Pulwama attack: जवान नसीर अहमद ने एक दिन पहले ही मनाया था अपना जन्मदिन, अगले दिन ही पुलवामा हमले में हो गए शहीद, कश्मीर बाढ़ में बचाई थीं दर्जनों जानें
नेशनल डेस्क. पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए 40 जवानों में जम्मू-कश्मीर के राजौरी के रहने वाले नसीर अहमद भी शामिल हैं। 47 साल के हेड कॉन्स्टेबल नसीर अहमद अपने पीछे पत्नी शाजिया कौसर और आठ साल और छह साल के बच्चे छोड़ गए हैं। दुर्भाग्य की बात ये है 13 फरवरी को नसीर ने 46वां जन्मदिन मनाया था और अगले दिन वो हमले में शहीद हो गए। उनके पड़ोसी ने बताया कि नसीर रिटायरमेंट के बाद गांव डोदासन बाला में ही बसने की प्लानिंग कर रहे थे। नसीर अहमद ने 2014 में कश्मीर में आई भीषण बाढ़ से दर्जनों लोगों की जान बचाई थी। नसीर के बड़े भाई सिराज दीन जम्मू-कश्मीर पुलिस में है और फिलहाल जम्मू में तैनात हैं और उन्होंने ही पिता की मौत के बाद नसीर अहमद को पाल-पोस कर बड़ा किया था।
पिता ने कहा था- छोटे को ठीक से रखना
- नसीर अहमद के बड़े भाई सिराज दीनने बताया कि पिता ने मरते वक्त उसका हाथ मेरे हाथ में देते हुए कहा था कि उसे अच्छी तरह से रखना था। उसको मैंने ही पाला था। गुरुवार शाम को वो जम्मू में थे, तब उन्हें भाई के शहीद होने की खबर मिली थी।
- नसीर के भतीजे ने बताया कि गुरुवार दोपहर तीन बजे जम्मू से निकले थे। उन्हें काफिले का कमांडेंट बनाकर भेजा गया था। फिर अचानक खबर आने लगी कि 10 शहीद हो गए, कोई बोला 15 हो गए। आखिर में खबर आई कि हमारे अंकल भी इसी में थे।
सरकार के रवैये पर फूटा गुस्सा
- सरकार कश्मीर में मिलिटेंसी को खत्म करने के लिए कुछ भी नहीं कर रही है। क्यों लोगों का खून बहाया जा रहा है। हमारे पूरे हिंदुस्तान में आज मातम छाया हुआ है। हमें फख्र जरूर है कि हमारे अंकल शहीद हुए, देश की खातिर चले गए। लेकिन क्या इसी तरह मिलिटेंट हमारे जवानों को काटते रहेंगे।
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