उबर-ओला जैसी कंपनियों के बेड़े में 40% कारें इलेक्ट्रिक रखने की नीति बना सकती है सरकार
आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:
नई दिल्ली. केंद्र सरकार योजना बना रही है कि ओला और उबर जैसी टैक्सी सेवा प्रदाता कंपनियां अपने काफिले में इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की संख्या बढ़ाए। इसके तहत ऐसी कंपनियों को अप्रैल 2026 तक 40% इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियां रखने के निर्देश दिए जा सकते हैं। हालांकि, ओला ने पहले इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के संचालन की शुरुआत की थी, लेकिन सीमित संसाधनों और ज्यादा खर्चे की वजह से यह सफल नहीं हो पाया।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र चाहता है कि तेल आयात को घटाया जाए और प्रदूषण को कम किया जाए ताकि 2015 पेरिस संधि के दौरान किए गए वादे को पूरा किया जा सके। सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन बढ़ाए जाने से ऐसा किया जा सकता है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाला नीति आयोग अन्य मंत्रालयों के साथ नई नीति पर काम कर रहा है।
चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव
न्यूज एजेंसी ने केंद्र की बैठक के दस्तावेजों और एक सूत्र के हवाले से यह जानकारी दी। सरकार ने स्वच्छ यातायात के नए नियमों पर चर्चा के लिए बैठक की। इस बैठक में ओला और उबर को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की तादाद बढ़ाने का निर्देश देने का प्रस्ताव रखा गया। इसके मुताबिक, 2021 तक 2.5%, 2022 तक 5%, 2023 तक 10% और 2023 तक 40% इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियां रखने को कहा जा सकता है।
समिति ने अनुशंसा की थी- निजी उपयोग के दोपहिया वाहन भी इलेक्ट्रॉनिक हों
28 मई को दिल्ली में नीति आयोग, सड़क परिवहन, ऊर्जा, इस्पात, व्यापार आदि मंत्रालयों के अधिकारियों की बैठक हुई। यह सभी भारत में टैक्सी ऑपरेटरों के काफिले में इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियों को बढ़ाने के विचार पर सहमत थे। इस बैठक में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि अप्रैल 2026 के बाद व्यारपारिक उद्देश्य से खरीदी गई कारें इलेक्ट्रॉनिक ही हों।
यह भी कहा गया कि फूड डिलिवरी जैसे व्यापारिक उद्देश्यों के लिए अप्रैल 2023 के बाद खरीदे जाने वाले दोपहिया वाहन भी इलेक्ट्रॉनिक हों। यह प्रस्ताव तब रखा गया है, जब अंतर मंत्रालयीन समिति ने अगले 6-8 सालों में निजी उपयोग के लिए खरीदे जाने वाले सभी स्कूटरों और बाइक्स और सभी तीन पहिया ऑटोरिक्शा इलेक्ट्रॉनिक किए जाने की अनुशंसा की थी।
2017-18 में भारत में 3600 इलेक्ट्रॉनिक वाहन बिके
आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2017-18 में भारत में इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की बिक्री तीन गुना बढ़कर 3600 हो गई। लेकिन, फिर भी यह पेट्रोल-डीजल और गैस से चलने वाले वाहनों की बिक्री की तुलना में महज 0.1% है। इस समयावधि में ऐसे 33 लाख वाहनों की बिक्री हुई। उधर, चीन में इसी दौरान इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की बिक्री में 62% का इजाफा हुआ। 2018 में चीन में 13 लाख इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की बिक्री हुई।
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