 में अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और सोवियत संघ के नेता मिखाइल गोर्वाचोव ने हस्ताक्षर किए थे। यह दोनों देशों के परम्परागत और न्यूक्लियर मिसाइलों के इस्तेमाल को सीमित करता है। संधि से बाहर आने के बाद अमेरिका अब क्षेत्र में मिसाइल की तैनाती को लेकर स्वतंत्र हो गया है।

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मार्क एस्पर की फाइल फोटो

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