बौद्ध भिक्षु की मौत के बाद लोगों ने 9 महीने में 55 लाख रु. जुटाए, जश्न मनाकर किया अंतिम संस्कार
आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:
यांगोन. म्यांमार में मुडोन शहर में इस हफ्ते एक बौद्ध भिक्षु के हजारों समर्थक जश्न मनाते नजर आए। हालांकि, मौका किसी त्योहार या उत्सव का नहीं बल्कि भिक्षु एबट काय लार था के अंतिम संस्कार का था। दरअसल, काय की पिछले साल जुलाई में 48 साल की उम्र में ल्यूकेमिया से मौत हो गई थी। इसके बाद उनके भक्तों ने सामान्य प्रक्रिया के बजाय आलीशान तरीके से अंतिम संस्कार का फैसला किया और महज 9 महीने में 80 हजार डॉलर (55 लाख रुपए) जुटा लिए।
म्यांमार आर्थिक तौर पर कमजोर देशों में गिना जाता है। यहां हर तीसरा व्यक्ति गरीबी में जीने के लिए मजबूर है। इसके बावजूद एक मृत भिक्षु के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाने पर कई लोगों ने आश्चर्य जताया है। हालांकि, म्यांमार जैसे देश में बौद्ध भिक्षुओं का काफी सम्मान होता है, क्योंकि वह बच्चों की पढ़ाई से लेकर, स्थानीय झगड़े सुलझाने और बुनियादी सेवाओं के लिए पैसे जुटाने तक का काम करते हैं।
आलीशान तरीके से सजाया गया मंडोन
एबट के अंतिम संस्कार के लिए मंडोन को आलीशान तरीके से सजाया गया था। उनके भक्तों ने भी इस मौके पर अंतिम संस्कार की जगह पर भारी खर्च से मंजिलों ऊंचा पैलेस खड़ा किया। इसे शानदार लाइटिंग से सजाया गया था। इसके अलावा आतिशबाजी के साथ महिलाओं के नृत्य का भी आयोजन किया गया था। बौद्ध धर्म में मान्यता है कि अच्छा सजा पैलेस मृतकों के लिए स्वर्ग की तरह होता है। 50 साल के स्थानीय भिक्षु काय थु वार ने बताया कि यह किसी साधारण व्यक्ति की नहीं बल्कि एक हीरो की मौत थी।
भिक्षुओं के प्रति समर्पित म्यांमार की जनता
सात दिन तक चलने वाले अंतिम संस्कार में काय के शव के दर्शन के लिए हजारों लोग पहुंचे। आमतौर पर म्यांमार में इस तरह के नजारे कम ही देखने को मिलते हैं, लेकिन कुछ जगहों पर भिक्षुओं के सम्मान के लिए लोग हर तरह से समर्पित रहते हैं। पिछले साल नवंबर में यहां के केरेन स्टेट में एक भिक्षु के अंतिम संस्कार में तो करीब 6 लाख डॉलर (करीब 4.14 करोड़ रुपए) खर्च किए गए थे।
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