मानवाधिकार आयोग में पाक की कश्मीर के ध्रुवीकरण और राजनीतिकरण की कोशिशें नाकाम: भारत
आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:
नई दिल्ली. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (यूएनएचआरसी) में पाकिस्तान की कश्मीर पर राजनीति और ध्रुवीकरण की कोशिशें नाकाम हो गईं। भारत के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि पाक को समझना होगा कि किसी झूठ को चार-पांच बार दोहराने से वो सच में नहीं बदलता।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि यूएनएचआरसी में पाक की कश्मीर मुद्दे को उठाने की कोशिश को अस्वीकार कर दिया गया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय आतंक को पालने और उसका समर्थन करने वाले पाकिस्तान की भूमिका से परिचित है।
मानवाधिकार आयोग के प्रमुख से मिला भारतीय डेलिगेशन
भारत का एक डेलिगेशन गुरुवार को यूएन मानवाधिकार आयोग की उच्चायुक्त मिशेल बैशलेट से मिला। विदेश सचिव (ईस्ट) विजय ठाकुर सिंह के नेतृत्व में डेलिगेशन ने मिशेल को कश्मीर की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया। यह मुलाकात स्थानीय समयानुसार दोपहर 3 बजे हुई। दरअसल, मिशेल ने सोमवार को कश्मीर के हालात पर चिंता जताई थी। इसी को लेकर डेलिगेशन ने उन्हें कश्मीर पर लगे प्रतिबंधों में ढील की जानकारी दी।
पाक ने कहा था- धरती की सबसे बड़ी जेल में बदला कश्मीर
पाकिस्तान के विदेश मंंत्री शाह महमूद कुरैशी ने यूएनएचआरसी के सामने कहा था कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर धरती की सबसे बड़ी जेल बन गया है। कुरैशी ने कहा था कि भारत के राज्य कश्मीर में मानवाधिकारों को कुचला जा रहा है। इसलिए वो अंतरराष्ट्रीय मीडिया को वहां नहीं जाने देता।
भारत ने पाक को बताया आतंक का केंद्र
इस पर विजय ठाकुर सिंह ने पलटवार करते हुए यूएन में कहा था कि एक डेलिगेशन यहां सीधे झूठी बातें कह रहा है। दुनिया जानती है कि यह बातें ऐसे आतंक के केंद्र से आ रही हैं जो लंबे समय से आतंकियों का पनाहगाह रहा है। यह देश वैकल्पिक डिप्लोमेसी के तौर पर क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म का इस्तेमाल करता रहा है। भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के जिम्मेदार देश के तौर पर भारत मानवाधिकार की सुरक्षा में विश्वास रखता है।
सिंह ने आयोग के सामने कहा था कि हमारी सरकार कश्मीर में आगे बढ़ने वाली नीतियों को लागू कर के सामाजिक, आर्थिक बराबरी और न्याय के लिए सकारात्मक कार्रवाई में जुटी है। हमारे यहां आजाद न्यायालय और आजाद मीडिया मानवाधिकार की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कश्मीर को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए कहा था कि भारत किसी देश का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगा।
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