नीतीश ने महागठबंधन में लौटने के लिए 5 बार प्रशांत किशोर को दूत बनाकर भेजा था
आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:
पटना.राजद प्रमुख लालू प्रसादयादव चारा घोटाले के मामले में सजा काट रहे हैं। लेकिन इन दिनों उन पर लिखी गई किताब 'गोपालगंज टू रायसीना: माय पॉलिटिकल जर्नी' को लेकर राजनीतिक गलियारे में चर्चा है। किताब में लालू ने दावा किया है कि नीतीश कुमार बिहार में एनडीए के साथ सरकार बनाने के बाद छह महीने बाद महागठबंधन में लौटना चाहते थे। इसके लिए नीतीश ने पांच बार प्रशांत किशोर को दूत बनाकर भेजा था।
लालू ने लिखा है कि 2015 का चुनाव हमने मिलकर लड़ा था। नीतीश पर मेरा भरोसा पूरी तरह से उठ चुका है। देशभर में पार्टियां भाजपा के खिलाफ एकजुट हो गईं। ऐसे में अगर मैं प्रशांत का ऑफर स्वीकार करता तो जनता कैसे प्रतिक्रिया देती।
प्रशांत किशोर ने लालू का दावा खारिज किया
जदयू केराष्ट्रीय उपाध्यक्षप्रशांत किशोर ने लालू के इस दावे को फर्जी बताया है। प्रशांत ने ट्वीट किया- ''लालू का दावा झूठा है। यह अच्छे दिन देख चुके एक नेता की प्रासंगिक बने रहने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं। जदयूमें शामिल होने से पहले लालू से मेरी कई मुलाकातहुईं। अगर मुझे यह बताने को कहा जाए कि इस दौरान क्याचर्चा हुई तो लालू काफी शर्मिंदा होंगे।''
नीतीश कभी भ्रष्टाचार से समझौता नहीं करेंगे: त्यागी
जदयू महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि नीतीश कुमार भ्रष्टाचार से समझौता करने वाले नेता नहीं हैं। किसके साथ जाना है, यह पार्टी की आंतरिक बैठकों में तय किया जाता है। लालू के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने भी कहा है कि नीतीश कुमार ने कई बार गठबंधन में लौटने की कोशिश की, लेकिन हम तैयार नहीं थे।
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