राजीव गांधी से लेकर ‘हुआ तो हुआ’ का 169 सीटों पर असर, इनमें से भाजपा ने 117 सीटें जीतीं

आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:

नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी ने 2017 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कहा था कि जहां कब्रिस्तान बनता है, वहां श्मशान भी बनना चाहिए। उनके इस बयान का भाजपा को 105 सीटों पर सीधा फायदा हुआ था। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने 'नीच राजनीति' नहीं करने की प्रियंका गांधी की चेतावनी को 'नीच जाति' के मुद्दे में बदल दिया था और 28 सीटों पर भाजपा को जीत दिला दी थी। बयानों से चुनावी बाजी बदल देने का मोदी का यह एक्सपेरिमेंट इस लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिला। 4 मई को मोदी ने चुनाव प्रचार में राजीव गांधी का मुद्दा उठाया। इसके बाद कांग्रेस की तरफ से भी वार-पलटवार हुए। इसी तरह कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा के 1984 के दंगों पर कहे गए 'हुआ तो हुआ' बयान को भी मोदी ने जमकर भुनाया। नतीजा यह रहा कि आखिरी तीन चरण में भाजपा ने 169 में से 117सीटें जीत लीं।भास्कर प्लस ऐप पर पढ़ें विवादित बयानों का चुनाव नतीजों पर क्या असर पड़ा?

1989 के राजीव की 2019 के चुनाव में एंट्री

  • मोदी ने 4 मई को उत्तरप्रदेशके प्रतापगढ़ में रैली की थी। तबउन्होंने पहली बार राजीव गांधी पर सीधा हमला बोला था। मोदी ने कहा था, ''आपके पिताजी को, आपके राजदरबारियों ने मिस्टर क्लीन बना दिया था। गाजे-बाजे के साथ मिस्टर क्लीन-मिस्टर क्लीन चला था। लेकिन देखते ही देखते भ्रष्टाचारी नंबर-1 के रूप में उनका जीवनकाल समाप्त हो गया।''
  • 6 मई को मोदी ने झारखंड के चाईबासा में एक रैली में कहा, ''मैं नामदार के परिवार और उनके रागदरबारियों, चेले चपाटों को चुनौती देता हूं कि अगर हिम्मत है तो पूर्व प्रधानमंत्री जिन पर बोफोर्स के आरोप हैं, उस मुद्दे पर आइए मैदान पर। अगर आप में हिम्मत है कि उसके मान-सम्मान के मुद्दे पर दिल्ली में चुनाव लड़ते हैं।''

मोदी के इन दोनों बयानों का असर :भाजपा ने अपनी 2 सीटें बढ़ाईं

पांचवें चरण की 51 सीटें

भाजपा

कांग्रेस

2019 में नतीजे

42 1
2014 में नतीजे 39 2


मोदी ने आईएनएस विराट पर राजीव गांधी की यात्रा को भी मुद्दा बनाया
मोदी ने 8 मई को दिल्ली में कहा, "कांग्रेस के सबसे बड़े परिवार ने देश की शान आईएनएसविराट का अपने पर्सनल टैक्सी की तरह इस्तेमाल किया था। ये बात तब की है जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे और दस दिन की छुट्टियां मनाने मनाने निकले थे। राजीव गांधी के साथ छुट्टी मनाने वालों में उनके ससुराल वाले भी शामिल थे।" हालांकि, नौसेना के पूर्व अफसरों ने मोदी के दावे का खंडन किया।

पित्रोदा के एक बयान ने आखिरी चरण तक के लिए मोदी को मुद्दा दे दिया

  • कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने 9 मई को 1984 में हुए सिख दंगों पर कहा, ''अब क्या है 84 का? आपने (नरेंद्र मोदी) पांच साल में क्या किया, उसकी बात कीजिए। 84 में जो हुआ, वो हुआ।''
  • मोदी ने 10 मई को हरियाणा के रोहतक में कहा, ''कांग्रेस ने 70 साल तक देश कैसे चलाया है, ये कल सिर्फ तीन शब्दों में खुद ही समेट दिया है,'हुआ तो हुआ'। इसके बाद मोदी ने 11 मई को मोदी ने उत्तर प्रदेश के रॉबर्ट्सगंज और गाजीपुर में, 12 मई को कुशीनगर और देवरिया में, इसी दिन मध्यप्रदेश के खंडवा और इंदौर में, 13 मई को रतलाम में, उसी दिन हिमाचल के सोलन और पंजाब के बठिंडा में, 15 मई को बिहार के पालीगंज, पटना और झारखंड के देवघर में पित्रोदा के 'हुआ तो हुआ' बयान उठाया।

पित्रोदा विवाद के बाद छठे और सातवें चरण की वोटिंग हुई

आखिरी दो चरण की 118 सीटें

भाजपा

कांग्रेस

2019 में नतीजे

75 9
2014 में नतीजे 77 5


राजीव-पित्रोदा विवाद का असर : भाजपा ने 102सीटें बचाईं
दोनों विवादों के बाद आखिरी तीन चरण में कुल 169सीटों पर वोटिंग हुई थी। इनमें से पिछली बार भाजपा ने 116और कांग्रेस ने 7सीटें जीती थीं। इस बार इन दोनों विवादों के बाद भाजपा पिछली बार जीती अपनी 116 में से 101 सीटें बचाने में कामयाब रही।। वहीं, कांग्रेस 10सीट ही जीत सकी।

राजीव-पित्रोदा विवाद के बाद सीटों के नतीजों पर एक नजर

राज्य

कितनी सीटों पर वोटिंग

भाजपा ने सीटें जीतीं

बिहार

21

10

जम्मू-कश्मीर

2

1

झारखंड

11

8

मध्य प्रदेश

23

23

राजस्थान

12

11

उत्तर प्रदेश

41

31

पश्चिम बंगाल

24

8

दिल्ली

7

7

हरियाणा

10

10

हिमाचल प्रदेश

4

4

पंजाब

13

2

चंडीगढ़

1

1

पित्रोदा के बयान का पंजाब में असर नहीं, लेकिन दिल्ली में भाजपा ने सभी सीटें बरकरार रखीं
1984 के सिख दंगों का सबसे ज्यादा असर दिल्ली और पंजाब में हुआ था। मोदी ने भी पित्रोदा का 'हुआ तो हुआ' बयान का जिक्र दिल्ली और पंजाब की हर रैली में भी किया लेकिन पंजाब में इस बयान का असर देखने को नहीं मिला। क्योंकि 2014 में कांग्रेस ने पंजाब की 13 में से 3 सीटें जीती थीं जबकि इस बार कांग्रेस 8 सीटों पर आगे है। कांग्रेस ने न सिर्फ अपनी तीन सीटें बरकरार रखीं बल्कि 5 सीटें अकाली दल-भाजपा और आप पार्टी से छिन लीं। हालांकि, दिल्ली में भाजपा सभी 7 सीटें बरकरार रखने में कामयाब रही।



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